Friday, June 26, 2026

पासपोर्ट-नागरिकता विवाद पर सरकार का जवाब, बोली- पिछले 12 साल में नहीं बदला कोई नियम

पासपोर्ट-नागरिकता विवाद: भारतीय पासपोर्ट को लेकर हाल ही में दिए गए विदेश मंत्रालय के एक बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि पासपोर्ट कभी भी भारतीय नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं रहा।

इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा जारी है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से मीडिया में खबर आई कि पासपोर्ट केवल यात्रा (Travel) के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है,

नागरिकता का प्रमाण नहीं। इस बयान के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा और इसे नागरिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए।

सरकार ने क्या कहा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने का कोई नया फैसला नहीं लिया गया है।

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में इस संबंध में कोई बदलाव नहीं हुआ है और पासपोर्ट पहले भी नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं था।

सरकार ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-भारतीय नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं।

इसलिए केवल पासपोर्ट होने से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः सिद्ध नहीं होती।

कानून क्या कहता है?

सरकारी सूत्रों ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला देते हुए बताया कि जनहित में गैर-नागरिकों को भी यात्रा दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं।

वहीं अधिनियम की धारा 6(2)(ए) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, तो सामान्य परिस्थितियों में पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

सरकार का कहना है कि इन कानूनी प्रावधानों के कारण पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जाता।

मतदाता सूची में पासपोर्ट की क्या भूमिका है?

इस विवाद के बीच निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए जिन 12 वैध सहायक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, उनमें पासपोर्ट अब भी शामिल है।

यानी चुनावी प्रक्रिया में पहचान और पात्रता साबित करने के लिए पासपोर्ट का उपयोग किया जा सकता है,

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने विदेश मंत्रालय के बयान की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ऐसे माहौल की तैयारी कर रही है,

जिससे भविष्य में नागरिकता के अधिकारों पर मनमाने फैसले लिए जा सकें।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी राजनीतिक कारणों से

मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने जैसे कदम उठा चुकी है और अब इस तरह के बयान नए विवाद को जन्म दे सकते हैं।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

एक ओर सरकार का कहना है कि उसने कोई नई नीति नहीं बनाई है और केवल मौजूदा कानून की जानकारी दी गई है।

वहीं विपक्ष इस बयान को नागरिक अधिकारों से जोड़कर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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