कोलकाता गोदाम हादसा: कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार (24 जून 2026) को हुआ निर्माणाधीन गोदाम हादसा देश के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक बन गया है।
ट्रांसपोर्ट डिपो रोड स्थित लगभग 20 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बन रहे तीन मंजिला गोदाम की छत दोपहर 12:07 बजे अचानक भरभराकर गिर गई।
हादसे के समय करीब 40 मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। अब तक 11 से 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 मजदूर घायल हैं।
आशंका है कि अभी भी कुछ लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं, जिसके चलते राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर
हादसे के तुरंत बाद भारतीय सेना, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), दमकल विभाग, सिविल डिफेंस और कोलकाता पुलिस ने संयुक्त रूप से राहत अभियान शुरू किया।
भारी कंक्रीट स्लैब और मुड़ी हुई लोहे की बीमों को हटाने के लिए कई क्रेन और 50 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेन लगाई गईं।
बचावकर्मियों ने स्निफर डॉग्स की मदद ली और मलबे के भीतर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन तथा पानी भी पहुंचाया। प्रशासन ने पूरी रात रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा।
सुबह से हिल रहा था ढांचा, फिर भी नहीं रुका निर्माण कार्य
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि निर्माणाधीन गोदाम का ढांचा बुधवार सुबह से ही असामान्य रूप से हिल रहा था।
मजदूरों ने इसकी जांच करने की कोशिश भी की थी, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका गया। कुछ ही देर बाद पूरी संरचना अचानक ढह गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, गोदाम के अंदर कोई विभाजक दीवार या सपोर्टिंग सेक्शन नहीं था, जिससे पूरी इमारत एक साथ गिर गई। अतिरिक्त भार के कारण लोहे के बीम भी कई जगह मुड़ गए।
अब तक 11-15 मौतें, 20 घायल, पांच गिरफ्तार
बताया जा रहा है कि हादसे में अब तक 11 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में कृष्णा चौधरी, रोहित चौधरी और राहुल चौधरी की पहचान हो चुकी है, जबकि कुछ शवों की पहचान अभी बाकी है।
एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती घायलों में दो की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
इनमें गोदाम का मालिक शंभु बेहरा, सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार, श्रमिक सप्लायर मोहम्मद अताउल, सुभाष चौधरी और अन्य जिम्मेदार लोग शामिल हैं।
गोदाम के ठेकेदार मोहम्मद असगर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोपियों पर लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
भवन योजना में मिली गंभीर खामियां
प्रारंभिक जांच में कोलकाता नगर निगम (KMC) के अभियंताओं ने गोदाम की भवन योजना को दोषपूर्ण बताया है।
बताया गया कि भवन की डिजाइन और स्ट्रक्चरल प्लान में गंभीर तकनीकी खामियां थीं। इसी वर्ष 17 जनवरी को इस भवन की योजना को मंजूरी मिली थी।
गोदाम में चाय पत्ती के भंडारण और पैकेजिंग का कार्य किया जाना था। मालिक ने इस जमीन को कोलकाता पोर्ट से 30 वर्ष की लीज पर लिया था।
मुआवजे का ऐलान, पूरे शहर में निर्माण कार्य पर रोक
कोलकाता गोदाम हादसा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक भवनों में 31 जुलाई तक निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया है।
इस दौरान सभी परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। जिन भवनों के दस्तावेज और सुरक्षा मानक सही पाए जाएंगे, केवल उन्हीं को 1 अगस्त के बाद निर्माण की अनुमति मिलेगी।
राजनीतिक हलचल भी तेज
हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। वहीं पूर्व मेयर फिरहाद हकीम को संभावित विरोध और हंगामे की आशंका के चलते घटनास्थल से लगभग 100 मीटर पहले ही वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
महाराष्ट्र के हनुमान मंदिर हादसे से नहीं मिला सबक?
कोलकाता गोदाम हादसा: कोलकाता का यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में महाराष्ट्र में हनुमान मंदिर की छत गिरने से 5 लोगों की मौत हो गई और 30-40 लोग मलबे में दबकर घायल हो गए थे।
दोनों घटनाओं में एक समानता साफ दिखाई देती है, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और समय रहते खतरे के संकेतों को गंभीरता से न लेना।
महाराष्ट्र में भी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे, जबकि कोलकाता में भवन की डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था कटघरे में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि केवल जांच और मुआवजे से समस्या का समाधान नहीं होगा।
निर्माण परियोजनाओं की स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, नियमित निरीक्षण, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।
यदि हर बड़े हादसे के बाद केवल जांच समितियां बनती रहें और दोषियों पर समय रहते कार्रवाई न हो, तो ऐसी त्रासदियां भविष्य में भी दोहराई जाती रहेंगी।
यही कारण है कि कोलकाता का यह हादसा केवल एक शहर की दुर्घटना नहीं, बल्कि देशभर में निर्माण सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली चेतावनी बन गया है।
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