Friday, June 26, 2026

चम्पत राय ने नहीं दिया है इस्तीफ़ा! ट्रस्ट की तरफ से नहीं आई कोई सूचना

चम्पत राय ने नहीं दिया है इस्तीफ़ा!

रिपोर्ट भारत की तहकीकात के अनुसार अब तक रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के ट्रस्टी चम्पत राय ने इस्तीफा नहीं दिया है। अब तक चम्पत राय के इस्तीफे की कोई भी प्रामाणिक और आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है।

ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। विश्व हिन्दू परिषद की ओर से भी ऐसी कोई पुष्टि नहीं की गई है। पर सुबह से कई मीडिया हाउसेज द्वारा इस्तीफे की खबर चलाई जा रही है। यह खबर किस आधार पर चलाई जा रही है, इसका ऑथेंटिक आधार नहीं दिया गया है।

इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष को दिया जाता है। पर ट्रस्ट की तरफ से ऐसी कोई भी जानकारी अब तक नहीं दी गई है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में यदि कोई इस्तीफा होगा तो वह ट्रस्ट के अध्यक्ष महन्त श्री नृत्यगोपाल दासजी महाराज के समक्ष होगा। जब ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई, तब मीडिया में इस्तीफे की खबर किस आधार पर फैलाई जा रही है?

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चम्पत राय ने नहीं दिया है इस्तीफ़ा! ट्रस्ट की तरफ से नहीं आई कोई सूचना 2

क्या किसी अनाम सूत्र के आधार पर इतनी बड़ी खबर चला देना पत्रकारिता है?

जब तक ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक ऐसी खबर को सत्य कैसे माना जा सकता है? क्या किसी के नामहीन सूत्र का दावा ट्रस्ट की आधिकारिक सूचना से बड़ा हो गया?

रिपोर्ट भारत ने जब विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय मीडिया प्रमुख श्री राकेश पाण्डेय जी से बात की तो उन्होंने स्पष्ट कौआ कि अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

तो फिर प्रश्न सीधा है,

आधिकारिक सूचना कहाँ है?

ट्रस्ट का बयान कहाँ है?

अध्यक्ष को दिया गया इस्तीफा कहाँ है?

जब इनमें से कुछ भी सामने नहीं है, तो फिर चम्पत राय जी के इस्तीफे की खबर को सत्य बताकर क्यों चलाया जा रहा है?

जब तक ट्रस्ट स्वयं घोषणा नहीं करता, तब तक यह खबर केवल अपुष्ट दावा है, तथ्य नहीं। इससे साफ है कि चम्पत राय का नाम FIR में नहीं है न ही SIT रिपोर्ट में उन्हें दोषी माना गया है, इसलिए उन्होंने अभी तक कोई इस्तीफा नहीं दिया है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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