Thursday, June 25, 2026

टेलीकॉम, डिफेंस, एआई और आईपीएल बने भारत के नए वैल्यू क्रिएटर, छोटे शहरों की कंपनियां भी तेजी से उभरीं

टेलीकॉम

भारत के निजी क्षेत्र की टॉप 500 कंपनियों की कुल वैल्यू अब करीब 3.4 ट्रिलियन डॉलर, यानी लगभग 321.3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है। यह आंकड़ा कनाडा की जीडीपी से भी बड़ा बताया जा रहा है।

नए वैल्यू क्रिएटर के रूप में टेलीकॉम, डिफेंस, डिजिटल एनर्जी, एआई स्टार्टअप, आईपीएल फ्रेंचाइजी और छोटे शहरों की कंपनियां तेजी से सामने आई हैं। इससे भारतीय प्राइवेट सेक्टर की दिशा और संरचना में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।

टॉप 500 कंपनियों ने बाजार में मजबूत पकड़ बनाई

बर्गंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया 500 रिपोर्ट के अनुसार, इस बार भारत की टॉप निजी कंपनियों का संयुक्त मूल्य 3.4 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट इसे अब तक का सबसे मजबूत मूल्यांकन स्तर मानती है।

इन कंपनियों की बढ़त में उपभोक्ता मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय सेवाओं, टेलीकॉम, डिफेंस और नई तकनीक आधारित कारोबारों की बड़ी भूमिका रही है। पिछले पांच वर्षों में कई कंपनियों ने अपनी वैल्यू में तेज उछाल दर्ज किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में वैल्यू निर्माण अब केवल पारंपरिक उद्योगों या महानगरों तक सीमित नहीं रहा। अलग अलग क्षेत्रों और छोटे शहरों से आने वाली कंपनियां भी अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में उभर रही हैं।

रिलायंस सबसे आगे, एयरटेल और एनएसई की तेज बढ़त

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज शीर्ष स्थान पर रही। कंपनी की वैल्यू करीब 19.36 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। इसके बाद एचडीएफसी बैंक 11.88 लाख करोड़ रुपये और भारती एयरटेल 11.49 लाख करोड़ रुपये के साथ प्रमुख स्थानों पर रहे।

भारती एयरटेल की वैल्यू में पांच साल के दौरान करीब 198 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में एनएसई की वैल्यू में लगभग 189 प्रतिशत का उछाल आया। यह बदलाव टेलीकॉम और वित्तीय बाजार ढांचे की मजबूती को दिखाता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू पांच वर्षों में करीब 16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि एचडीएफसी बैंक की वैल्यू में लगभग 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अडानी समूह की प्रमुख कंपनी की वैल्यू भी पांच साल में लगभग 68 प्रतिशत बढ़ी बताई गई है।

टीसीएस, एलएंडटी, एचएएल और इन्फोसिस भी सूची में शामिल

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की वैल्यू करीब 8.95 लाख करोड़ रुपये बताई गई। एलएंडटी 5.83 लाख करोड़ रुपये, एचएएल 5.52 लाख करोड़ रुपये, एनएसई 4.86 लाख करोड़ रुपये और इन्फोसिस 4.79 लाख करोड़ रुपये के साथ सूची में शामिल रहे।

एचएएल की वैल्यू में पांच वर्षों में करीब 121 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस निर्माण और सरकारी रणनीतिक खरीद से जुड़े क्षेत्रों में बढ़ते निवेश और बाजार भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

सूची में शामिल शीर्ष कंपनियों की संयुक्त वैल्यू भारत की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को दर्शाती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शीर्ष कंपनियों की कुल वैल्यू दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के पैमाने से तुलना योग्य हो चुकी है।

एआई कंपनियां पहली बार वैल्यू क्रिएटर सूची में आईं

एआई क्षेत्र की कंपनियां पहली बार प्रमुख वैल्यू क्रिएटर के रूप में सामने आई हैं। फ्रैक्टल एनालिटिक्स, टेक्नोलॉजी आधारित एआई कंपनियों और सर्वम एआई जैसी नई पीढ़ी की कंपनियों को इस सूची में जगह मिली है।

इन एआई कंपनियों की संयुक्त वैल्यू करीब 60,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह संकेत देता है कि भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल प्रयोग या शोध का क्षेत्र नहीं रही, बल्कि बड़े व्यावसायिक मूल्य निर्माण का हिस्सा बन चुकी है।

आईपीएल फ्रेंचाइजी भी बड़ी आर्थिक शक्ति बनीं

रिपोर्ट में पहली बार पांच आईपीएल फ्रेंचाइजी को भी वैल्यू क्रिएटर के रूप में शामिल किया गया है। इनमें मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स का नाम शामिल है।

इन पांच आईपीएल टीमों की संयुक्त वैल्यू करीब 71,000 करोड़ रुपये बताई गई है। खेल, प्रसारण अधिकार, डिजिटल दर्शक, ब्रांड साझेदारी और फैन बेस ने क्रिकेट फ्रेंचाइजी को अब बड़े कॉरपोरेट एसेट के रूप में स्थापित कर दिया है।

डिफेंस और एयरोस्पेस में नई मजबूती

डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर ने इस सूची में खास उपस्थिति दर्ज कराई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की वैल्यू में भारी उछाल आया, जबकि सोलर इंडस्ट्रीज और स्काईरूट जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र की नई ताकत के रूप में सामने आईं।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सरकारी खरीद, निर्यात की संभावनाएं और निजी भागीदारी ने कंपनियों की वैल्यू बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। डिफेंस कंपनियों की बढ़त बताती है कि यह सेक्टर अब पूंजी बाजार की नजर में भी अहम हो चुका है।

रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार

रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़ी कंपनियां भी वैल्यू निर्माण की दौड़ में तेजी से आगे आई हैं। ओला इलेक्ट्रिक और वारी एनर्जीज जैसी कंपनियों ने नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है।

इन क्षेत्रों की कंपनियों की संयुक्त वैल्यू करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है। स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी तकनीक और सौर उपकरणों की बढ़ती मांग ने इन कंपनियों को निवेशकों के बीच आकर्षक बनाया है।

छोटे शहरों की कंपनियां भी राष्ट्रीय सूची में पहुंचीं

रिपोर्ट का एक बड़ा संकेत यह है कि अब वैल्यू निर्माण केवल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। राजकोट, बीकानेर, कुरुक्षेत्र और राजनांदगांव जैसे शहरों की कंपनियां भी सूची में शामिल हुई हैं।

टियर 2 और टियर 3 शहरों से करीब 50 कंपनियों ने इस सूची में जगह बनाई है। इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 7 लाख करोड़ रुपये बताई गई है, जो भारत के छोटे शहरों में बढ़ती उद्यम शक्ति को दिखाती है।

नए क्षेत्रों ने बदली वैल्यू निर्माण की तस्वीर

भारत की टॉप कंपनियों की सूची अब पहले की तरह केवल बैंकिंग, आईटी और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रही। टेलीकॉम, एआई, डिफेंस, खेल फ्रेंचाइजी, स्वच्छ ऊर्जा और छोटे शहरों की कंपनियों ने वैल्यू निर्माण का नया नक्शा बनाया है।

कंपनियों की यह बढ़त भारत की अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दिखाती है। बाजार पूंजीकरण, तकनीकी विस्तार, नए उपभोक्ता वर्ग, घरेलू मांग और निवेशकों के भरोसे ने मिलकर भारतीय कॉरपोरेट जगत को नया आकार दिया है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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