Tuesday, August 11, 2026

सोम प्रदोष व्रत में क्यों की जाती है शिव-पार्वती की पूजा? जानें सही विधि और महत्व

सोम प्रदोष व्रत: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।

जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन आता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सोमवार का दिन पहले से ही भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए सोम प्रदोष का महत्व और भी बढ़ जाता है।

इस दिन भक्त भगवान शिव का व्रत रखते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पूजा में भगवान शिव के साथ माता पार्वती का पूजन करना भी जरूरी माना गया है।

शिव के साथ माता पार्वती की पूजा क्यों?

प्रदोष व्रत की पूजा में भगवान शिव को अकेले नहीं, बल्कि माता पार्वती के साथ उमापति के रूप में पूजा जाता है। उमापति का अर्थ माता उमा यानी पार्वती के पति भगवान शिव से है।

धार्मिक मान्यताओं में शिव और पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। भगवान शिव को शक्ति के बिना और माता पार्वती को शिव के बिना अधूरा माना जाता है।

इसलिए दोनों की एक साथ पूजा करने को परिवार में सुख, शांति और प्रेम से जोड़कर देखा जाता है।

खासकर विवाहित लोग दांपत्य जीवन में सुख और आपसी प्रेम की कामना से शिव-पार्वती की पूजा करते हैं।

स्कंद पुराण में भी मिलता है उल्लेख

शिव-पार्वती की पूजा से जुड़ी यह मान्यता केवल परंपरा तक सीमित नहीं है। स्कंद पुराण के प्रदोष माहात्म्य में प्रदोष व्रत के दौरान भगवान शिव का उमापति स्वरूप में ध्यान करने का उल्लेख मिलता है।

इसमें भगवान शिव को त्रिनेत्रधारी और चंद्रशेखर स्वरूप में याद करने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव का ध्यान करने से मन शांत होता है और भक्त का ध्यान पूजा में लगा रहता है।

सोम प्रदोष पर कब करें पूजा?

सोम प्रदोष व्रत में शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। आज शिव-पार्वती की पूजा का समय शाम 7 बजकर 05 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट तक बताया गया है।

हालांकि प्रदोष काल का समय अलग-अलग शहरों में थोड़ा बदल सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को जरूर देख लें।

मौली से करें शिव-पार्वती का गठबंधन

सोम प्रदोष के दिन शाम को शिव-पार्वती की पूजा करते समय एक विशेष विधि की जाती है। इसके लिए भगवान शिव के शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा को पूजा स्थान पर स्थापित करें।

इसके बाद मौली यानी कलावा लेकर शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा को सात बार लपेटा जाता है। इसे शिव-पार्वती के प्रतीकात्मक गठबंधन के रूप में किया जाता है।

इसके बाद माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसमें अपनी श्रद्धा के अनुसार चुनरी, सिंदूर, चूड़ी और अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाई जा सकती है।

भोग लगाकर करें सुख-शांति की प्रार्थना

पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती को फल, मिठाई या घर में बने सात्विक पकवान का भोग लगाया जा सकता है। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

विवाहित दंपती साथ बैठकर पूजा कर सकते हैं और अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि और आपसी प्रेम की कामना कर सकते हैं।

शिव-पार्वती की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार शिव-पार्वती की साथ पूजा करने से घर में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है। यह पूजा पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ की कामना से भी जुड़ी मानी जाती है।

सोम प्रदोष के दिन श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से की गई पूजा और प्रार्थना व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा दे सकती है।

नोट: पूजा की विधि और शुभ समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करें।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article