नेपाल में बाढ़ ने मचाई ऐसी तबाही: नेपाल में बुधवार को प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि देखते ही देखते गांव, सड़कें, पुल और इमारतें पानी और मलबे में समा गए।
अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।
नेपाल में आई बाढ़ की तस्वीरें इतनी भयावाह है कि हम आपको दिखा भी नहीं सकते। तबाही के बाद तो जो तस्वीरे सामने आई उसमे किसी के शव पेड़ों से चिपके मिले तो किसी की बॉडी का लोवर पार्टस ही गायब है।
यहीं नहीं मासूम बच्चों के शव मलबे से निकल रहें और न जाने कितने ही लोग मलब में दबे होंगे। आपको बता दें कि जिसे हम मलबा कह रहें है वो किसी के जीवन भर की पूंजी थी, जिसे बाढ़ ने एक झटके में तबाह कर दिया।
तबाही की शुरुआत नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से हुई। चीन के राजदूत झांग माओमिंग के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में भूकंप के बाद हिमस्खलन और लैंडस्लाइड की बात सामने आई है।
लैंगटांग लिरुंग पर्वत के करीब 5200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा लेंडे खोला नदी में जा गिरा।
मलबे ने नदी का रास्ता रोककर अस्थायी बांध बना दिया। इसके टूटते ही पानी और मलबे की विशाल लहर नीचे की ओर दौड़ पड़ी। देखते ही देखते यह बाढ़ भोटेकोशी नदी में पहुंची और फिर त्रिशूली नदी तक फैल गई।
कई जगह महज 30 मिनट में पानी का स्तर 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया। इसी के साथ ही त्रिशूली नदी पर बने कई पुल बह गए,
करीब 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई और कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं ठप पड़ गईं। सैकड़ों पर्यटक भी फंस गए हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्री और भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल की यह तबाही 2013 की केदारनाथ आपदा की भयावह यादें ताजा कर रही है। हर तरफ पानी, मलबा और अपनों की तलाश में भटकते लोग दिखाई दे रहे हैं।
इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी नेपाल के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।

