कैलाश यात्रियों के प्रमुख रास्ते पर अचानक आई तबाही
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के महत्वपूर्ण मार्ग को तबाही में बदल दिया। तिब्बत के गिरोंग क्षेत्र में मौजूद इमिग्रेशन सेंटर भी इसकी चपेट में आया, जहां से काठमांडू के रास्ते कैलाश यात्रियों की आवाजाही होती है।
ईशा फाउंडेशन की कैलाश यात्रा के 21 समूह इस क्षेत्र में थे। इनमें 495 यात्री सुरक्षित वापस लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग तिब्बत और 148 नेपाल में मौजूद हैं। सबसे बड़ी चिंता उन 77 यात्रियों की है, जो बाढ़ के समय इमिग्रेशन सेंटर पर थे।
77 यात्रियों से संपर्क टूटा, कोई आधिकारिक जानकारी नहीं
बाढ़ आने के बाद इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद 77 यात्रियों के ठिकाने और स्थिति की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवक और सहायता दल प्रशासन के साथ संपर्क में हैं तथा प्रभावित स्थान तक पहुंचने और खोज अभियान में सहयोग का प्रयास कर रहे हैं।
प्रारंभिक सूचनाओं में इन 77 लोगों को भारतीय बताया गया था, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी नागरिकता को लेकर अलग अलग जानकारी सामने आई है। इसलिए सभी 77 यात्रियों को भारतीय मानना फिलहाल पुष्ट तथ्य नहीं है। भारतीयों सहित कई देशों के नागरिक इस आपदा में लापता हैं।
पांच मंजिला इमारत के ऊपर से गुजरा मलबे का सैलाब
आपदा क्षेत्र से सामने आए दृश्यों में पांच मंजिला इमारत के आसपास भारी मात्रा में गाद और मलबा दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि विनाशकारी धारा ने इसके पार्किंग क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया, जबकि मुख्य इमारत बड़े नुकसान के बावजूद खड़ी दिखाई दे रही है।
इमिग्रेशन सेंटर और उसके आसपास बाढ़ के समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। आपदा के बाद सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई इलाकों तक पहुंच मुश्किल बनी हुई है, जिसके कारण लापता लोगों की वास्तविक स्थिति पता करने में गंभीर बाधाएं आ रही हैं।
नेपाल का रसुवा क्षेत्र तबाह, बाजार और बस्तियां बहीं
सीमा के दूसरी तरफ नेपाल का रसुवा जिला भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्याफ्रुबेसी और तिमुरे सहित कई इलाकों में बाढ़ ने बस्तियों, सड़कों, पुलों, सुरक्षा चौकियों और परियोजना स्थलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई क्षेत्र संपर्क से कट गए हैं।
स्थानीय बाजारों और व्यापारिक इलाकों में भी भारी विनाश की तस्वीरें सामने आई हैं। शुरुआती सूचनाओं में रसुवा बाजार की करीब 200 दुकानों और बड़ी संख्या में लोगों के गायब होने के दावे किए गए, लेकिन लगभग 1000 लोगों के लापता होने का यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है।
मौतों और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही
ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी मौतें हुई हैं। दोनों तरफ सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
इसलिए 10 हजार लोगों की मौत और संख्या के दोगुनी या तीन गुनी होने जैसे दावे फिलहाल प्रमाणित आंकड़े नहीं हैं। वास्तविक नुकसान गंभीर है, लेकिन बचाव अभियान जारी रहने और कई इलाकों के संपर्क से कटे होने के कारण अंतिम मृतक संख्या अभी निर्धारित नहीं हुई है।
चीन की तरफ से आई बाढ़, चेतावनी व्यवस्था पर उठे सवाल
नेपाल में अचानक भोटे कोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद कुछ ही समय में प्रलयंकारी धारा नीचे के क्षेत्रों में पहुंच गई। प्रारंभिक जांच में ग्लेशियर से जुड़ी हिमस्खलन की घटना, भूस्खलन अथवा अचानक बने जलप्रवाह को संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है।
आपदा के बाद पूर्व चेतावनी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चीन द्वारा नेपाल को ठीक 45 मिनट बाद अलर्ट भेजने का दावा फिलहाल विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों से पुष्ट नहीं हुआ है। बचाव पूरा होने के बाद चेतावनी के समय और सूचना तंत्र की तस्वीर स्पष्ट होगी।
कैलाश मार्ग पर सन्नाटा, सैकड़ों परिवारों की नजर बचाव अभियान पर
जिस कैलाश मानसरोवर मार्ग पर तीर्थयात्रियों, वाहनों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों की लगातार आवाजाही रहती थी, वहां अब मलबा, टूटी सड़कें और बाढ़ से बर्बाद ढांचा दिखाई दे रहा है। संचार नेटवर्क टूटने से कई परिवार अपने परिजनों की खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
ईशा फाउंडेशन के 77 यात्रियों सहित बड़ी संख्या में लापता लोगों की खोज इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नेपाल और चीन दोनों तरफ राहत तथा बचाव अभियान चल रहे हैं। आपदा का वास्तविक पैमाना सभी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बनने के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा।

