Tuesday, August 25, 2026

चीनी के दाम में बड़ी गिरावट, 55 रुपये किलो तक पहुंचीं! अब रसोई में राहत का इंतजार

चीनी के दाम में बड़ी गिरावट: चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार के कदमों का असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है।

सरकार के मुताबिक, चीनी के एक्स-मिल दाम में करीब 18 फीसदी की गिरावट आई है और कीमतें घटकर लगभग 55 रुपये प्रति किलो रह गई हैं।

पिछले सप्ताह यही भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 67 रुपये प्रति किलो तक चले गए थे।

सरकार का कहना है कि कीमतों में आई तेजी बाजार में वास्तविक कमी की वजह से नहीं थी, बल्कि कुछ जगहों पर जमाखोरी और सट्टेबाजी ने भी इसमें भूमिका निभाई।

आयात की मंजूरी के बाद बदली बाजार की तस्वीर

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी।

इस फैसले के बाद बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता कम हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ा।

सरकार ने थोक खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी कम कर दी है। इसके अलावा राज्यों को जमाखोरी और सट्टेबाजी की संभावित गतिविधियों की जांच तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

जमाखोरों पर सरकार की सख्त नजर

सरकार का मानना है कि कुछ मिलों की ओर से ऊंची कीमतों पर चीनी बेचे जाने के कारण बाजार में तेजी देखने को मिली।

अब एक्स-मिल कीमतों में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में जमाखोरी की जांच के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के अनुसार, फिलहाल किसी भी राज्य में एक्स-मिल चीनी की कीमत 55 रुपये प्रति किलो से अधिक नहीं है।

संगठन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

थोक बाजार में राहत, लेकिन दुकानों पर असर बाकी

एक्स-मिल कीमतों में गिरावट के बावजूद इसका पूरा फायदा अभी आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है।

24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये प्रति किलो और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।

इससे साफ है कि मिल स्तर पर कीमतें कम होने लगी हैं, लेकिन खुदरा बाजार में इसका असर पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

आमतौर पर एक्स-मिल कीमत और खुदरा कीमत के बीच लगभग 7 से 8 रुपये प्रति किलो का अंतर रहता है।

ऐसे में अगर थोक कीमतों में गिरावट बनी रहती है तो आने वाले दिनों में किराना दुकानों पर भी चीनी सस्ती होने की उम्मीद की जा सकती है।

आखिर क्यों बढ़ी थी चीनी की कीमत?

2025-26 मार्केटिंग ईयर में देश का चीनी उत्पादन पहले लगाए गए अनुमान से कम रहने की संभावना है।

पहले करीब 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान था, जिसे अब घटाकर लगभग 306 लाख टन कर दिया गया है। वहीं देश में सालाना चीनी की खपत करीब 280 से 285 लाख टन के आसपास है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि कीमतों में हालिया उछाल को केवल उत्पादन में संभावित कमी के आधार पर नहीं समझा जा सकता।

सरकार ने जमाखोरी और बाजार में कृत्रिम तरीके से कीमतें बढ़ाने की कोशिशों को भी तेजी की अहम वजह माना है।

अब आम लोगों को कब मिलेगी राहत?

फिलहाल चीनी के थोक बाजार में गिरावट का रुख दिखाई दे रहा है। सरकार के आयात संबंधी फैसले, स्टॉक सीमा में बदलाव और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई से बाजार में कीमतों पर दबाव बना है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट का फायदा आम उपभोक्ता तक कितनी जल्दी पहुंचता है।

अगर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहती है और जमाखोरी पर कार्रवाई जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है।

यानी फिलहाल थोक बाजार में राहत की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन घर की रसोई तक इसका असर पहुंचने का इंतजार है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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