भारत ने गेहूं के निर्यात से हटाई रोक: भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं के निर्यात पर लगी रोक को हटा दिया है।
अब भारत से ड्यूरम गेहूं, आटा और गेहूं से जुड़े दूसरे उत्पादों का निर्यात किया जा सकेगा।
इस फैसले की जानकारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन में दी गई है।
सरकार के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है।
साथ ही, उन देशों को भी राहत मिल सकती है जो अपनी जरूरत के लिए गेहूं का आयात दूसरे देशों से करते हैं।
भारत के किसानों और गेहूं के कारोबार से जुड़े निर्यातकों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गेहूं का उत्पादन
भारत गेहूं उत्पादन के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। देश में गेहूं की पिछली फसल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में गेहूं का उत्पादन करीब 120.6 मिलियन टन रहा है।
उत्पादन बढ़ने के बाद सरकार के सामने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की चुनौती भी थी।
अब निर्यात की अनुमति मिलने से भारतीय गेहूं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने का मौका मिलेगा।
2022 में लगाया गया था निर्यात पर प्रतिबंध
भारत सरकार ने साल 2022 में बड़े पैमाने पर गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया था।
उस समय रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद दुनियाभर में खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
भारत सरकार का उद्देश्य देश में पर्याप्त गेहूं उपलब्ध रखना और घरेलू बाजार में खाद्य सुरक्षा बनाए रखना था।
इसी वजह से गेहूं के निर्यात पर कई तरह की पाबंदियां लागू की गई थीं।
हालांकि, इसके बाद सरकार ने जरूरत और परिस्थितियों को देखते हुए कुछ देशों को सीमित मात्रा में गेहूं भेजने की अनुमति भी दी।
इसी साल फरवरी में भी भारत ने गेहूं की सीमित खेप के निर्यात की इजाजत दी थी।
अब बढ़ सकती है अंतरराष्ट्रीय सप्लाई
निर्यात पर रोक हटने के बाद भारत से गेहूं की ज्यादा मात्रा दूसरे देशों में भेजी जा सकेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
खासकर एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के उन देशों को फायदा मिल सकता है,
जो गेहूं की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं। भारत इन देशों के लिए गेहूं का एक अहम सप्लायर बन सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का भी असर
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर वैश्विक अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। दोनों देश दुनिया के बड़े अनाज उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल हैं।
युद्ध और इससे जुड़ी परिस्थितियों के कारण काला सागर क्षेत्र से अनाज की सप्लाई प्रभावित हुई है।
काला सागर क्षेत्र से गेहूं और दूसरे अनाज की बड़ी मात्रा दुनियाभर के बाजारों तक पहुंचती है।
ऐसे में भारत से गेहूं का निर्यात बढ़ने पर वैश्विक बाजार में सप्लाई का दबाव कुछ कम हो सकता है।
किसानों और निर्यातकों को मिल सकता है फायदा
सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा गेहूं से जुड़े किसानों और कारोबारियों को मिलने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने से भारतीय गेहूं की मांग बढ़ सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए नए बाजार मिलेंगे और निर्यात कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, घरेलू बाजार में गेहूं की कीमत और उपलब्धता पर भी सरकार की नजर रहेगी।
कुल मिलाकर निर्यात पर रोक हटाने का फैसला भारत के कृषि क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक खाद्य आपूर्ति के लिए भी अहम माना जा रहा है।

