फ्रांस में खुल रहा पहला भव्य हिंदू मंदिर: फ्रांस की राजधानी पेरिस के पास अब भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं की एक खास पहचान देखने को मिलेगी।
बुसी-सेंट-जॉर्जेस में बना BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर सितंबर 2026 में आधिकारिक रूप से खुलने जा रहा है। मंदिर के उद्घाटन के साथ यहां 13 दिनों तक भारतीय संस्कृति से जुड़ा खास कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं होगा, बल्कि भारतीय कला, संगीत, परंपराओं और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का एक बड़ा केंद्र भी बनेगा।
2 से 14 सितंबर तक होगा ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’
मंदिर के उद्घाटन के मौके पर 2 से 14 सितंबर तक ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ का आयोजन किया जाएगा।
13 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भारतीय संगीत, कला, परंपराओं और संस्कृति से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम होंगे।
इसका उद्देश्य फ्रांस के लोगों और यहां रहने वाले भारतीय समुदाय को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है।
इस दौरान लोगों को हिंदू परंपराओं के साथ भारतीय कला और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा।
कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों के साथ हिंदू समुदाय और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
भारत से आए खास पत्थरों से तैयार हुआ मंदिर
पेरिस के पास बने इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी वास्तुकला है। मंदिर में भारत से लाए गए खास पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।
इन पत्थरों पर भारत की पारंपरिक नक्काशी कला की झलक देखने को मिलती है।
कई पत्थरों पर कारीगरों ने हाथ से बारीक नक्काशी की है। इसके लिए भारत में लंबे समय से चली आ रही पारंपरिक नक्काशी की तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
पत्थरों को भारत में तैयार करने के बाद फ्रांस लाया गया और मंदिर की संरचना में लगाया गया।
मंदिर के निर्माण में भारतीय कारीगरों के साथ फ्रांस के विशेषज्ञों ने भी काम किया। इनमें नोट्रे-डाम कैथेड्रल की मरम्मत से जुड़े कुछ कारीगर भी शामिल रहे।
इस वजह से मंदिर में भारतीय शिल्पकला और फ्रांस की निर्माण विशेषज्ञता का सुंदर मेल देखने को मिलता है।
मंदिर की बनावट में पारंपरिक हिंदू वास्तुकला के कई तत्व शामिल हैं। इसमें गुंबद, स्तंभ और शिखर जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं।
मंदिर की पूरी डिजाइन भारतीय मंदिरों की पारंपरिक शैली से प्रेरित है।
1970 में आया था मंदिर बनाने का विचार
फ्रांस में हिंदू मंदिर बनाने का विचार कोई नया नहीं है। BAPS पेरिस की जानकारी के अनुसार, पहली बार 1970 में फ्रांस में मंदिर बनाने की योजना के बारे में सोचा गया था।
इसके करीब 25 साल बाद 1995 में पेरिस में मंदिर बनाने की योजना पर काम आगे बढ़ा।
इसके बाद 2017 में बुसी-सेंट-जॉर्जेस में मंदिर के लिए जमीन मिली। 2021 में मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
अब सितंबर 2026 में इसके उद्घाटन के साथ कई दशकों पुराना यह प्रयास एक नए पड़ाव पर पहुंच जाएगा।
50 से ज्यादा देशों में BAPS के मंदिर
BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था एक वैश्विक हिंदू संस्था है। यह धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सेवा से जुड़े काम भी करती है।
BAPS के मुताबिक, दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में उसके 1,300 से अधिक मंदिर हैं। भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में भी इसके मंदिर मौजूद हैं।
इन मंदिरों में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं होता, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषा, संगीत, कला और बच्चों से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
इसी वजह से BAPS के मंदिर कई जगहों पर भारतीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक केंद्र की भूमिका भी निभाते हैं।
दिल्ली और गांधीनगर के अक्षरधाम भी BAPS से जुड़े
भारत में BAPS के प्रसिद्ध मंदिरों में दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम और गांधीनगर का अक्षरधाम परिसर शामिल है।
इन मंदिरों की वास्तुकला और नक्काशी में भारतीय शिल्प परंपरा की झलक देखने को मिलती है।
अब पेरिस के पास बना BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। सितंबर में होने वाले उद्घाटन और ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ के जरिए भारतीय संस्कृति को फ्रांस में एक बड़े मंच पर पेश किया जाएगा।
यह मंदिर धार्मिक पहचान के साथ-साथ भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का भी एक नया उदाहरण बन सकता है।

