MP ATS का बड़ा खुलासा: मध्यप्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की जांच में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी इजहार उल हक ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह और उसके सहयोगी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में थे और ‘मिशन 2047’ नामक एजेंडे के तहत काम कर रहे थे।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में अपने प्रभाव का विस्तार करना और युवाओं को अपने साथ जोड़ना था।
एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए होता था संपर्क
ATS अधिकारियों के अनुसार, आरोपी विदेशी आकाओं के साथ सीधे संपर्क में रहने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे।
व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सुरक्षित संचार माध्यमों के जरिए उन्हें निर्देश और संदेश भेजे जाते थे।
जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े लोग अपनी गतिविधियों को गोपनीय बनाए रखने के लिए डिजिटल तकनीकों का सहारा लेते थे,
जिससे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके।
युवाओं को स्लीपर सेल बनाने की थी योजना
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों का मुख्य फोकस युवाओं को प्रभावित कर उन्हें संगठन से जोड़ना था।
ATS के अनुसार, उन्हें वैचारिक रूप से तैयार कर भविष्य में स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही थी।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि कथित नेटवर्क विभिन्न राज्यों में अपने समर्थकों का दायरा बढ़ाने के प्रयास में जुटा था।
अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों का मकसद केवल भर्ती तक सीमित नहीं था,
बल्कि ऐसे लोगों का समूह तैयार करना था, जो जरूरत पड़ने पर संगठन के निर्देशों के अनुसार सक्रिय हो सकें।
‘मिशन 2047’ को लेकर जांच एजेंसियों का दावा
ATS की जांच में कथित तौर पर यह बात भी सामने आई है कि आरोपी ‘मिशन 2047’ के नाम से प्रचारित एक विचारधारा से प्रभावित थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2047 तक देश में व्यापक वैचारिक और संगठनात्मक बदलाव लाना था।
हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और एजेंसियां विभिन्न डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं।
बिहार, भोपाल और सहारनपुर से हुई गिरफ्तारियां
इस मामले में सबसे पहले इजहार उल हक को बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया गया।
ATS के अनुसार, फराज की भूमिका नेटवर्क विस्तार और नए लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि उसे एक पाकिस्तानी हैंडलर द्वारा कथित तौर पर एक बड़े आतंकी संगठन के कमांडर के रूप में परिचित कराया गया था।
एजेंसियों का आरोप है कि फराज को स्लीपर सेल तैयार करने और नए सदस्यों की भर्ती का जिम्मा सौंपा गया था।
वहीं, नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अन्य आरोपियों को नेटवर्क से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी।
डिजिटल सबूतों की फोरेंसिक जांच जारी
ATS ने आरोपियों के कब्जे से कई डिजिटल दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की है।
फिलहाल इन सभी उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नेटवर्क की गतिविधियों,
विदेशी संपर्कों और संभावित योजनाओं को लेकर और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की तलाश में जुटी हैं।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि देश के अन्य राज्यों में इस नेटवर्क की पहुंच कितनी व्यापक थी और इसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।

