Gen Alpha In India: Gen Z के बाद अब एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो रही है, जो आने वाले वर्षों में भारत की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है।
करोड़ों की संख्या में मौजूद Gen Alpha के बच्चे आज भले ही वोट नहीं डाल सकते, लेकिन अगले कुछ चुनावों के बाद यही पीढ़ी देश के सबसे बड़े युवा वोटर समूहों में शामिल होने वाली है।
Gen Z के बाद अब किसकी बारी?
Gen Alpha In India: उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा जैसे राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में युवा मतदाताओं की भूमिका अहम रहने वाली है।
18 से 29 साल की उम्र वाले Gen Z वोटर्स पहले ही अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।
युवा और छात्र आंदोलनों से लेकर सोशल मीडिया पर चलने वाली राजनीतिक बहसों तक, Gen Z ने दिखा दिया है कि नई पीढ़ी सिर्फ राजनीति को देखने वाली नहीं, बल्कि उसे प्रभावित करने वाली ताकत भी बन चुकी है।
लेकिन Gen Z के पीछे एक और बड़ी पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है—Gen Alpha।
कौन हैं Gen Alpha?
Gen Alpha In India: आम तौर पर 2010 से 2024 के बीच जन्म लेने वाले बच्चों को Gen Alpha कहा जाता है।
यह ऐसी पीढ़ी है, जिसने इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और अब Artificial Intelligence को अपने जीवन में किसी नई चीज की तरह नहीं, बल्कि सामान्य माहौल के तौर पर देखा है।
इनके लिए ऑनलाइन क्लास, वीडियो कॉल, स्मार्ट टीवी, टैबलेट और डिजिटल कंटेंट बचपन से ही रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहे हैं।
यही वजह है कि Gen Alpha को पिछली पीढ़ियों से अलग और ज्यादा डिजिटल पीढ़ी माना जाता है।
आखिर ‘Alpha’ नाम ही क्यों?
Gen Alpha In India: Gen Alpha नाम का इस्तेमाल ऑस्ट्रेलियाई सामाजिक शोधकर्ता Mark McCrindle ने लोकप्रिय किया।
Gen X, Gen Y और Gen Z के बाद अगली पीढ़ी का नाम अंग्रेजी अक्षरों के बजाय ग्रीक alphabet के पहले अक्षर Alpha पर रखा गया।
यानी Gen Alpha सिर्फ एक नई पीढ़ी का नाम नहीं है, बल्कि यह उस दौर की शुरुआत को भी दर्शाता है जहां इंसान का जीवन और technology पहले से कहीं ज्यादा करीब आ चुके हैं।
भारत में कितनी बड़ी है Gen Alpha की आबादी?
भारत के लिए Gen Alpha का आकार बेहद महत्वपूर्ण है। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक देश में इस पीढ़ी की आबादी करीब 33 करोड़ से 42 करोड़ के बीच हो सकती है।
यानी भारत की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज इसी उम्र वर्ग में है।
फिलहाल इनमें से ज्यादातर बच्चे वोट देने की उम्र से काफी दूर हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में तस्वीर तेजी से बदलने वाली है।
जैसे-जैसे ये बच्चे 18 साल की उम्र पार करेंगे, वैसे-वैसे चुनावी राजनीति में इनकी संख्या भी बढ़ती जाएगी।
पहली बार वोट कब डालेंगे Gen Alpha?
भारत में मतदान की न्यूनतम उम्र 18 साल है। इसलिए Gen Alpha के सबसे बड़े सदस्य, यानी 2010 के आसपास जन्मे बच्चे, 2028 से 2029 के आसपास पहली बार वोट डालने की उम्र में पहुंच सकते हैं।
इसका मतलब है कि 2029 का लोकसभा चुनाव इस पीढ़ी के शुरुआती वोटर्स के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा बन सकता है।
इसके बाद हर चुनाव के साथ Gen Alpha का वोटिंग समूह बड़ा होता जाएगा। वहीं 2024 में जन्मे इस पीढ़ी के सबसे छोटे सदस्य लगभग 2042 में 18 साल की उम्र पूरी करेंगे।
यानी 2030 के दशक में जहां Gen Alpha धीरे-धीरे चुनावी मैदान में उतरना शुरू करेगी, वहीं 2040 के दशक तक यह एक बेहद बड़ा वोटर समूह बन सकती है।
सिर्फ डिजिटल नहीं, राजनीतिक रूप से भी अलग होगी ये पीढ़ी?
Gen Alpha की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ इनकी संख्या नहीं, बल्कि इनका digital-first upbringing है।
Gen Z ने इंटरनेट को तेजी से बढ़ते हुए देखा, लेकिन Gen Alpha का बचपन ही इंटरनेट और स्मार्ट डिवाइसेस के बीच बीता है। इनके लिए जानकारी हासिल करने का तरीका किताबों और टीवी तक सीमित नहीं है।
Short videos, social media platforms, podcasts, AI tools और डिजिटल न्यूज इनके विचार बनाने के प्रमुख माध्यमों में शामिल हो सकते हैं।
यही वजह है कि आने वाले समय में राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ रैलियां और पोस्टर पर्याप्त नहीं होंगे। उन्हें इस नई पीढ़ी की भाषा, प्लेटफॉर्म और सोच को भी समझना पड़ेगा।
2029 में शुरुआत, 2035 के बाद बड़ा असर
Gen Alpha का पूरा राजनीतिक प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देगा। 2029 में इस पीढ़ी का केवल शुरुआती हिस्सा ही वोट देने की उम्र में पहुंचेगा।
लेकिन 2030 के दशक के मध्य तक Gen Alpha के वोटर्स की संख्या लगातार बढ़ती जाएगी। इसके बाद चुनावी राजनीति में इनकी मौजूदगी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
यानी आज जो बच्चे स्कूल, टैबलेट और मोबाइल की दुनिया में बड़े हो रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में मतदान केंद्रों की कतार में खड़े दिखाई देंगे।
Gen Z ने सवाल पूछे, Gen Alpha क्या फैसला करेगी?
Gen Z ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक मौजूदगी का संकेत देना शुरू कर दिया है।
अब उसके पीछे Gen Alpha खड़ी है,एक ऐसी पीढ़ी जिसका बचपन डिजिटल दुनिया में बीता है और जिसकी राजनीतिक उम्र अभी शुरू भी नहीं हुई है।
आज Gen Alpha के बच्चे शायद चुनावी भाषणों को समझने की उम्र में नहीं हैं, लेकिन आने वाले 10 से 15 वर्षों में यही बच्चे तय कर सकते हैं कि वे किस मुद्दे को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं और किस तरह की राजनीति को अपना समर्थन देते हैं।
आज की Gen Alpha ही कल की सबसे बड़ी युवा राजनीतिक ताकतों में से एक होगी। सवाल सिर्फ इतना है,जब इनका पहला वोट पड़ेगा, तब भारत की राजनीति कितनी बदल चुकी होगी?

