महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने बुजुर्गों के अकेलेपन और पारिवारिक दूरी की गंभीर तस्वीर उजागर कर दी है।
एक घर के भीतर कई दिनों तक रेडियो बजता रहा, लेकिन उस घर में रहने वाले बुजुर्ग दंपती की जिंदगी खामोशी से खत्म हो चुकी थी।
जब पड़ोसियों और रिश्तेदारों को इसकी जानकारी मिली तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए।
बंद घर से उठी बदबू ने खोला राज
वाड़ी थाना क्षेत्र की दवलामेठी स्थित म्हाडा कॉलोनी में रहने वाले 77 वर्षीय गंगाधर भोंगड़े और उनकी 75 वर्षीय पत्नी कौशल्या भोंगड़े अपने घर में मृत पाए गए।
घटना का पता तब चला जब कौशल्या के दामाद मोहम्मद गौस उनसे मिलने पहुंचे। घर कई दिनों से बंद था और अंदर से तेज दुर्गंध आ रही थी।
स्थिति संदिग्ध लगने पर पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खोला गया। अंदर प्रवेश करते ही सभी के होश उड़ गए।
घर के अलग-अलग हिस्सों में पति और पत्नी के शव पड़े हुए थे।
40 साल का साथ, एक साथ खत्म हुई जिंदगी
गंगाधर भोंगड़े रक्षा विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। उन्होंने अपनी पत्नी कौशल्या के साथ लगभग चार दशक का जीवन बिताया।
दंपती की अपनी कोई संतान नहीं थी, लेकिन गंगाधर ने पत्नी की पहली शादी से हुए बच्चों को भी अपनाया था और परिवार की जिम्मेदारियां निभाई थीं।
बताया जाता है कि कौशल्या लंबे समय से बीमार थीं और अधिकांश समय बिस्तर पर रहती थीं।
उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी गंगाधर ही संभालते थे। दवा से लेकर भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों तक हर काम वही करते थे।
रसोई में गिरे पति, मदद के बिना रह गई पत्नी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि गंगाधर रसोई में किसी कारणवश गिर गए थे।
गिरने के बाद वे उठ नहीं सके और वहीं उनकी मौत हो गई। उनका मोबाइल फोन भी पास में बंद अवस्था में मिला।
दूसरी ओर, पूरी तरह पति पर निर्भर कौशल्या बिस्तर से उठने की स्थिति में नहीं थीं। घर में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था।
ऐसे में कई दिनों तक उन्हें न भोजन मिल सका और न ही पानी।
जांचकर्ताओं का मानना है कि अत्यधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी के कारण अंततः उनकी भी मौत हो गई।
कई दिनों तक किसी को नहीं हुई भनक
घर के बाहर 27, 28 और 29 मई के अखबार पड़े मिले, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि घटना 26 मई की रात या उसके आसपास हुई होगी।
इस दौरान किसी को भी घर के अंदर चल रही इस त्रासदी का अंदाजा नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार, दंपती शांत स्वभाव के थे और अधिक मेलजोल नहीं रखते थे।
इसी वजह से कई दिनों तक उनके घर का दरवाजा बंद रहने पर भी किसी ने विशेष ध्यान नहीं दिया।
बेटी को दी थी तबीयत खराब होने की जानकारी
जांच में यह भी सामने आया है कि गंगाधर ने कुछ दिन पहले अपनी बड़ी बेटी से संपर्क कर अपनी खराब सेहत के बारे में बताया था।
उन्होंने अस्पताल जाने की आवश्यकता का जिक्र करते हुए पत्नी की देखभाल के लिए किसी को भेजने का अनुरोध भी किया था।
परिवार की ओर से जल्द आने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया।
जब तक रिश्तेदार पहुंचते, दोनों की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।
पुलिस को नहीं मिले किसी साजिश के संकेत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घर से चोरी, लूटपाट या किसी आपराधिक गतिविधि के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
शुरुआती जांच में मामला प्राकृतिक परिस्थितियों में हुई मौत का प्रतीत हो रहा है।
हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
बुजुर्गों के अकेलेपन पर उठे सवाल
यह घटना केवल एक दंपती की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है।
उम्र के अंतिम पड़ाव में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब अकेलापन कई बार जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी को और कम कर देता है।
नागपुर की यह घटना उन हजारों बुजुर्गों की स्थिति की याद दिलाती है, जो परिवार से दूर या सीमित सहायता के सहारे अपना जीवन गुजार रहे हैं।

