PM मोदी का वीडियो ब्लॉक होने पर बवाल: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षाओं की निष्पक्षता और पेपर लीक के गंभीर मुद्दों को लेकर युवाओं का एक विशाल विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हजारों छात्रों और युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही धांधलियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने संसद भवन की ओर आगे बढ़ने का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा भी लेना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग ने भी तेजी से जोर पकड़ लिया था।
युवाओं के नाम प्रधानमंत्री का सीधा और अनूठा संदेश
जंतर-मंतर पर पनप रहे जनाक्रोश और देश के युवाओं के बीच बढ़ते अविश्वास को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस पूरे मामले में हस्तक्षेप किया।
उन्होंने देश के युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए एक बेहद अनोखा और नया तरीका अपनाया।
प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सेल्फी मोड में खुद एक वीडियो रिकॉर्ड करके साझा किया।
इस वीडियो के माध्यम से उन्होंने देश की नई पीढ़ी यानी जेन-जी को सीधे तौर पर संबोधित किया।
अपने इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार ने हालिया पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रणाली में सामने आई गड़बड़ियों को अत्यंत गंभीरता से लिया है।
उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया कि इस मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जा रही है तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो रिस्ट्रिक्ट होने का बड़ा विवाद
प्रधानमंत्री का यह वीडियो इंटरनेट पर आते ही तेजी से प्रसारित होने लगा, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई।
देर रात करीब एक बजकर पच्चीस मिनट पर उपयोगकर्ताओं ने पाया कि प्रधानमंत्री का यह पहला वीडियो भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।
जब उपयोगकर्ताओं ने इसका कारण जानने के लिए दिए गए विकल्प पर क्लिक किया, तो स्क्रीन पर लिखा हुआ आया कि कानूनी अनुरोधों का पालन करते हुए इस सामग्री को भारत क्षेत्र में प्रतिबंधित किया गया है।
देश के सर्वोच्च पद पर बैठे जननेता के आधिकारिक संदेश पर इस प्रकार का प्रतिबंध लगने से चारों तरफ हड़कंप मच गया।
इस पूरे मामले पर जब स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आम जनता ने तीखे सवाल उठाने शुरू किए, तब जाकर संबंधित सोशल मीडिया कंपनी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
कंपनी ने अपनी आधिकारिक सफाई में कहा कि प्रधानमंत्री का यह वीडियो किसी सरकारी निर्देश या कानूनी दबाव के तहत नहीं हटाया गया था, बल्कि यह उनके स्वचालित सिस्टम की एक बहुत बड़ी तकनीकी चूक का नतीजा था।
उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि इस भूल को तुरंत सुधार लिया गया है और वीडियो को फिर से बहाल कर दिया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया कंपनी की इस सफाई के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ।
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया और कंपनी के वैश्विक प्रमुखों को इस बड़ी चूक पर जवाबदेही तय करने के लिए तलब किया।
प्रधानमंत्री का दूसरा वीडियो और नई घोषणाएं
पहले वीडियो के बाद पैदा हुए विवाद और परीक्षाओं के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने एक और वीडियो संदेश जारी किया।
इस दूसरे वीडियो में उन्होंने देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और धांधली-मुक्त बनाने के लिए कुछ अति-महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की।
उन्होंने देश को बताया कि राष्ट्रीय स्तर की सभी परीक्षाओं की व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन करने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल यानी टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है।
इस विशेष कार्यबल का मुख्य काम परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमियों को पहचानना और उनमें सुधार के लिए ठोस कदम सुझाना होगा।
प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि यह कमेटी परीक्षाओं में इंसान के सीधे हस्तक्षेप को कम से कम करने और आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने पर काम करेगी।
सरकार ने यह संकल्प जताया कि इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति के हर व्यावहारिक सुझाव को पूरी निष्ठा से लागू किया जाएगा ताकि देश की भावी पीढ़ी का अपनी परीक्षा प्रणाली और सरकार की नियत पर अटूट भरोसा हमेशा कायम रह सके।

