मीराबाई चानू ने रचा इतिहास: स्कॉटलैंड के ग्लासगी में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया।
महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर भारत के खाते में पहला स्वर्ण पदक जोड़ा।
उन्होंने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
इस जीत के साथ मीराबाई ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने का गौरव हासिल किया।
96 साल के इतिहास में पहली महिला बनीं
मीराबाई चानू का यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि भारतीय खेल इतिहास का एक सुनहरा अध्याय है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के 96 वर्षों के इतिहास में वह पहली महिला वेटलिफ्टर बन गई हैं, जिसने लगातार तीन संस्करणों में स्वर्ण पदक जीता है।
खास बात यह भी है कि तीनों बार भारत का पहला गोल्ड मेडल भी मीराबाई ने ही दिलाया, जिससे उनकी उपलब्धि और भी खास बन जाती है।
रिकॉर्डों की नई इबारत लिखी
ग्लासगी में मीराबाई ने सिर्फ गोल्ड नहीं जीता, बल्कि तीन बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम किए।
48 किलोग्राम वर्ग में स्नैच (85 किलोग्राम), क्लीन एंड जर्क (105 किलोग्राम) और कुल 190 किलोग्राम वजन उठाने का रिकॉर्ड अब उनके नाम दर्ज हो गया है।
इससे पहले किसी भी महिला वेटलिफ्टर ने इस वर्ग में इतना वजन नहीं उठाया था। उनकी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास ने उन्हें विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।
अर्जुन अवॉर्ड का सपना अब भी अधूरा
इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद मीराबाई चानू का एक सपना अब भी अधूरा है। उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें पद्मश्री,
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न सम्मान और ओलंपिक पदक मिल चुका है, लेकिन बचपन से जिस अर्जुन अवॉर्ड का सपना देखा था, वह अब तक पूरा नहीं हो सका है।
मीराबाई ने बताया कि जब वह मणिपुर के अपने छोटे से गांव में बांस के डंडों से वजन उठाकर अभ्यास करती थीं, तब अर्जुन अवॉर्ड पाने वाले खिलाड़ियों की तस्वीरें देखकर प्रेरित होती थीं।
उनका कहना है कि यदि भविष्य में यह सम्मान भी उन्हें मिल जाए तो उनके बचपन का सपना पूरा हो जाएगा।
विश्व स्तर पर भी कायम है दबदबा
मीराबाई चानू पहले भी कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। वर्ष 2021 में एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग के क्लीन एंड जर्क में 119 किलोग्राम वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
यही वजह है कि उन्हें दुनिया की सबसे बेहतरीन वेटलिफ्टरों में गिना जाता है। खेल के साथ-साथ वह मणिपुर पुलिस में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
ऋषिकांत सिंह ने भी बढ़ाया भारत का मान
भारतीय दल के लिए एक और अच्छी खबर पुरुषों की 60 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा से आई। मणिपुर के ही वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।
हालांकि क्लीन एंड जर्क की आखिरी दो कोशिशों में वह सफल नहीं हो सके, जिसके कारण स्वर्ण पदक उनके हाथ से निकल गया। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।
देश के लिए प्रेरणा बनीं मीराबाई
मीराबाई चानू की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाली इस खिलाड़ी ने अपने दम पर विश्व खेल मंच पर भारत का नाम रोशन किया है।
लगातार तीन कॉमनवेल्थ स्वर्ण, विश्व रिकॉर्ड और ओलंपिक सफलता के बाद भी उनका विनम्र स्वभाव और नए सपनों को हासिल करने का
जज्बा लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बना हुआ है। आने वाले वर्षों में उनसे और भी ऐतिहासिक उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।

