PoJK चुनाव बना खूनी संघर्ष: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान राजनीतिक तनाव हिंसक झड़पों में बदल गया।
चुनाव प्रक्रिया का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई स्थानों पर टकराव की खबरें सामने आईं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई लोगों की जान गई और दर्जनों लोग घायल हुए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटनाओं के बाद कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान असहमति जताने वालों पर सख्ती बरती जा रही है,
जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था विरोध
PoJK में विधानसभा चुनाव पहले एक ही चरण में कराए जाने थे, लेकिन लगातार विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के चलते चुनाव को तीन चरणों में कराने का फैसला लिया गया।
पहले चरण में मीरपुर डिवीजन में मतदान हुआ, जबकि अगले चरण मुजफ्फराबाद और पुंछ डिवीजन में प्रस्तावित हैं।
चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने चुनावी व्यवस्था और पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन की घोषणा की थी।
इसके बाद संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया और उसके कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। इसके बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में धरने और प्रदर्शन जारी रहे, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
12 शरणार्थी सीटें क्यों बनीं विवाद का केंद्र?
PoJK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि शेष सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं।
सबसे अधिक विवाद उन 12 सीटों को लेकर है, जो पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
JAAC और अन्य विरोधी समूहों का कहना है कि PoJK से बाहर रहने वाले लोगों को क्षेत्र की सरकार चुनने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
उनका आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं का प्रभाव कम हो जाता है और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को चुनावी लाभ मिलता है।
दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार का कहना है कि ये सीटें संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इनमें किसी भी प्रकार का बदलाव केवल संविधान संशोधन के माध्यम से ही संभव है।
मतदान के दौरान हिंसा और धांधली के आरोप
पहले चरण के मतदान के दौरान कई इलाकों से झड़पों और चुनावी अनियमितताओं की खबरें सामने आईं। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच निष्पक्ष मतदान प्रभावित हुआ।
वहीं कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव भी हुआ।
विपक्षी संगठनों ने फर्जी मतदान, मतदाताओं पर दबाव और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि पाकिस्तान के चुनाव अधिकारियों ने चुनाव को शांतिपूर्ण और नियमों के अनुरूप कराने का दावा किया है।
इन आरोपों की स्वतंत्र जांच या पुष्टि अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा असर
लगातार विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा प्रतिबंधों का असर आम जनजीवन पर भी देखने को मिला। कई क्षेत्रों में सड़कें बंद रहीं, व्यापार प्रभावित हुआ और लोगों की आवाजाही सीमित हो गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ इलाकों में बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित हुईं, जबकि मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए।
सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। इससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और दैनिक जीवन पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।
भारत और पाकिस्तान के अलग-अलग दावे
PoJK की मौजूदा स्थिति को लेकर भारत और पाकिस्तान के रुख अलग-अलग हैं। भारत का कहना है कि क्षेत्र में हो रहे विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों की लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि को दर्शाते हैं।
भारत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग पर भी चिंता जताई है।
वहीं पाकिस्तान का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कराए जा रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर रही हैं।
दोनों देशों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।

