इजरायल ने पाकिस्तान को लगाई फटकार: पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को कम करने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान खुद को एक
संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करता रहा है, लेकिन इजरायल ने एक बार फिर इस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई है।
भारत में इजरायल के राजदूत Reuven Azar ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी भी सफल मध्यस्थता के लिए भरोसा सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है और पाकिस्तान इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
राजदूत अजार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी संघर्ष को सुलझाने के लिए ऐसे पक्ष की आवश्यकता होती है, जिस पर सभी संबंधित देशों को विश्वास हो।
उनके अनुसार पाकिस्तान के पास न केवल प्रभावी मध्यस्थता की क्षमता का अभाव है, बल्कि उसकी विश्वसनीयता भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
उन्होंने इस्लामाबाद को ऐसा देश बताया जो क्षेत्रीय स्थिरता के बजाय कई बार समस्याओं को बढ़ाने वाला कारक रहा है।
आतंकवाद और कट्टरपंथ पर उठाए सवाल
इजरायली राजदूत ने पाकिस्तान के अतीत और उसकी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश पर लंबे समय से आतंकवादी संगठनों और कट्टरपंथी तत्वों के प्रति नरम रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैं।
उनका कहना था कि यदि ऐसे तत्वों के प्रति सहानुभूति रखने वाले देशों को मध्यस्थ की भूमिका दी जाए तो शांति प्रक्रिया की सफलता संदिग्ध हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना चाहिए कि किसी भी मध्यस्थ की विश्वसनीयता उसके रिकॉर्ड और व्यवहार से तय होती है।
अजार के अनुसार पाकिस्तान की छवि ऐसी नहीं है कि उसे क्षेत्रीय संघर्षों में निष्पक्ष मध्यस्थ माना जा सके।
अमेरिका को भी दी चेतावनी
अजार ने अमेरिका को भी अप्रत्यक्ष रूप से सावधान रहने की सलाह दी। उनका कहना था कि वाशिंगटन को पाकिस्तान के दावों और उसकी कूटनीतिक पहल का मूल्यांकन बहुत सावधानी से करना चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि केवल दावे करने भर से कोई देश भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं बन जाता।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान समय-समय पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संवाद स्थापित कराने की इच्छा व्यक्त करता रहा है।
हालांकि इजरायल लगातार इस भूमिका को लेकर संदेह जताता रहा है।
ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों पर भी दिया जवाब
इजरायली राजदूत ने उन अटकलों को भी खारिज कर दिया जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच मतभेदों की बात कही जा रही थी।
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच संबंध मजबूत हैं और रणनीतिक सहयोग पहले की तरह जारी है।
अजार ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर मित्र देशों के बीच मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन इन्हें टकराव के रूप में पेश करना गलत होगा।
उन्होंने विशेष रूप से लेबनान से जुड़े मुद्दों पर सामने आई बहस की खबरों को “मैत्रीपूर्ण रणनीतिक मतभेद” करार दिया और कहा कि मीडिया में इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
इजरायल की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिमी एशिया में संघर्ष और कूटनीतिक गतिविधियां समानांतर रूप से चल रही हैं।
पाकिस्तान खुद को संवाद और शांति का समर्थक बताता है, जबकि इजरायल उसकी नीतियों और विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है।
इससे साफ है कि क्षेत्रीय राजनीति में केवल सैन्य और कूटनीतिक चुनौतियां ही नहीं, बल्कि भरोसे और विश्वसनीयता की लड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।

