Tuesday, July 28, 2026

Atrial Fibrillation: दिल की इस बीमारी से अनजान हैं करोड़ों भारतीय, समय रहते इलाज जरूरी

Atrial Fibrillation: दिल की धड़कन का अचानक तेज हो जाना, सीने में फड़फड़ाहट महसूस होना या बिना किसी खास वजह के सांस फूलना अक्सर लोग सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं,

लेकिन अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो यह एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation या AFib) का संकेत हो सकता है। यह दिल की धड़कन की लय से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है।

कई लोगों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए बीमारी का पता अक्सर तब चलता है जब स्ट्रोक या दिल से जुड़ी कोई गंभीर समस्या सामने आ जाती है।

भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं मामले

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के अनुमान के अनुसार, भारत में करीब 80 लाख लोग एट्रियल फिब्रिलेशन से प्रभावित हैं।

रिसर्च बताती है कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और अस्वस्थ जीवनशैली इस बीमारी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

आज के समय में तनाव, कम शारीरिक गतिविधि और खराब खानपान भी इसके खतरे को बढ़ा रहे हैं।

क्या होता है एट्रियल फिब्रिलेशन?

रिसर्च के अनुसार, एट्रियल फिब्रिलेशन तब होता है जब दिल के ऊपरी हिस्से यानी एट्रिया में इलेक्ट्रिकल सिग्नल सामान्य तरीके से काम नहीं करते।

इसके कारण दिल नियमित लय में धड़कने के बजाय अनियमित और कई बार बहुत तेज धड़कने लगता है।

जब दिल सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता, तो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और रक्त नहीं पहुंच पाता, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

हर व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में शुरुआत से ही लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि कई मरीजों को लंबे समय तक कोई परेशानी महसूस नहीं होती। इस स्थिति को साइलेंट एट्रियल फिब्रिलेशन कहा जाता है।

इस बीमारी में दिल की धड़कन अचानक तेज या अनियमित महसूस हो सकती है। कई बार ऐसा लगता है जैसे दिल सीने के अंदर तेजी से फड़फड़ा रहा हो।

इसके अलावा सांस फूलना, जल्दी थक जाना, थोड़ा काम करने पर कमजोरी महसूस होना, एक्सरसाइज करने की क्षमता कम होना और पल्स का अनियमित होना भी इसके सामान्य लक्षण हैं।

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि अगर आराम करते समय भी बार-बार दिल की धड़कन तेज महसूस हो या उसकी लय असामान्य लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आजकल कई स्मार्टवॉच अनियमित हार्ट रिदम का संकेत दे सकती हैं, लेकिन बीमारी की पुष्टि के लिए ईसीजी (ECG) और अन्य जरूरी जांच कराना आवश्यक होता है।

क्यों खतरनाक है यह बीमारी?

एट्रियल फिब्रिलेशन का सबसे बड़ा खतरा स्ट्रोक है। जब दिल के ऊपरी चैंबर सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाते, तो उनमें खून जमा होने लगता है।

इससे खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है। अगर यह थक्का खून के साथ दिमाग तक पहुंच जाए, तो वहां रक्त प्रवाह रुक सकता है और इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है।

रिसर्च के मुताबिक, एट्रियल फिब्रिलेशन से पीड़ित लोगों में स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक होता है।

इतना ही नहीं, इस बीमारी के कारण होने वाला स्ट्रोक अधिक गंभीर हो सकता है और मरीज में स्थायी विकलांगता का खतरा भी बढ़ जाता है।

यह समस्या केवल स्ट्रोक तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक दिल की अनियमित धड़कन रहने से उसकी पंपिंग क्षमता भी प्रभावित हो सकती है, जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

इसके कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो सकता है और मरीज को सांस लेने में अधिक परेशानी होने लगती है।

इलाज से कम हो सकता है जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और सही इलाज से एट्रियल फिब्रिलेशन के कारण होने वाले कई स्ट्रोक को रोका जा सकता है।

मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर एंटीकोएगुलेंट (ब्लड थिनर) दवाएं देते हैं, जो खून का थक्का बनने से रोकने में मदद करती हैं।

इसके अलावा दिल की धड़कन की गति और उसकी लय को नियंत्रित करने वाली दवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ मरीजों में कैथेटर एब्लेशन नाम की प्रक्रिया की जाती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है,

जिसमें असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल को रोककर दिल की सामान्य धड़कन बहाल करने की कोशिश की जाती है।

क्या इससे बचाव संभव है?

हालांकि बढ़ती उम्र और आनुवंशिक कारणों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसके लिए ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना जरूरी है। स्वस्थ वजन बनाए रखना,

नियमित व्यायाम करना, धूम्रपान से बचना, शराब का सीमित सेवन करना और पर्याप्त नींद लेना भी दिल की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।

यदि किसी व्यक्ति को स्लीप एपनिया की समस्या है, तो उसकी जांच और इलाज भी समय पर कराना चाहिए।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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