विजय माल्या से जुड़े बैंक लोन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में अपना रुख साफ कर दिया है।
लंबे समय से चल रहे इस मामले को खत्म करने की मांग पर ED ने विरोध जताया है।
माल्या की ओर से दलील दी गई है कि बैंकों का जितना कर्ज था, उससे अधिक रकम की वसूली पहले ही की जा चुकी है।
ऐसे में उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को समाप्त किया जाना चाहिए और उन्हें भारत लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए।
हालांकि ED का कहना है कि केवल रकम की वसूली हो जाने से उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही अपने आप खत्म नहीं हो जाती।
माल्या ने की केस खत्म करने की मांग
दरअसल, विजय माल्या की ओर से अदालत में एक याचिका दायर कर लंबे समय से लंबित मामले को खत्म करने की मांग की गई है।
उनकी दलील है कि बैंकों और संबंधित एजेंसियों की ओर से उनकी संपत्तियों से पर्याप्त रकम वसूल की जा चुकी है।
उनका कहना है कि जब कथित तौर पर बकाया रकम से ज्यादा की वसूली हो गई है, तो अब इस मामले को आगे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए।
माल्या की ओर से यह भी कहा गया है कि मामले के लंबित रहने के कारण उनकी कानूनी स्थिति लगातार बनी हुई है।
इसी आधार पर उन्होंने राहत की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें भारत वापस आने का रास्ता दिया जाना चाहिए।
ED ने क्या कहा?
ED ने माल्या की इस दलील को स्वीकार नहीं किया है। जांच एजेंसी का रुख है कि बैंक का पैसा वापस मिल जाना और आपराधिक मामले का खत्म होना दो अलग-अलग विषय हैं।
किसी आरोपी से संपत्ति की वसूली होने मात्र से कथित अपराध से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।
ED के मुताबिक, मामले में लगाए गए आरोप और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी रह सकती है।
इसलिए सिर्फ इस आधार पर कि बैंकों को रकम वापस मिल गई है, पूरे मामले को समाप्त करने की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
यही वजह है कि माल्या की याचिका के जवाब में ED ने अदालत के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
अब इस मामले में अदालत को यह तय करना होगा कि माल्या की मांग और जांच एजेंसी की दलीलों के बीच कानूनी तौर पर क्या स्थिति बनती है।
2016 में भारत छोड़कर चले गए थे माल्या
विजय माल्या का नाम भारतीय बैंकिंग इतिहास के चर्चित विवादों में लंबे समय से जुड़ा हुआ है।
किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े भारी कर्ज के बाद उन पर बैंकों के पैसे के इस्तेमाल और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगे।
साल 2016 में माल्या भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारतीय एजेंसियों की ओर से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
वह लंबे समय से ब्रिटेन में रह रहे हैं और भारत में चल रहे मामलों के चलते उनकी वापसी का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए गए
साल 2019 में विजय माल्या को भारत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था।
इसके बाद उनकी संपत्तियों को लेकर भी कानूनी कार्रवाई हुई और बैंकों के बकाये की वसूली के लिए उनकी कई संपत्तियों की कुर्की और बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
माल्या लगातार यह दावा करते रहे हैं कि बैंकों का बकाया चुकाने के लिए उनकी संपत्तियों से पर्याप्त रकम हासिल की जा चुकी है।
इसी आधार पर अब उन्होंने लंबे समय से चल रहे मामले को समाप्त करने की मांग उठाई है।
भारत वापसी पर भी टिकी नजर
विजय माल्या से जुड़े इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उनकी भारत वापसी को लेकर है।
एक तरफ माल्या का तर्क है कि जब कर्ज की रकम से अधिक वसूली हो चुकी है तो उन्हें राहत मिलनी चाहिए,
वहीं ED का कहना है कि वित्तीय वसूली को आपराधिक मामले के अंत से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
फिलहाल मामला अदालत के सामने है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
माल्या के लिए यह सिर्फ बकाया रकम का मामला नहीं है, बल्कि भारत लौटने और उनके खिलाफ चल रही लंबी कानूनी लड़ाई के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में अदालत का अगला फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।

