UP ELECTION 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने परिवार की पार्टी में भूमिका को लेकर बड़ा फैसला लिया है ।
पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के बाद अब छोटे भतीजे ईशान आनंद से भी संगठन की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इसके साथ ही मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों—आकाश और ईशान को भविष्य में बसपा में किसी भी छोटे-बड़े पद पर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
दरअसल, 3 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित किया था।
इसके बाद 7 सितंबर को छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का मुख्य सेक्टर कोऑर्डिनेटर बनाया गया।
माना जा रहा था कि आकाश के बाद ईशान को संगठन में आगे बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, महज छह दिन बाद ही ईशान से भी यह जिम्मेदारी वापस ले ली गई।
इसके बाद मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट के जरिए परिवारवाद को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि बसपा के मिशन की सफलता में किसी का रोड़ा बनना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता केवल बहुजन समाज के हित, कल्याण और उसे अपने पैरों पर खड़ा करने की है।
मायावती ने कहा कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की तरह उन्होंने भी अपने सगे भाई-बहनों और उनके परिवार के युवा सदस्यों को पार्टी के काम तक सीमित रखने की कोशिश की है और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक लाभ के पदों से दूर रखा है।
आनंद कुमार को साथ रखने की बताई वजह
UP ELECTION 2027: मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि अविवाहित होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने छोटे भाई को अपने साथ रखना पड़ा।
उन्होंने कहा कि आनंद कुमार उनकी देखभाल करने के साथ-साथ उनकी निगरानी में पार्टी की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
हालांकि, मायावती ने स्पष्ट किया कि अब उनके भाई के परिवार के लोग इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाएं, यह पार्टी और बहुजन मूवमेंट के हित में नहीं होगा।
इसी वजह से उन्होंने घोषणा की कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को भविष्य में बसपा में छोटे या बड़े पद पर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
दीपिका आनंद के लिए खुला रास्ता
मायावती ने हालांकि परिवार की अगली पीढ़ी के लिए पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं किया है।
उन्होंने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई है।
मायावती के मुताबिक, अगर आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी बेटी दीपिका की मदद ले सकते हैं।
उसकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखने के बाद जरूरत के अनुसार उसे जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
अगर दीपिका यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार बसपा की आम सहमति से किसी अन्य दलित मिशनरी कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
यानी मायावती ने संकेत दिया है कि पार्टी की जिम्मेदारी परिवार के किसी सदस्य के बजाय किसी समर्पित कार्यकर्ता को भी दी जा सकती है।
2027 के चुनाव से पहले बड़ा संदेश
मायावती का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
आकाश आनंद को पहले उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था।
हालांकि, बाद में उनके खिलाफ कई बार कार्रवाई हुई और उन्हें जिम्मेदारियों से हटाया गया।
उनकी वापसी भी हुई, लेकिन हाल ही में उन्हें फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
इसी बीच ईशान आनंद को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में परिवार की अगली पीढ़ी को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी।
अब ईशान से भी जिम्मेदारी वापस लेने और दोनों बेटों को भविष्य में राजनीतिक पद नहीं देने के ऐलान से मायावती ने इस चर्चा को नया मोड़ दे दिया है।
मायावती ने यह भी कहा है कि बसपा संगठन में जेन-जी की भागीदारी बढ़ाने की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में युवा और कर्मठ प्रतिभाओं को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने की बात भी उन्होंने कही है।
इसके अलावा मायावती ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित नेताओं की वापसी की संभावनाओं को भी खारिज किया है।
ऐसे में 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का यह फैसला सिर्फ आकाश और ईशान आनंद से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि बसपा के संगठन और भविष्य के नेतृत्व की दिशा को लेकर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है।
UP ELECTION 2027: अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकाश और ईशान के बाद 2027 की चुनावी जंग में बसपा की कमान आखिर किस चेहरे के हाथों में होगी।
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