मारिब
पश्चिमी यमन में बढ़त के बाद मारिब बना नया केंद्र
यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती सैन्य ताकत ने मारिब को संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र बना दिया है। पश्चिमी इलाकों में जमीन गंवाने के बाद सरकारी बल पुराने मोर्चे वापस लेने के बजाय अपने प्रमुख गढ़ों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
सरकारी सेना अल मखा, ताइज के पश्चिमी हिस्सों और बाब अल मंदब के आसपास खोए क्षेत्रों को दोबारा हासिल करने की कोशिश सीमित कर चुकी है। उसका बड़ा हिस्सा मारिब की सुरक्षा में लगा है, जबकि हूती बाहरी इलाकों में दबाव बढ़ा रहे हैं।
मारिब की रक्षा में सरकारी बलों की निर्भरता बड़े पैमाने पर सऊदी अरब के हवाई हमलों पर बनी हुई है। जमीन पर हूतियों की बढ़त और पश्चिमी मोर्चों के दबाव ने सरकार की स्थिति कठिन कर दी है, इसलिए मारिब की सुरक्षा रणनीतिक प्राथमिकता है।
तेल और गैस के कारण मारिब की आर्थिक अहमियत
मारिब केवल सरकार के नियंत्रण वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि यमन की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। यह देश का प्रमुख तेल और गैस क्षेत्र है तथा घरेलू इस्तेमाल के लिए सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार यहीं स्थित है, जिससे इसकी आर्थिक अहमियत बढ़ जाती है।
यदि हूती मारिब पर कब्जा कर लेते हैं तो सरकारी आय के बड़े स्रोतों में से एक पर सीधा असर पड़ेगा। तेल और गैस संसाधनों का नियंत्रण बदलने से सरकार की आर्थिक क्षमता कमजोर हो सकती है और सैन्य तथा प्रशासनिक स्थिति भी प्रभावित होगी।
सना और सऊदी सीमा के बीच महत्वपूर्ण स्थिति
भौगोलिक दृष्टि से भी मारिब बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर है। यह राजधानी सना से लगभग 120 किलोमीटर और सऊदी सीमा से करीब 340 किलोमीटर दूर है। इसके आसपास अल जौफ, हद्रामौत, शब्वा और अल बैदा जैसे अहम इलाके हैं, जो सैन्य दृष्टि से संवेदनशील हैं।
मारिब शहर सऊदी सीमा से लगी अल वादिया बॉर्डर क्रॉसिंग की ओर जाने वाले मुख्य मार्गों में से एक पर स्थित है। यही रास्ता पूर्वी मारिब के तेल क्षेत्रों से जुड़ता है, इसलिए शहर का नियंत्रण सीमा और ऊर्जा संसाधनों को प्रभावित कर सकता है।
मारिब पर कब्जा हूतियों को सऊदी सीमा के करीब पहुंचने तथा उत्तरी यमन में सैन्य प्रभाव मजबूत करने का अवसर देगा। मारिब शहर और आसपास का पूर्वी मध्य भाग सरकारी नियंत्रण में है और इसे उत्तरी यमन में सरकार का आखिरी गढ़ माना जाता है।
20 लाख विस्थापित और बड़े सैन्य ठिकाने
मारिब प्रांत में 20 लाख से अधिक विस्थापित लोग रहते हैं। यहां यमन के बड़े सैन्य अड्डे, तेल और गैस क्षेत्र तथा एक महत्वपूर्ण बिजलीघर मौजूद है। इन संसाधनों और आबादी के कारण शहर का नियंत्रण मानवीय, आर्थिक और सैन्य तीनों स्तरों पर निर्णायक है।
हूतियों ने पहले भी कई बार मारिब पर कब्जा करने का प्रयास किया, लेकिन हमले सफल नहीं हुए। यमनी मीडिया ने बताया कि बड़ी संख्या में लड़ाके और सैन्य उपकरण मारिब प्रांत की ओर भेजे गए हैं, जिससे नए हमले की आशंका बढ़ी है।
मोखा पर कब्जे के बाद बढ़ा नया खतरा
यह सैन्य जमावड़ा ऐसे समय बढ़ा है जब हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर बड़ी बढ़त हासिल की है। लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा और बाब अल मंदब की ओर आगे बढ़ना सरकार के लिए नया सामरिक संकट बन चुका है।
यमनी सेना पहले से मान रही थी कि पश्चिमी तट पर बढ़त के बाद हूतियों का अगला बड़ा लक्ष्य मारिब हो सकता है। इसी आकलन के कारण सरकारी बलों ने शहर और आसपास रक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा संभावित हमले की तैयारी तेज की है।
कई मोर्चों पर एक साथ तेज हुई लड़ाई
हाल के सप्ताहों में यमन की लड़ाई कई मोर्चों पर फैल गई है। पश्चिमी तट, बाब अल मंदब, मोखा और होदेदा के आसपास तीखी झड़पें हुई हैं। सऊदी सीमा से लगे अल जौफ और धालेआ में भी संघर्ष तेज हुआ है और हताहत बढ़े हैं।
पिछले दो सप्ताह के दौरान ताइज, पश्चिमी तट, अल जौफ, मारिब और धालेआ में लड़ाइयों के दौरान सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर है। इसी अवधि में लगभग 880 लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है, जो संघर्ष की तीव्रता दिखाती है।
तटीय इलाकों में बढ़त के बाद हूतियों ने लाहज और मारिब की दिशा में दबाव बढ़ाया है। मारिब के बाहरी क्षेत्रों में झड़पों की खबरें आई हैं। कुछ रिपोर्टों में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा हथियार और दिशा देने के दावे भी किए गए हैं।
मारिब पर कब्जे से हूतियों को मिल सकते हैं कई फायदे
मारिब पर हूतियों का कब्जा होने की स्थिति में उन्हें कई रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं। सबसे पहले सरकारी तेल और गैस संसाधनों तथा आय पर असर पड़ेगा। इसके बाद सऊदी सीमा की दिशा में उनकी स्थिति मजबूत होगी और उत्तरी यमन पर पकड़ बढ़ेगी।
पश्चिमी तट और बाब अल मंदब की ओर हूतियों की बढ़त लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ाने की क्षमता देती है। इससे संघर्ष यमन की आंतरिक सत्ता लड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा तक पहुंचेगा।
मारिब की लड़ाई अब यमन के गृहयुद्ध का सामान्य मोर्चा नहीं रह गई है। शहर के तेल भंडार, गैस संसाधन, सैन्य ठिकाने, विस्थापित आबादी, सऊदी सीमा तक जाने वाले रास्ते और लाल सागर की रणनीतिक स्थिति इसे पूरे क्षेत्र की शक्ति संतुलन से जोड़ते हैं।

