दिल्ली पुलिस ने खोला करोड़ों की ठगी का राज: देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच दिल्ली पुलिस की साइबर पुलिस स्टेशन साउथ-वेस्ट टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
यह गिरोह लोगों को ऑनलाइन स्टॉक मार्केट में निवेश का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। जांच में इस नेटवर्क के तार कंबोडिया से संचालित विदेशी साइबर ऑपरेटरों से जुड़े पाए गए हैं।
पुलिस ने इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बी-टेक, एमबीए और साइबर सिक्योरिटी डिप्लोमा धारक युवक भी शामिल हैं।
आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और कमीशन शेयरिंग से जुड़े अहम सबूत बरामद किए गए हैं।
वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए बनाया जाता था शिकार
पुलिस जांच के अनुसार, ठग सबसे पहले लोगों को वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ते थे। इन ग्रुपों में खुद को स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट बताने वाले एडमिन मौजूद रहते थे, जो निवेशकों को कम समय में भारी मुनाफे का सपना दिखाते थे।
ग्रुप में फर्जी स्क्रीनशॉट, नकली ट्रेडिंग रिपोर्ट और मुनाफे के फोटो साझा किए जाते थे, ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके।
20 मार्च 2026 को साउथ-वेस्ट जिला साइबर थाने में एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने ऐसे ही एक निवेश प्लेटफॉर्म पर भरोसा करके अलग-अलग बैंक खातों में करीब 24 लाख रुपये जमा कर दिए।
शुरुआत में उसे नकली मुनाफा दिखाया गया, लेकिन जब उसने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो उससे टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर और पैसे मांगे जाने लगे।
इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उसने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई।
14 दिनों में 4.5 करोड़ रुपये का लेनदेन
तकनीकी जांच और बैंक खातों की मनी ट्रेल एनालिसिस के दौरान पुलिस को चौंकाने वाले तथ्य मिले। जिन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया गया था, उनसे जुड़े 60 से अधिक साइबर शिकायतें पहले से दर्ज थीं।
पुलिस के मुताबिक इन खातों में केवल 14 दिनों के भीतर करीब 4.5 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम कई राज्यों में खोले गए फर्जी फर्मों और म्यूल अकाउंट्स के जरिए आगे ट्रांसफर की जाती थी, ताकि पैसों के असली स्रोत और नेटवर्क को छिपाया जा सके।
कंबोडिया से ऑपरेट हो रहे थे साइबर नेटवर्क
दिल्ली पुलिस ने खोला करोड़ों की ठगी का राज: दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने जब तकनीकी डेटा और इंटरनेट प्रोटोकॉल की जांच की, तो पता चला कि फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे कई वॉट्सऐप नंबर कंबोडिया से संचालित हो रहे थे।
इतना ही नहीं, जिस फर्जी निवेश वेबसाइट का इस्तेमाल लोगों को फंसाने के लिए किया गया था, उसे अपराध के तुरंत बाद बंद कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है, जो भारत समेत कई देशों में ऑनलाइन निवेश फ्रॉड को अंजाम दे रहा है।
फिलहाल जांच एजेंसियां विदेशी नेटवर्क और उसके फंडिंग चैनल्स की भी पड़ताल कर रही हैं।
चार राज्यों में छापेमारी, 8 आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की।
इस कार्रवाई में मोहाली निवासी हरमनजोत सिंह और कैसर मसूदी, पानीपत निवासी अभिषेक, दिल्ली के जाफराबाद निवासी मोहम्मद जाहिद और आमिर मलिक, जबलपुर निवासी अमरजीत अहिरवार और आलोक शर्मा तथा रीवा निवासी अनंत पांडेय को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि कुछ बैंक खातों को राजस्थान से रिमोट एक्सेस APK एप्लिकेशन के जरिए संचालित किया जा रहा था।
विदेशी साइबर अपराधी इन खातों को दूर बैठकर कंट्रोल करते थे, जिससे असली ऑपरेटरों की पहचान छिपी रहती थी।
पढ़े-लिखे युवाओं की भागीदारी बनी चिंता का विषय
दिल्ली पुलिस ने खोला करोड़ों की ठगी का राज: इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरफ्तार आरोपियों में कई उच्च शिक्षित युवक शामिल हैं।
कुछ आरोपियों के पास साइबर सिक्योरिटी डिप्लोमा, एमबीए और बी-टेक जैसी पेशेवर डिग्रियां हैं। पुलिस का कहना है कि तकनीकी ज्ञान रखने वाले युवाओं का साइबर अपराध की ओर बढ़ता झुकाव समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ साइबर फ्रॉड के तरीके भी हाईटेक होते जा रहे हैं।
ऐसे में लोगों को किसी भी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच करनी चाहिए और केवल अधिकृत वित्तीय संस्थानों पर ही भरोसा करना चाहिए।
फिलहाल दिल्ली पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें: तालिबान-TTP मॉड्यूल पर NIA की बड़ी कार्रवाई, हमराज शेख को 7 साल की सजा

