AI अश्लील वीडियो से मचा हड़कंप: उत्तर प्रदेश के Hardoi में पुलिस ने एक ऐसे हाईटेक अश्लील रैकेट का खुलासा किया है, जिसने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के खतरनाक इस्तेमाल को उजागर कर दिया है।
पुलिस ने प्रयागराज निवासी बीटेक इंजीनियर विकास सिंह को गिरफ्तार किया है, जो टेलीग्राम चैनलों के जरिए अश्लील वीडियो और फोटो बेचकर करोड़ों रुपये कमा रहा था।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने 21 टेलीग्राम चैनल और ग्रुप बना रखे थे, जिनसे करीब सात हजार लोग जुड़े हुए थे।
पुलिस को आरोपी के डिजिटल नेटवर्क से लगभग 10 हजार अश्लील वीडियो और 40 हजार आपत्तिजनक फोटो मिली हैं।
इनमें कई वीडियो और तस्वीरें लोगों के निजी पलों से जुड़ी बताई जा रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी के तीन बैंक खातों में करीब 1.20 करोड़ रुपये जमा मिले हैं।
AI जनरेटेड वीडियो से खुला पूरा मामला
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब हरदोई के एक छात्र ने पुलिस से शिकायत की कि उसका AI तकनीक से तैयार किया गया अश्लील वीडियो टेलीग्राम चैनल पर अपलोड किया गया है।
छात्र ने बताया कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा था, जिससे उसकी सामाजिक छवि प्रभावित हो रही थी।
शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और जांच शुरू की। डिजिटल ट्रैकिंग और बैंक डिटेल्स के आधार पर पुलिस की जांच प्रयागराज तक पहुंची।
पुलिस ने मुखबिर के जरिए आरोपी से ग्राहक बनकर संपर्क किया। आरोपी ने अश्लील वीडियो उपलब्ध कराने के बदले ₹350 मांगे और भुगतान के लिए बैंक अकाउंट साझा किया। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने विकास सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
17 मई की रात प्रयागराज में दबिश
AI अश्लील वीडियो से मचा हड़कंप: पुलिस के अनुसार, आरोपी विकास सिंह प्रयागराज के थाना घूमनगंज क्षेत्र स्थित न्यू मार्केट शिवाला इलाके का निवासी है।
हरदोई पुलिस ने 17 मई की रात प्रयागराज में दबिश देकर उसे हिरासत में लिया और बाद में हरदोई लाया गया।
सीओ अंकित मिश्रा ने बताया कि आरोपी नाबालिग बच्चों तक को पैसे लेकर अश्लील वीडियो और फोटो उपलब्ध कराता था।
इस मामले में साइबर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 तथा IT एक्ट की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया है।
बीटेक इंजीनियर बना साइबर अपराधी
पुलिस जांच में सामने आया कि विकास सिंह ने वर्ष 2019 में United College से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। पढ़ाई के बाद वह ज्यादातर समय लैपटॉप और मोबाइल पर बिताता था।
परिवार को लगता था कि वह कोई ऑनलाइन नौकरी या फ्रीलांस काम कर रहा है, लेकिन वास्तव में वह अश्लील कंटेंट बेचने का नेटवर्क चला रहा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी इंटरनेट पर उपलब्ध तकनीकों, गूगल लेंस और अन्य डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके वीडियो की मूल फाइल और लोकेशन तक पहुंच जाता था।
अगर उसे किसी वीडियो का छोटा क्लिप या स्क्रीनशॉट भी मिल जाता, तो वह उसकी असली फाइल खोजकर डाउनलोड कर लेता और फिर उसे अपने टेलीग्राम चैनलों पर अपलोड कर देता था।
छह साल में खड़ा किया करोड़ों का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, विकास ने वर्ष 2020 में टेलीग्राम चैनल बनाना शुरू किया था। धीरे-धीरे उसने अश्लील कंटेंट बेचने का बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया।
उसने अलग-अलग सब्सक्रिप्शन प्लान बनाए थे, जिनमें ₹350 का मासिक प्लान, ₹450 का तीन महीने वाला प्लान और ₹600 का छह महीने वाला प्लान शामिल था।
इन प्राइवेट चैनलों में जुड़ने के बाद सदस्य हजारों वीडियो और फोटो एक्सेस कर सकते थे। जांच में यह भी सामने आया कि उसके कई सब्सक्राइबर नाबालिग छात्र थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान करने में जुटी हुई है।
साइबर सुरक्षा और AI के दुरुपयोग पर बढ़ी चिंता
AI अश्लील वीडियो से मचा हड़कंप: यह मामला AI तकनीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI जनरेटेड फर्जी वीडियो और निजी डेटा के दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे अपराध न सिर्फ साइबर सुरक्षा के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाज में लोगों की निजता और मानसिक सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध टेलीग्राम चैनल, AI मॉर्फ्ड वीडियो या अश्लील सामग्री की तुरंत साइबर सेल में शिकायत करें, ताकि ऐसे नेटवर्क पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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