Saturday, May 2, 2026

ईसाई मिशनरियों पर कसी नकेल, 10 हजार के लाइसेंस रद्द, धर्मांतरण होगा कठिन

ईसाई संगठनों में हड़कंप

भारत में विदेशी फंडिंग से चलने वाले संगठनों पर निगरानी और कड़ी होती दिख रही है। प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को लेकर ईसाई संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि नए प्रावधान संस्थाओं की संपत्तियों तक सरकारी नियंत्रण का रास्ता खोल सकते हैं।

10 हजार से अधिक ईसाई संगठनों के लाइसेंस जा चुके

भारत में काम कर रहे 10 हजार से अधिक ईसाई संगठनों के एफसीआरए लाइसेंस 2011 के संशोधन के बाद से समाप्त हो चुके हैं। अब प्रस्तावित संशोधन से विदेशी चंदे पर निर्भर संस्थाओं के सामने और कठिन स्थिति पैदा हो सकती है।

नए संशोधन के बाद नामित प्राधिकरण को एफसीआरए नियमों के अंतर्गत किसी स्थापित संगठन की संपत्तियों पर नियंत्रण लेने की व्यापक शक्ति मिल सकती है। इससे उन संस्थाओं पर सीधा असर पड़ सकता है, जिनकी संपत्तियाँ विदेशी और घरेलू दोनों स्रोतों से बने धन से खड़ी हुई हैं।

अल्पसंख्यक संस्थाओं और एनजीओ में चिंता

नागरिक समाज संगठनों और ईसाई समूहों ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधनों पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इन बदलावों का असर अल्पसंख्यक संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों और भारत में आने वाले विदेशी निवेश तक पर पड़ सकता है।

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले संसद में स्थगित किया गया यह विधेयक अब फिर चर्चा में है। इन राज्यों में ईसाई बहुल केरल भी शामिल है, इसलिए इस विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर हलचल देखी जा रही है।

लाइसेंस नवीनीकरण से आगे बढ़ेगा सरकारी अधिकार

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार सरकार केवल मौजूदा लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने तक सीमित नहीं रहेगी। वह उन संपत्तियों पर भी नियंत्रण ले सकेगी, जो विदेशी और घरेलू फंड के मिश्रण से बनाई गई हैं।

गुड शेफर्ड चर्च ऑफ इंडिया के आर्चबिशप और ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोसेफ डी सूजा ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। उनके अनुसार यह प्रावधान स्कूलों, अस्पतालों और सामाजिक सेवा संस्थाओं के संचालन को प्रभावित कर सकता है।

गिरवी और किराये की संपत्तियों पर भी संकट

कई संस्थाओं ने अपने संचालन को बनाए रखने के लिए संपत्तियाँ गिरवी रखी हैं या किराये के परिसरों से काम चला रही हैं। ऐसे में स्वामित्व को लेकर पैदा होने वाली अनिश्चितता उनके पूरे ढाँचे को कमजोर कर सकती है।

विदेशी फंडिंग पर हाल के वर्षों में प्रतिबंध बढ़ने के बाद कई एनजीओ ने आत्मनिर्भर मॉडल बनाने की कोशिश की है। लेकिन प्रस्तावित नया कानून इन प्रयासों को झटका दे सकता है और संस्थाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है।

मूल अधिकारों पर असर का आरोप

ईसाई संगठनों का तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन संपत्ति के अधिकार और अल्पसंख्यक अधिकारों सहित मूल अधिकारों पर असर डाल सकता है। कई एनजीओ खातों के लाइसेंस नवीनीकरण न होने के कारण पहले से ही फ्रीज हैं।

इन फ्रीज खातों में करोड़ों रुपये अटके हुए हैं। संगठनों को आशंका है कि नए प्रावधानों के बाद सरकार को इन फंडों और संस्थागत संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार मिल सकता है।

विदेशी दानदाताओं की कानूनी चुनौती की आशंका

विदेशी दानदाताओं ने कई ईसाई चैरिटी संस्थाओं को विशेष उद्देश्यों के लिए धन दिया था। यदि इन फंडों या उनसे बनी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण आता है, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी उपाय तलाश सकते हैं।

इस स्थिति से कूटनीतिक तनाव की आशंका भी जताई जा रही है। ईसाई परिषद ने तेलंगाना सरकार से स्कूलों और अस्पतालों के लिए वैकल्पिक फंडिंग मॉडल तलाशने की अपील की है।

ओडिशा मॉडल का दिया गया उदाहरण

ईसाई संगठनों ने ओडिशा का उदाहरण सामने रखा है। जब मदर टेरेसा से जुड़े संगठनों का लाइसेंस थोड़े समय के लिए प्रभावित हुआ था, तब तत्कालीन भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रहे नवीन पटनायक प्रशासन ने हस्तक्षेप किया था।

इसी आधार पर मांग उठ रही है कि राज्यों को उन संस्थाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में काम कर रही हैं और जिनकी विदेशी फंडिंग अब बाधित हो सकती है।

12 मई को ईसाई परिषद की बैठक

इन घटनाक्रमों को देखते हुए ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल ने 12 मई को एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्र के स्थगित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 और उसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

बैठक में इस प्रस्तावित कदम के विरोध की कार्ययोजना भी बनाई जाएगी। इसके साथ ही इस मुद्दे पर सामूहिक रणनीति तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक गठबंधन बनाने के प्रयास भी चल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट निर्णय और चर्च रजिस्ट्रेशन पर भी चर्चा

12 मई की बैठक में दलित ईसाइयों के एससी दर्जे से जुड़े हालिया सुप्रीम कोर्ट निर्णय पर भी चर्चा होगी। इसके साथ आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा चर्चों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के कदम को भी बैठक के एजेंडे में रखा गया है।

यह बैठक हैदराबाद के पास कोमपल्ली क्षेत्र में सुचित्रा जंक्शन स्थित गुड शेफर्ड सेंटर में आयोजित होगी। एफसीआरए संशोधन को लेकर ईसाई संगठनों की यह बैठक आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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