ब्रिटेन
ब्रिटेन के कैंब्रिजशायर स्थित नए शहर नॉर्थस्टो में आस्था और सामुदायिक उपयोग के लिए निर्धारित भूमि को लेकर हिंदू संगठन और ईसाई मुस्लिम समूह के बीच प्रतिस्पर्धा सामने आई है। यह भूमि स्थानीय धार्मिक और सामुदायिक ढाँचे के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नॉर्थस्टो में रहने वाले भारतीय मूल के लगभग 150 हिंदू परिवारों को जब पता चला कि इस भूमि के लिए बोली लगाई जा सकती है, तो उनमें उत्साह पैदा हुआ। क्षेत्र में 40 मील के दायरे में कोई हिंदू मंदिर नहीं है।
कैंब्रिज और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय मूल के हजारों हिंदू रहते हैं। इनमें तकनीक, विज्ञान, अस्पताल और विश्वविद्यालयों से जुड़े पेशेवर भी शामिल हैं। मंदिर न होने के कारण इनके पास पूजा, संस्कार और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं है।
मंदिर न होने से हिंदू परिवारों में चिंता
हिंदू समाज नॉर्थस्टो की प्रोजेक्ट लीड अपर्णा निगम सक्सेना ने बताया कि नॉर्थस्टो आने के बाद उन्हें यह जानकर झटका लगा कि पूरे कैंब्रिजशायर में कोई हिंदू मंदिर नहीं है। हिंदू परिवार पहले त्योहारों पर एक दूसरे के बगीचों में मिलकर आयोजन करते थे।
अब हिंदू परिवार पूजा और त्योहारों के लिए किराए की जगह लेते हैं, लेकिन कई स्थान हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति नहीं देते। इससे समुदाय को अपनी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में कठिनाई हो रही है।
अपर्णा निगम सक्सेना ने कहा कि नई पीढ़ियाँ ऐसी स्थिति में बड़ी हो रही हैं जहाँ पूजा स्थल और अपनी संस्कृति से जुड़ने की उचित व्यवस्था नहीं है। कई बुजुर्गों की इच्छा है कि जीवन समाप्त होने से पहले क्षेत्र में एक मंदिर अवश्य बने।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्कूलों के बच्चों को भी मंदिर देखने और समझने का अवसर मिलना चाहिए। स्कूल चर्चों और मस्जिदों में जाते हैं, लेकिन मंदिर देखने का अवसर नहीं मिलता। इस कारण हिंदू परंपरा का प्रत्यक्ष परिचय अधूरा रह जाता है।
झील के पास स्थित भूमि पर 999 साल की लीज
विवादित भूमि 0.25 हेक्टेयर की है और एक झील के पास स्थित है। यह भूमि डेवलपर के स्वामित्व में है, जिसे परिषद को दिया जाएगा। इसके बाद परिषद इसे किसी एक आस्था या सामुदायिक समूह को 999 साल की लीज पर देगी।
लीज पेपरकॉर्न रेंट पर दी जाएगी। इसका अर्थ है कि किराया नाममात्र, अत्यंत कम या लगभग शून्य मूल्य का होगा। इसी कारण यह भूमि किसी भी धार्मिक और सामुदायिक संस्था के लिए दीर्घकालिक आधार पर अत्यंत महत्वपूर्ण संपत्ति मानी जा रही है।
इस भूमि के लिए दो प्रस्ताव मिले हैं। पहला प्रस्ताव हिंदू समाज नॉर्थस्टो की ओर से दिया गया है। दूसरा प्रस्ताव नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क ने नॉर्थस्टो मुस्लिम्स के साथ मिलकर प्रस्तुत किया है, जिसमें मुस्लिम समूह को प्रस्तावित एंकर टेनेंट बताया गया है।
चर्च और मुस्लिम समूह का प्रस्ताव
नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क के प्रस्ताव में एक चर्च, मुस्लिम जुमे की नमाज के लिए उपयोग होने वाला हॉल, इस्लामी कक्षाओं और दैनिक नमाज के लिए इस्लामिक प्रेयर रूम, कैफे, सामुदायिक स्थान और गार्डन बनाने की योजना रखी गई है।
यह प्रस्ताव ईसाई और मुस्लिम समुदायों की संयुक्त धार्मिक और सामुदायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें पूजा, शिक्षा, सामुदायिक मेलजोल और सार्वजनिक उपयोग के स्थानों को एक साथ रखने की योजना शामिल है।
हिंदू समाज नॉर्थस्टो ने अलग मॉडल प्रस्तुत किया है। उसके अनुसार कुल स्थान का 79 प्रतिशत हिस्सा इंटरफेथ, कम्युनिटी और वेलबीइंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें किचन, कैफे, स्टेम, कोडिंग और योग कक्षाओं जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी।
हिंदू संगठन का इंटरफेथ और मंदिर मॉडल
हिंदू समाज नॉर्थस्टो के प्रस्ताव में दो प्रार्थना कक्ष भी होंगे, जिन्हें सभी धर्मों के लोग उपयोग कर सकेंगे। अपर्णा निगम सक्सेना ने स्पष्ट किया कि इन दोनों कमरों में हिंदू देवताओं की मूर्तियाँ या चित्र नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था इसलिए रखी गई है क्योंकि कुछ धर्मों में प्रतिमा या आइकनोग्राफी की अनुमति नहीं होती। इस कारण साझा प्रार्थना कक्षों को सभी समुदायों के उपयोग योग्य और संवेदनशील स्वरूप में तैयार करने की योजना है।
प्रस्ताव के अनुसार केवल 21 प्रतिशत स्थान पर हिंदू मंदिर का निर्माण किया जाएगा। शेष बड़ा भाग सामुदायिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, वेलबीइंग और अंतरधार्मिक उपयोग के लिए रखा जाएगा, ताकि यह केंद्र केवल हिंदू समुदाय तक सीमित न रहे।
अपर्णा निगम सक्सेना ने कहा कि आसपास के क्षेत्र में पहले से कई चर्च और मस्जिदें मौजूद हैं। ऐसे में हिंदू समुदाय के लिए मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र की आवश्यकता अधिक गंभीर है, क्योंकि उनके पास निकट क्षेत्र में कोई स्थायी धार्मिक स्थान नहीं है।
जून में परिषद करेगी निर्णय
साउथ कैंब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल की कैबिनेट जून में यह निर्णय करेगी कि भूमि किस संगठन को दी जाए। इस निर्णय में हाल ही में समाप्त हुई सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
हालाँकि अपर्णा निगम सक्सेना परिषद अधिकारियों द्वारा तैयार आकलन सारांश से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उसमें हिंदू समाज नॉर्थस्टो के प्रस्ताव को ठीक से प्रतिबिंबित नहीं किया गया और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उचित महत्व नहीं मिला।
परिषद अधिकारियों ने हिंदू समाज नॉर्थस्टो की इस आधार पर आलोचना की कि वह अपना वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड स्थापित नहीं कर पाया। अपर्णा निगम सक्सेना का कहना है कि उनके जैसे नए संगठन के लिए ऐसा ट्रैक रिकॉर्ड दिखाना स्वाभाविक रूप से असंभव है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि हिंदू समाज नॉर्थस्टो ने व्यापक समुदाय से पर्याप्त जुड़ाव के प्रमाण नहीं दिए। संगठन इस आकलन से असहमत है और मानता है कि उसके प्रस्ताव में व्यापक सामुदायिक उपयोग की स्पष्ट और विस्तृत योजना मौजूद है।
भविष्य की भूमि के बावजूद इसी जगह पर जोर
भविष्य में तीन और भूखंड बोली के लिए उपलब्ध होंगे, लेकिन हिंदू समाज नॉर्थस्टो इसी भूमि को प्राथमिकता दे रहा है। संगठन का कहना है कि यह भूखंड उनके लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह झील के ठीक पास स्थित है।
अपर्णा निगम सक्सेना ने कहा कि झील के पास होना हिंदू दृष्टि से शुभ माना जाता है। उनके अनुसार यह भूमि केवल निर्माण का अवसर नहीं है, बल्कि समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पीछे वास्तविक तात्कालिकता है। स्थानीय हिंदू परिवारों के पास निकट संबंधी नहीं हैं, इसलिए जन्मदिन, वर्षगाँठ और जीवन के छोटे बड़े अवसरों पर पूजा स्थल जाना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
चर्च नेटवर्क ने हिंदुओं के लिए उपयोग की बात कही
नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क की पायनियर मिनिस्टर रेवरेन्ड बेथ कोप ने कहा कि अगर उनके प्रस्ताव को भूमि मिलती है, तो हिंदुओं को उसके बहुउद्देशीय स्थानों का उपयोग करने की अनुमति होगी। इसमें पूजा सहित अन्य गतिविधियाँ भी शामिल हो सकती हैं।
बेथ कोप ने कहा कि दोनों संगठन परिषद की निविदा प्रक्रिया का उत्तर देने की स्थिति में हैं, यह अपने आप में सकारात्मक बात है। उनके अनुसार यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार हैं।
अब अंतिम निर्णय साउथ कैंब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल की कैबिनेट के हाथ में है। नॉर्थस्टो के हिंदू परिवारों के लिए यह निर्णय केवल भूमि आवंटन नहीं, बल्कि अपनी आस्था, संस्कृति, पीढ़ियों और पहचान से जुड़ा निर्णायक प्रश्न बन गया है।

