पीलीभीत में 8 करोड़ का घोटाला: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सरकारी कार्यप्रणाली और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक मामूली चपरासी ने अपनी रसूख और शातिर दिमाग के दम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये पार कर दिए।
यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि यह एक चपरासी की रंगीनमिजाजी और उसके द्वारा बनाए गए मकड़जाल की भी दास्तां है।
चपरासी से मास्टरमाइंड बनने का सफर
मूल रूप से जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज, बीसलपुर में तैनात चपरासी इल्हाम उर्रहमान शम्सी ने करीब आठ साल पहले जुगाड़ के जरिए खुद को DIOS कार्यालय में अटैच करवा लिया था।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने के बावजूद, इल्हाम ने कार्यालय के बाबू और ट्रेजरी के काम में इतनी महारत हासिल कर ली कि वह वेतन बिल और टोकन जनरेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्य देखने लगा।
इसी पैठ का फायदा उठाकर उसने फर्जी बेनेफिशियरी आईडी (Beneficiary ID) बनाईं और सरकारी धन को अपनी पत्नियों और रिश्तेदारों के खातों में भेजना शुरू कर दिया।
ऐसे खुला 8 करोड़ के घोटाले का राज
इस महाघोटाले का पर्दाफाश फरवरी 2026 में हुआ, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के एक मैनेजर को एक निजी खाते में बड़ी रकम के ट्रांसफर पर संदेह हुआ।
बैंक मैनेजर ने जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जानकारी दी कि ट्रेजरी से एक व्यक्तिगत खाते में 1.15 करोड़ रुपये भेजे गए हैं।
डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने जब फाइलों को खंगाला, तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जो मामला शुरुआत में 1 करोड़ का लग रहा था, वह जांच आगे बढ़ने पर 8.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
रिश्तों का जाल और खातों का खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि इल्हाम ने गबन की गई भारी-भरकम राशि को किसी एक जगह रखने के बजाय अपने रिश्तेदारों के 53 अलग-अलग बैंक खातों में फैला दिया था। इसमें उसकी तीन पत्नियां, साली, सास और प्रेमिकाएं शामिल थीं।
लुबना (दूसरी पत्नी): 2.37 करोड़ रुपये
आजरा खान (तीसरी पत्नी): 2.12 करोड़ रुपये
फातिमा (साली): 1.03 करोड़ रुपये
वहीं, आफिया (80 लाख), नाहिद (95 लाख) और परवीन (48 लाख) के खातों में भी बड़ी रकमें भेजी गईं।
हैरानी की बात यह है कि इल्हाम की पत्नियां अलग-अलग शहरों में रहती थीं और उन्हें एक-दूसरे के बारे में भनक तक नहीं थी।
पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
पीलीभीत में 8 करोड़ का घोटाला: इस पूरे मामले ने DIOS कार्यालय और ट्रेजरी (कोषागार) विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
सवाल यह उठता है कि क्या एक चपरासी बिना किसी उच्चाधिकारी की मिलीभगत के करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर सकता है?
यह पैसा DIOS और ट्रेजरी अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signatures) के माध्यम से जारी किया गया था।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या अधिकारियों ने लापरवाही की या वे भी इस बंदरबांट का हिस्सा थे।
7 महिलाएं जेल, मुख्य आरोपी को जमानत
हालिया कार्रवाई में पुलिस ने इल्हाम की 7 महिला रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
एएसपी विक्रम दहिया के अनुसार, पुलिस ने अब तक विभिन्न संदिग्ध खातों में मौजूद करीब 5.50 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं।
हालांकि, विभाग की कार्यशैली पर सवाल तब उठे जब पता चला कि मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी ने इलाहाबाद (प्रयागराज) से जमानत ले ली है, जबकि उसकी पत्नियां और रिश्तेदार जेल में हैं।
अय्याशी और रियल एस्टेट का साम्राज्य
जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की गई रकम का इस्तेमाल केवल महंगे शौक पूरे करने के लिए ही नहीं, बल्कि निवेश के लिए भी किया गया था।
इल्हाम ने अपनी प्रेमिकाओं और पत्नियों के नाम पर कई शहरों में महंगे फ्लैट और बेशकीमती जमीनें खरीदी थीं।
सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच उसने 98 बार ट्रांजेक्शन कर सरकारी खजाने को चूना लगाया, जिससे उसने अपना एक छोटा सा ऐश-ओ-आराम का साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
एक सिस्टम फेलियर की कहानी
पीलीभीत में 8 करोड़ का घोटाला: पीलीभीत का यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को चुनौती दे रहा है।
हालांकि पुलिस का दावा है कि जांच जारी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन जनता में इस बात को लेकर नाराजगी है कि अब तक उन सफेदपोश अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी है, जिनकी नाक के नीचे यह सब हुआ।
यह घोटाला सिस्टम में मौजूद उन छेदों को भरने की चेतावनी है, जिनका फायदा इल्हाम जैसे शातिर अपराधी उठाते हैं।
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