पुणे में मानवता शर्मसार: पुणे जिले के भोर तालुका स्थित नसरापुर गांव से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के मानस पटल को झकझोर कर रख दिया है।
एक 65 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी पोती की उम्र की मासूम बच्ची के साथ न केवल हैवानियत की, बल्कि साक्ष्य मिटाने के लिए उसकी नृशंस हत्या कर दी। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छुट्टियों की खुशियां मातम में बदलीं
मृतक मासूम बच्ची अपनी गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए अपनी नानी के घर नसरापुर आई थी।
शुक्रवार, 1 मई 2026 की दोपहर वह घर के बाहर खेल रही थी, तभी गांव के ही भीमराव कांबले नामक व्यक्ति की कुदृष्टि उस पर पड़ी।
आरोपी ने मासूम को खाने की चीज का लालच दिया और उसे फुसलाकर पास ही स्थित पशुओं के बाड़े (तबेले) में ले गया।
मासूम को भनक भी नहीं थी कि जिस व्यक्ति को वह दादा समान समझ रही थी, वह असल में एक भेष बदला हुआ राक्षस है।
दरिंदगी और साक्ष्य मिटाने की क्रूर कोशिश
तबेले के भीतर आरोपी ने 4 साल की बच्ची के साथ बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
जब उसे लगा कि बच्ची उसके अपराध की गवाह बन सकती है, तो उसने अत्यंत क्रूरता का परिचय देते हुए पास पड़े एक भारी पत्थर से बच्ची के सिर पर कई वार किए।
चोट इतनी गहरी थी कि बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। आरोपी की हैवानियत यहीं नहीं रुकी, उसने पहचान छुपाने और पुलिस से बचने के लिए मासूम के शव को गाय के गोबर के ढेर के नीचे दबा दिया और वहां से फरार हो गया।
CCTV फुटेज से हुआ पाप का खुलासा
पुणे में मानवता शर्मसार: दोपहर करीब 3 बजे जब बच्ची घर के आंगन में नहीं दिखी, तो परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। ग्रामीणों और परिवार ने घंटों तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
अंततः, पड़ोस में लगे एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में आरोपी भीमराव कांबले बच्ची का हाथ पकड़कर उसे तबेले की ओर ले जाता हुआ स्पष्ट दिखाई दिया।
इस सुराग के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया, जिसकी निशानदेही पर तबेले से बच्ची का लहूलुहान शव बरामद हुआ।
आरोपी का खौफनाक इतिहास
पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, वे और भी चौंकाने वाले हैं। आरोपी भीमराव कांबले कोई साधारण अपराधी नहीं बल्कि एक सीरियल रेपिस्ट निकला।
ग्रामीणों के अनुसार, वह पहले भी दो बार जेल जा चुका है। उस पर अपनी सगी भतीजी और एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ भी बलात्कार करने का मामला दर्ज है।
समाज के बीच रह रहा यह आदतन अपराधी लंबे समय से मासूमों और लाचारों को अपना शिकार बना रहा था, जो कानून व्यवस्था की खामियों को भी उजागर करता है।
जन-आक्रोश और न्याय की मांग
शव मिलते ही नसरापुर गांव में तनाव फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने मुंबई-बेंगलुरु हाईवे को जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
ग्रामीणों की मांग थी कि आरोपी को तुरंत उनके हवाले किया जाए या उसे तत्काल फांसी की सजा दी जाए। विरोध स्वरूप शनिवार को नसरापुर व्यापारी संघ ने पूर्णतः बंद का आह्वान किया, जिसमें सभी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रहे।
पुणे रूरल एसपी संदीप सिंह गिल और स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
प्रशासन और राजनीतिज्ञों की प्रतिक्रिया
पुणे में मानवता शर्मसार: इस घटना पर राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने एसपी से बात कर 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाने की मांग की है।
वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखेगी और सुनिश्चित करेगी कि अपराधी को जल्द से जल्द फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाए।
वर्तमान में फॉरेंसिक टीम ने मौके से पत्थर और खून के धब्बे जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा लिए हैं ताकि कोर्ट में मामला पुख्ता रहे।
यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि ऐसे सीरियल अपराधियों की निगरानी और त्वरित न्याय प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है ताकि फिर किसी मासूम की छुट्टियां मौत के मातम में न बदलें।
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