Monday, August 10, 2026

जनगणना 2027: जनगणना और ‘ओपन कॉलम’ का दांव, क्या 2011 की 46 लाख जातियों वाली उलझन फिर दोहराई जाएगी?

जनगणना 2027: भारत की आगामी जनगणना 2027 में जब जनसंख्या की गिनती शुरू होगी, तब इसके साथ ही एक बड़ा और रणनीतिक फैसला भी अमल में लाया जाएगा।

इस बार जातिगत आंकड़े जुटाने के लिए ‘ओपन कॉलम’ का सहारा लिया जा रहा है।

इसका सीधा मतलब यह है कि किसी नागरिक से जब उसकी जाति पूछी जाएगी, तो उसे चुनने के लिए कोई ड्रॉप-डाउन मेनू या पूर्वनिर्धारित जातियों की लिस्ट नहीं दी जाएगी।

नागरिक जो भी नाम, उपनाम या जाति बताएंगे, प्रगणक उसे बिना किसी बदलाव या वर्गीकरण के हुबहू दर्ज कर लेंगे।

क्या है ‘ओपन कॉलम’ का प्रारूप और कैसे करेगा काम?

जनगणना 2027: ‘ओपन कॉलम’ व्यवस्था का मूल उद्देश्य डेटा संग्रह की प्रक्रिया में किसी भी तरह के सरकारी हस्तक्षेप या पूर्वाग्रह को पूरी तरह समाप्त करना है।

इस व्यवस्था के तहत उत्तरदाता को अपनी जातिगत पहचान खुद तय करने की पूरी आजादी होगी।

गणना करने वाले कर्मचारियों से यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वे किसी उपनाम या उप-जाति को किसी प्रमुख जाति श्रेणी में जबरन शामिल करें या उनका वर्गीकरण करें।

गृह मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि प्रगणकों के पास किसी के द्वारा बताई गई जाति को मौके पर सत्यापित करने की कोई कानूनी या व्यावहारिक व्यवस्था नहीं होती, इसलिए जो भी जानकारी दी जाएगी, उसे वैसा ही दर्ज कर लिया जाएगा।

2011 का सबक: जब सामने आ गए थे 46.7 लाख जातियों के नाम

‘ओपन कॉलम’ की यह व्यवस्था पूरी तरह से नई नहीं है। इससे पहले 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना में भी इसी तरीके को आजमाया गया था, लेकिन इसके नतीजे प्रशासनिक स्तर पर बेहद उलझाने वाले रहे थे।

वर्ष 1931 की अंतिम व्यापक जाति जनगणना में जहां कुल 4,147 जातियों के नाम दर्ज हुए थे, वहीं 2011 में स्पेलिंग की गलतियों, क्षेत्रीय बोलियों, उप-जातियों और गोत्रों को अलग-अलग दर्ज करने के कारण यह संख्या उछलकर 46.7 लाख के पार पहुंच गई थी।

एकत्र किए गए आंकड़ों में इतना भारी बिखराव था कि इसे किसी मानक जाति रजिस्ट्री में फिट करना असंभव हो गया, जिसके चलते अंततः केंद्र सरकार को इस जातिगत डेटा को सार्वजनिक करने का फैसला टालना पड़ा था।

राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक चुनौतियाँ

जनगणना 2027: गृह मंत्रालय और भारत के महा रजिस्ट्रार के अधिकारियों का मानना है कि जाति जनगणना से जटिल और त्रुटिपूर्ण डेटा आने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

इस संबंध में एक केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सरकार ने हमेशा माना है कि इसमें शामिल जटिलताओं के कारण ऐसा डेटा सामने आ सकता है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक कारणों से इसकी मांग करता रहा है।

सरकार का तर्क है कि जब विपक्ष की मांग पर इसे स्वीकार कर लिया गया है, तो इसके बाद सामने आने वाले अंतिम डेटा और उससे जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों से निपटना भी उसी बहस का हिस्सा होगा।

क्या निष्पक्षता की कीमत बनेगा अस्पष्ट डेटा?

जनगणना 2027: प्रशासनिक दृष्टिकोण से सरकार का मानना है कि राज्यों या अधिकारियों को किसी नागरिक की जातिगत पहचान का निर्णायक नहीं बनना चाहिए।

‘ओपन कॉलम’ प्रणाली निष्पक्षता और तटस्थता के लिहाज से तो सही प्रतीत होती है, लेकिन 2011 के कड़वे अनुभवों को देखते हुए यह सवाल अब भी कायम है।

क्या 2027 में जुटाया गया यह जातिगत डेटा व्यावहारिक रूप से नीति-निर्माण के लिए उपयोगी सिद्ध हो पाएगा, या फिर यह एक बार फिर लाखों नई उप-जातियों और तकनीकी उलझनों के भंवर में फंसकर रह जाएगा, यह देखना बाकी है।

ये भी पढ़ें: बारिश में क्यों स्लो पड़ जाता है इंटरनेट? जानिए Wi-Fi से लेकर मोबाइल डेटा पर कितना पड़ता है असर


WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article