JPSC-JSSC विवाद: झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में धांधली के आरोपों को लेकर छात्रों और राज्य सरकार के बीच तनातनी चरम पर पहुँच गई है।
रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच चली पाँच घंटे लंबी मैराथन बैठक के बाद भी पूर्ण सहमति नहीं बन सकी।
सरकार द्वारा कई प्रमुख माँगों को स्वीकार किए जाने के बावजूद, छात्र प्रतिनिधिमंडल JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की माँग पर अड़ा हुआ है।
इसके परिणामस्वरूप, छात्रों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सोमवार को शांतिपूर्ण तरीके से झारखंड विधानसभा के घेराव का ऐलान किया है।
मैराथन वार्ता: कहाँ बनी बात, कहाँ अटका पेंच?
JPSC-JSSC विवाद: तीसरे दौर की इस उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ छात्र नेताओं की विस्तृत चर्चा हुई। छात्र प्रतिनिधि कुणाल ने बताया कि लगभग 50 प्रतिशत से अधिक मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन मुख्य माँगों पर गतिरोध कायम है।
सरकार और छात्रों के बीच बनी सहमति के प्रमुख बिंदु:
- 14वीं JPSC और बैकलॉग रद्द: 14वीं JPSC PT (रेगुलर एवं बैकलॉग 2023 व 25) तथा ACF परीक्षा को रद्द करने पर सरकार सहमत हो गई है।
- जांच के घेरे में अन्य परीक्षाएं: FRO परीक्षा और TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच होगी। गड़बड़ी साबित होने पर इन्हें रद्द किया जाएगा।
- संस्थागत सुधार: JPSC और JSSC में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय रिफॉर्म कमेटी गठित की जाएगी।
- त्वरित न्याय व्यवस्था: मामलों के निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन होगा और 90 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
CGL परीक्षा और CBI जांच पर क्यों फंसा पेच?
JPSC-JSSC विवाद: छात्र प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि परीक्षा धांधली में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, इसलिए इसकी जांच केवल CBI से ही कराई जानी चाहिए। साथ ही वे JSSC-CGL परीक्षा को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने की माँग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा:
“सरकार ने लगभग 98 प्रतिशत बिंदुओं पर छात्रों की माँग स्वीकार कर ली है। आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी और किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन या घोटाले के सबूत मिलने पर मामला ED को सौंपा जाएगा। जहाँ तक CGL परीक्षा का सवाल है, यह परीक्षा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित की गई थी। परिणाम घोषित हो चुके हैं और अभ्यर्थी नियुक्त हो चुके हैं, ऐसे में सरकार के पास इसे एकतरफा रद्द करने का कानूनी अधिकार नहीं है।”
सरकार ने CGL परीक्षा की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव भी दिया था, जिसे छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सिरे से खारिज कर दिया।
आज विधानसभा घेराव का ऐलान
JPSC-JSSC विवाद: बातचीत में पूर्ण सहमति न बनने के कारण छात्र प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन स्थगित नहीं होगा।
छात्र सोमवार को अपने तय कार्यक्रम के अनुसार रांची में विधानसभा का घेराव करेंगे।
छात्र नेताओं ने आश्वासन दिया है कि यह घेराव पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा, हालांकि वे अपनी मांगों से कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

