असम में बाढ़ का कहर: असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात गंभीर बने हुए हैं। कई जिलों में घर, खेत और सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
प्रशासन, सेना और आपदा राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
25 जिले बाढ़ की चपेट में
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य के 25 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इस प्राकृतिक आपदा का असर 7.27 लाख से अधिक लोगों पर पड़ा है।
बाढ़ के कारण अब तक 41 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राज्यभर के 939 से अधिक गांव पूरी तरह या आंशिक रूप से जलमग्न हैं।
हजारों घरों में पानी घुस चुका है, जिससे लोगों को राहत शिविरों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है।
राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन जल राहत’ के तहत बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है।
सेना, असम राइफल्स, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की संयुक्त टीमें नावों, लाइफ जैकेट और आधुनिक बचाव उपकरणों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं।
22 जुलाई की शाम तक लगभग 990 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। कई ऐसे गांव हैं जहां सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
इन इलाकों में राहत सामग्री, खाद्यान्न, दवाइयां और पेयजल केवल नावों के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना को भी हवाई राहत अभियान के लिए तैयार रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए राहत और बचाव कार्यों को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां, चिकित्सा सुविधा, शौचालय और बच्चों एवं महिलाओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
साथ ही अधिकारियों को प्रभावित इलाकों का लगातार दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन जिलों में सबसे ज्यादा असर
बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव धुबरी, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, कामरूप, कोकराझार, नलबाड़ी और होजाई जिलों में देखा जा रहा है।
इन क्षेत्रों में सैकड़ों गांव पानी में डूब गए हैं। कई जगहों पर सड़कें बह गई हैं, पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं और रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
ग्रामीण इलाकों में किसानों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से धान और अन्य फसलों को गंभीर क्षति पहुंची है।
पशुपालकों के सामने भी पशुओं के चारे और सुरक्षित ठिकाने की समस्या खड़ी हो गई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
बाढ़ का असर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई स्कूलों को राहत शिविरों में बदल दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, जलभराव और गंदे पानी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों की तैनाती बढ़ा दी है और लोगों से साफ पानी पीने तथा सावधानी बरतने की अपील की है।
मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने असम के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है।
लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ऐसे में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।
मौसम विभाग ने लोगों को नदी किनारे जाने से बचने, प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन कई दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

