एयर टर्बुलेंस: 4 अगस्त को भारतीय विमानन के इतिहास में एक और चिंताजनक घटना दर्ज हुई, जब एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI2379 अचानक हवा में तेज टर्बुलेंस का शिकार हो गई।
उड़ान के दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे गिरा, जिससे 13 यात्रियों और 4 क्रू मेंबर्स समेत कुल 17 लोग घायल हो गए। कई यात्रियों के सिर पर चोटें आईं और विमान के केबिन की छत को भी नुकसान पहुंचा।
\इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर टर्बुलेंस क्या होता है, यह क्यों आता है और क्या इससे विमान को कोई बड़ा खतरा होता है।
टर्बुलेंस क्या होता है?
टर्बुलेंस हवा में बनने वाली अस्थिरता या अशांति है, जो विमान को अचानक झटके महसूस कराती है।
सामान्य तौर पर विमान शांत और संतुलित हवा में उड़ता है, लेकिन जब हवा की गति या दिशा अचानक बदलती है, तो विमान ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिलने लगता है।
इसे ही टर्बुलेंस कहा जाता है। इसे सड़क पर गाड़ी चलाते समय उबड़-खाबड़ रास्ते पर लगने वाले झटकों से समझा जा सकता है।
टर्बुलेंस कितने प्रकार का होता है?
टर्बुलेंस कई परिस्थितियों में पैदा हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटते हैं। पहला कन्वेक्टिव टर्बुलेंस है, जो तेज बारिश, आंधी और तूफानी बादलों के कारण बनता है।
ऐसे मौसम में हवा तेजी से ऊपर और नीचे बहती है, जिससे विमान को जोरदार झटके लग सकते हैं। मानसून के दौरान इस तरह का टर्बुलेंस अधिक देखने को मिलता है।
दूसरा माउंटेन-वेव टर्बुलेंस होता है। जब तेज हवाएं पहाड़ों से टकराती हैं तो वे लहरों की तरह ऊपर-नीचे उठती हैं।
यदि विमान इन वायु-लहरों से होकर गुजरता है तो उसे अचानक झटके महसूस हो सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों के ऊपर उड़ानों में इसका खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
सबसे गंभीर और चुनौतीपूर्ण क्लियर-एयर टर्बुलेंस माना जाता है। यह साफ आसमान में बिना किसी बादल के उत्पन्न होता है और इसे न आंखों से देखा जा सकता है और न ही सामान्य रडार आसानी से पहचान पाते हैं।
यह ऊंचाई पर बहने वाली तेज जेट स्ट्रीम के कारण बनता है। यही वजह है कि कई बार बिल्कुल साफ मौसम में भी विमान अचानक तेज झटके खाने लगता है।
किन परिस्थितियों में टर्बुलेंस की संभावना ज्यादा रहती है?
टर्बुलेंस किसी भी मौसम में हो सकता है, लेकिन गर्मियों और मानसून के दौरान इसकी आशंका अधिक रहती है। इस समय गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है और बादलों के निर्माण के साथ वातावरण अस्थिर हो जाता है।
इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों, समुद्र के ऊपर, विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी के आसपास और जेट स्ट्रीम वाले इलाकों में भी टर्बुलेंस की संभावना बढ़ जाती है। तूफानी बादलों के आसपास से गुजरते समय भी विमान को तेज झटके लग सकते हैं।
क्या टर्बुलेंस से विमान गिर सकता है?
आधुनिक यात्री विमान बेहद मजबूत संरचना के साथ बनाए जाते हैं और उन्हें गंभीर टर्बुलेंस को भी सहने के लिए डिजाइन किया जाता है।
अधिकांश मामलों में टर्बुलेंस विमान के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए ज्यादा खतरनाक होता है।
यदि सीटबेल्ट नहीं लगी हो तो अचानक लगने वाले झटकों से यात्री अपनी सीट से उछल सकते हैं और गंभीर चोट लग सकती है।
इसलिए उड़ान के दौरान सीटबेल्ट बांधे रखना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
टर्बुलेंस के दौरान यात्रियों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सीटबेल्ट का संकेत बंद होने के बाद भी सीटबेल्ट हल्के से बांधे रखें, क्योंकि क्लियर-एयर टर्बुलेंस बिना किसी चेतावनी के आ सकता है।
जैसे ही विमान में झटके शुरू हों, तुरंत अपनी सीट पर बैठ जाएं और केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें। ओवरहेड बिन खोलने से बचें क्योंकि उसमें रखा सामान गिरकर चोट पहुंचा सकता है।
बच्चों की सीटबेल्ट भी अच्छी तरह बांधी होनी चाहिए और घबराने की बजाय शांत रहना सबसे जरूरी होता है।
ग्लोबल वार्मिंग से क्यों बढ़ रहा है खतरा?
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऊंचाई पर बहने वाली जेट स्ट्रीम की गति और अस्थिरता बढ़ रही है। इसका सीधा असर क्लियर-एयर टर्बुलेंस की घटनाओं पर पड़ रहा है।
यही कारण है कि हाल के वर्षों में दुनिया भर में टर्बुलेंस की घटनाओं और उनसे जुड़ी चोटों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भविष्य में भी इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आधुनिक इतिहास का सबसे गंभीर टर्बुलेंस हादसा
24 मई 2024 को सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट SQ321 लंदन से सिंगापुर जा रही थी, जब म्यांमार के ऊपर उसे बेहद गंभीर क्लियर-एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा।
कुछ ही सेकंड में विमान कई बार तेजी से ऊपर-नीचे हुआ और सीटबेल्ट न लगाए हुए यात्री केबिन की छत से जा टकराए।
इस दुर्घटना में दर्जनों लोग घायल हुए और एक यात्री की मौत हो गई। इस घटना को आधुनिक विमानन इतिहास के सबसे गंभीर टर्बुलेंस हादसों में गिना जाता है।
इसके बाद दुनियाभर की एयरलाइंस ने यात्रियों को हर समय सीटबेल्ट लगाए रखने की सलाह पर और अधिक जोर देना शुरू किया।

