AI का बढ़ता इस्तेमाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली तकनीकों में शामिल है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, आईटी, मीडिया और मैन्युफैक्चरिंग जैसे लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
AI ने कई कामों को पहले से ज्यादा तेज और आसान बना दिया है। हालांकि, इस तकनीक के बढ़ते उपयोग से जहां नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं,
वहीं कई पारंपरिक नौकरियों पर भी खतरा मंडराने लगा है। भारत भी इस बदलाव से अछूता नहीं है।
AI से बदल रहा है काम करने का तरीका
जनरेटिव AI ऐसी तकनीक है जो इंसानों की तरह लिख सकती है, सवालों के जवाब दे सकती है, रिपोर्ट तैयार कर सकती है और कई तरह के सुझाव भी दे सकती है।
यही वजह है कि ऑफिस से जुड़े कई काम अब पहले की तुलना में कम समय में पूरे हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI कई क्षेत्रों में कर्मचारियों का सहायक बनेगा, लेकिन कुछ जगहों पर यह मानव श्रम की जरूरत भी कम कर सकता है।
भारत में कितनी नौकरियां होंगी प्रभावित?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लगभग 42 से 48 प्रतिशत काम ऐसे हैं जिन्हें AI से फायदा मिलेगा। यानी कर्मचारियों का काम आसान होगा और उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।
दूसरी ओर, करीब 8 से 12 प्रतिशत नौकरियां ऐसी हैं जिन पर AI का सीधा असर पड़ सकता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के 9 से 17 प्रतिशत गैर-कृषि कार्य AI से प्रभावित हो सकते हैं।
यह इस बात पर निर्भर करेगा कि AI भविष्य में कितने जटिल काम कितनी तेजी और सटीकता से कर पाएगा।
कर्मचारियों के लिए क्या होगा फायदा?
हर जगह AI नौकरी खत्म नहीं करेगा। कई क्षेत्रों में यह कर्मचारियों का सहयोगी बनकर काम करेगा।
दोहराए जाने वाले और समय लेने वाले काम AI कर देगा, जिससे कर्मचारियों को नई स्किल सीखने और काम पर ध्यान देने का समय मिलेगा।
इससे काम की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों बढ़ सकती हैं।
किन नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर?
AI का सबसे ज्यादा असर उन नौकरियों पर पड़ सकता है, जहां मुख्य रूप से कंप्यूटर पर बैठकर डेटा, रिपोर्ट, लेखन, विश्लेषण या दस्तावेज तैयार करने जैसे काम किए जाते हैं।
वहीं जिन क्षेत्रों में शारीरिक श्रम, मशीन संचालन, निर्माण कार्य, खेती या फील्ड वर्क की जरूरत होती है, वहां AI का प्रभाव फिलहाल काफी सीमित रहने की संभावना है।
अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का अनुमान है कि AI के कारण भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर में हर साल लगभग 0.8 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
यदि किसी क्षेत्र की विकास दर 10 प्रतिशत है, तो AI के बेहतर उपयोग से यह आने वाले वर्षों में लगभग 10.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
हालांकि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि उद्योग और संस्थान AI को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से अपनाते हैं।
टेक सेक्टर में बढ़ेंगे रोजगार
AI के बढ़ते इस्तेमाल से आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए अवसर भी बन रहे हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में करीब 10 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में देश की बड़ी आईटी कंपनियों में हजारों पद कम भी हुए हैं।
इसका मतलब यह है कि पारंपरिक भूमिकाएं घट रही हैं, जबकि AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी जैसी नई स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।
GCC सेक्टर बना नई उम्मीद
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का विस्तार तेजी से हो रहा है। पिछले 15 वर्षों में इन केंद्रों की संख्या कई गुना बढ़ी है। इसके साथ ही कर्मचारियों की संख्या और आय में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आज दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भारत में अपने रिसर्च, टेक्नोलॉजी और बिजनेस ऑपरेशन सेंटर स्थापित कर रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।
सर्विस सेक्टर को मिल रहा फायदा
भारत का सर्विस सेक्टर भी AI से मजबूत हो रहा है। सॉफ्टवेयर और बिजनेस सर्विसेज का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी भी पहले से अधिक हो गई है।
AI की मदद से कंपनियां बेहतर और तेज सेवाएं दे पा रही हैं, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा मजबूत हो रही है।
डेटा सेंटर की कमी बनी चुनौती
AI को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए बड़े और आधुनिक डेटा सेंटर की जरूरत होती है। इस मामले में भारत अभी दुनिया के कई देशों से पीछे है।
वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी केवल करीब 1 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में काफी आगे हैं।
भारत में डेटा सेंटर की सीमित क्षमता AI के तेज विस्तार में एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

