Abhijit Dipke News: राजनीतिक गलियारों में जब किसी चेहरा अपनी प्रासंगिकता खोने लगता है, तो अक्सर ध्यान खींचने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जाते हैं।
तथाकथित ‘क्रांतिकारी’ और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का हालिया रुख कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा है।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेढ़ महीने चले बहुचर्चित प्रदर्शन के बाद, अब 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के मौके पर दीपके को देश के ग्रामीण स्कूलों और बच्चों की याद आई है।
अभिजीत दीपके ने 10 अगस्त 2026 को एक वीडियो जारी कर घोषणा की कि वे 15 अगस्त से देश भर के सरकारी स्कूलों में ‘सोशल ऑडिट’ का अभियान शुरू करेंगे।
पहली नजर में यह कदम किसी सामाजिक सुधार या छात्र-कल्याण की पहल जैसा लग सकता है।
लेकिन गहराई से विश्लेषण करें तो यह महज गिरती साख को बचाने और पब्लिसिटी हासिल करने की एक रणनीति नजर आती है।
जंतर-मंतर पर आक्रामकता, लेकिन झारखंड के छात्रों पर चुप्पी क्यों?
Abhijit Dipke News: कुछ ही समय पहले जंतर-मंतर पर छात्रों के नाम पर एक लंबा प्रदर्शन आयोजित किया गया था।
यद्यपि इसका मुख्य विषय नीट (NEET) छात्र थे, लेकिन मंच पर प्रमुख विपक्षी नेताओं और वामपंथी चेहरों की आवाजाही लगातार बनी रही।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या वह मंच वास्तव में आम छात्रों के मुद्दों के लिए था या केंद्र सरकार को घेरने और राजनीतिक माहौल तैयार करने के लिए?
असली अभ्यर्थियों को इस प्रदर्शन से क्या हासिल हुआ, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन इस दौरान अभिजीत दीपके को खूब मीडिया माइलेज मिला।
इसके बाद जब 25 जुलाई से झारखंड में पेपर लीक के खिलाफ स्थानीय युवाओं ने बड़ा आंदोलन शुरू किया, तो उन्हें उम्मीद थी कि सीजेपी (CJP) उनके समर्थन में भी आगे आएगी। परंतु, परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत रहा।
‘टायफाइड’ का बहाना और दोहरे रवैये पर उठे सवाल
झारखंड के आंदोलित छात्र लंबे समय तक सवाल पूछते रहे कि दीपके और उनकी टीम उनके साथ जमीन पर कब खड़ी होगी।
इसके जवाब में दीपके की ओर से लगातार बीमारियों और टायफाइड के बहाने सामने आते रहे।
सोशल मीडिया पर जब आलोचना बढ़ी, तब एक वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग जारी कर सिर्फ मौखिक सांत्वना दी गई।
इस रवैये ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- चुनिंदा विरोध: जंतर-मंतर पर खुलकर आक्रामक रुख अपनाने वाले दीपके झारखंड के मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम क्यों रख रहे थे?
- राजनीतिक सहूलियत: क्या विपक्षी गठबंधन की राज्य सरकारों या वामपंथी इकोसिस्टम के समीकरणों को देखते हुए झारखंड के छात्रों से दूरी बनाई गई?
इन घटनाओं ने स्पष्ट संकेत दिया कि प्राथमिकता छात्र हित से ज्यादा राजनीतिक सहूलियत हो सकती है।
15 अगस्त का ‘सोशल ऑडिट’: क्रेडिट लेने की नई योजना?
Abhijit Dipke News: झारखंड में उजागर हुए रुख और घटते प्रभाव के बाद अब दीपके ने 15 अगस्त के अवसर को अपनी साख दोहराने के लिए चुना है।
इस योजना के तहत ग्रामीणों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे स्कूलों में जाकर वीडियो बनाएं और CJP के दिए लिंक पर फॉर्म भरें।
इसका व्यावहारिक पहलू यह है कि जमीनी मेहनत ग्रामीण क्षेत्र के लोग करेंगे, जबकि डिजिटल क्रेडिट और सोशल मीडिया रीच CJP के खाते में जाएगी।
जंतर-मंतर की आक्रामकता, झारखंड की चुप्पी और अब 15 अगस्त का यह अभियान—इन तीनों को मिलाकर देखने पर एक पैटर्न साफ दिखाई देता है।
इन्फ्लुएंसर और जननेता का अंतर
Abhijit Dipke News: सोशल मीडिया के दौर में लाखों फॉलोअर्स हासिल करके ‘इन्फ्लुएंसर’ बनना आसान हो सकता है, लेकिन एक सच्चा जननेता बनने के लिए बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के हर छात्र के साथ खड़े होना पड़ता है।
‘स्कूल ऑडिट’ के नाम पर फॉर्म और वीडियो मंगाने का यह तरीका प्रासंगिक बने रहने की एक कोशिश अधिक प्रतीत होता है।
जनता और छात्र अब यह बखूबी समझने लगे हैं कि कौन वास्तव में उनके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ अपने पीआर (PR) के लिए उनके मुद्दों का इस्तेमाल कर रहा है।
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