Tuesday, August 11, 2026

LPG की जगह एथेनॉल से बनेगा खाना? जानिए सरकार की क्या है योजना

LPG की जगह एथेनॉल से बनेगा खाना: देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने को लेकर पिछले कुछ वर्षों में काफी जोर दिया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाकर पेट्रोलियम आयात पर होने वाले खर्च को कम करना और देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना है।

इसी बीच एथेनॉल को लेकर एक और सवाल चर्चा में आने लगा है कि क्या आने वाले समय में इसका इस्तेमाल घरों में खाना पकाने के लिए भी किया जा सकता है?

एथेनॉल से खाना पकाने की तकनीक पूरी तरह नई नहीं है। कुछ जगहों पर एथेनॉल आधारित स्टोव का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है।

हालांकि, भारत में इसे बड़े स्तर पर LPG के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर फिलहाल सरकार की कोई योजना नहीं है।

एथेनॉल क्या है और इसका इस्तेमाल कहां होता है?

एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने और कुछ अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है।

भारत में इसका सबसे प्रमुख इस्तेमाल पेट्रोल के साथ मिलाकर वाहन ईंधन के रूप में किया जा रहा है।

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल की कुल जरूरत में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ती है। इससे देश को पेट्रोल बनाने के लिए जरूरी कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा घरेलू स्तर पर तैयार होने वाला एथेनॉल किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए भी आर्थिक गतिविधियों का जरिया बन सकता है।

क्या एथेनॉल से खाना पकाया जा सकता है?

तकनीकी रूप से एथेनॉल को ईंधन के तौर पर जलाकर खाना पकाना संभव है। इसी वजह से एथेनॉल स्टोव को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।

ऐसे स्टोव में LPG सिलेंडर की जगह तरल एथेनॉल का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाता है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी एथेनॉल से चलने वाले स्टोव का उल्लेख कर चुके हैं।

ऐसे स्टोव को लेकर यह दावा किया जाता रहा है कि इनका इस्तेमाल खाना पकाने के लिए किया जा सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह पारंपरिक ईंधन की तुलना में किफायती विकल्प बन सकता है।

हालांकि, किसी तकनीक का इस्तेमाल छोटे स्तर पर संभव होना और उसे करोड़ों घरों में बड़े पैमाने पर लागू करना दो अलग बातें हैं।

LPG का बड़ा विकल्प बनने में क्या हैं चुनौतियां?

एथेनॉल को देश के घरेलू कुकिंग फ्यूल का प्रमुख विकल्प बनाने के लिए कई पहलुओं पर काम करना होगा।

सबसे पहले बात आती है इसकी कीमत और लगातार उपलब्धता की। किसी भी घरेलू ईंधन के लिए जरूरी है कि वह लोगों को आसानी से और नियमित रूप से उपलब्ध हो।

इसके बाद स्टोरेज और सप्लाई नेटवर्क भी महत्वपूर्ण हैं। LPG के लिए देश में पहले से ही सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूशन और डिलीवरी का बड़ा नेटवर्क मौजूद है।

एथेनॉल के लिए इसी तरह की व्यवस्था तैयार करने में समय और निवेश की जरूरत होगी।

सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। घरों में इस्तेमाल होने वाले किसी भी ईंधन के लिए स्टोव की डिजाइन, ईंधन का भंडारण, आग से सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में बचाव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

सरकार का फिलहाल किस पर फोकस?

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता एथेनॉल को खाना पकाने के ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के बजाय परिवहन क्षेत्र में इसके इस्तेमाल को बढ़ाना है।

पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।

इसका मतलब यह नहीं है कि एथेनॉल से खाना पकाने की तकनीक पर कभी विचार नहीं हो सकता।

अगर भविष्य में इसकी कीमत, उपलब्धता, सुरक्षा और वितरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान हो जाता है, तो इसके इस्तेमाल की संभावनाओं पर आगे चर्चा हो सकती है।

अभी LPG की जगह एथेनॉल नहीं

फिलहाल घरों में खाना पकाने के लिए LPG की जगह एथेनॉल को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की कोई सरकारी योजना नहीं है।

एथेनॉल स्टोव को लेकर चर्चा और प्रयोग जरूर हुए हैं, लेकिन इसे देशभर के घरों के लिए मुख्य कुकिंग फ्यूल बनाने की दिशा में अभी कोई बड़ा सरकारी बदलाव सामने नहीं आया है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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