JPSC-JSSC Exam Scam: झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
इसी बीच CID की पूछताछ में अभय तिवारी के बयानों ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।
परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी इस समय CID की रिमांड में हैं।
पूछताछ के दौरान उन्होंने सितंबर 2024 में आयोजित JSSC-CGL परीक्षा के पेपर लीक से जुड़ा एक बड़ा दावा किया है।
बोकारो में 15 अभ्यर्थियों से पैसे लेने का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि बोकारो में करीब 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लिए गए थे।
उनका आरोप है कि परीक्षा से पहले इन अभ्यर्थियों को करीब 65 सवाल और उनके जवाब याद करवाए गए थे।
हालांकि, इन दावों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CID ने अभी तक अभय तिवारी के बयानों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पूछताछ के दौरान सामने आए दावों में कितनी सच्चाई है और इनके समर्थन में क्या ठोस सबूत मौजूद हैं।
प्रश्न पत्र से जुड़ी एजेंसियां भी जांच के घेरे में
अभय तिवारी के कथित बयान में प्रश्न पत्र की छपाई से जुड़ी एजेंसी का भी जिक्र सामने आया है।
उनके मुताबिक, प्रश्न पत्र छापने वाली एजेंसी ‘वेबेल’ के मालिक मिथिलेश सिंह, जो पटना से बताए जा रहे हैं और उनके सहयोगी राकेश सिंह भी कथित तौर पर वहां मौजूद थे।
CID अब इन दावों की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र या उसके सवालों तक किसी तरह की अनधिकृत पहुंच बनी थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
TDPL के बाद वेबेल को मिला परीक्षा संचालन का काम
जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जाता है कि इससे पहले JSSC की कुछ परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी TDPL को दी जाती थी।
हालांकि, TDPL ने कथित तौर पर कम दर पर परीक्षा संचालन का काम करने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद JSSC की ओर से TDPL को डी-इंपैनल किए जाने की बात सामने आई।
TDPL को हटाए जाने के बाद परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबेल नाम की एजेंसी को दी गई।
यही पूरा घटनाक्रम अब CID की जांच में अहम कड़ी बन गया है।
जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा संचालन में एजेंसियों के बदलाव, प्रश्न पत्र की छपाई और JSSC-CGL में सामने आए कथित पेपर लीक के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं।
सरकारी नौकरी से पहले TDPL में कार्यरत थे अभय तिवारी
अभय तिवारी का TDPL से पुराना संबंध भी जांच के केंद्र में है। सरकारी नौकरी में आने से पहले वह TDPL में काम करते थे और कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर रहे थे।
बाद में उन्होंने सरकारी सेवा ज्वाइन की और गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के तौर पर तैनात हुए।
CID ने 22 जुलाई को अभय तिवारी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से उनसे JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी,
पेपर लीक और अभ्यर्थियों से पैसे लिए जाने के आरोपों को लेकर पूछताछ की जा रही है। फिलहाल वह CID रिमांड पर हैं।
13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का भी आरोप
अभय तिवारी को JPSC से जुड़े कथित घोटाले में प्रमुख आरोपी के तौर पर देखा जा रहा है।
जांच से जुड़े आरोपों में यह भी कहा गया है कि उन्होंने कथित धोखाधड़ी के जरिए करीब 13 वर्षों के दौरान 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं।
बताया गया है कि अभय तिवारी JSSC-CGL परीक्षा में भी सफल हुए थे। उनकी लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता अब जांच एजेंसी के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है।
CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन परीक्षाओं में उनकी सफलता सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थी या किसी तरह की अनियमितता का सहारा लिया गया था।
परिवार के सदस्यों की सरकारी नौकरी भी जांच के दायरे में
मामला केवल अभय तिवारी तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। जांच के दौरान उनके परिवार के कुछ सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
बताया गया है कि उनके भाई अक्षय तिवारी और उनकी पत्नी को भी JSSC-CGL जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी नौकरी मिली।
परिवार के अन्य सदस्यों की नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और परीक्षा प्रक्रिया की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
आरोप यह है कि अभय तिवारी ने तौर पर परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद अनियमितताओं का लाभ अपने परिवार के सदस्यों के लिए भी उठाया और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने में मदद की।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल CID दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड और पूछताछ में सामने आई जानकारी का मिलान कर रही है।
25 से 40 लाख रुपये में गारंटीड सिलेक्शन का आरोप
अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर बड़ी रकम लेने का एक और गंभीर आरोप है।
जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, वह अपनी लगातार परीक्षा सफलताओं का उदाहरण देकर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों का भरोसा हासिल करते थे।
आरोप है कि इसके बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में गारंटीड सिलेक्शन का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 25 लाख रुपये से लेकर 40 लाख रुपये तक की रकम ली जाती थी।
अब CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वास्तव में कितने अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए, रकम का लेनदेन किस माध्यम से हुआ और इस कथित नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
पेपर लीक से लेकर पैसे के लेनदेन तक की जांच
CID की जांच अब कई बिंदुओं पर एक साथ आगे बढ़ रही है। इसमें कथित पेपर लीक, परीक्षा से पहले सवाल-जवाब उपलब्ध कराए जाने,
अभ्यर्थियों से वसूली, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका और सरकारी नौकरी हासिल करने में संभावित अनियमितताओं जैसे पहलू शामिल हैं।
जांच एजेंसी अभय तिवारी से पूछताछ में सामने आए हर दावे को उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से मिलाने का प्रयास कर रही है।
खासतौर पर बोकारो में 15 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये लिए जाने और 65 सवाल-जवाब पहले से बताए जाने के दावे की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल CID ने अभय तिवारी के इन बयानों को आधिकारिक तौर पर सही नहीं माना है। इसलिए सामने आए सभी आरोपों को जांच के दौरान लगाए गए दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का यह मामला अब परीक्षा संचालन से लेकर अभ्यर्थियों तक फैले संभावित नेटवर्क की दिशा में जांच को आगे बढ़ा रहा है।
CID की जांच जारी है और आने वाले समय में पूछताछ तथा दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

