16 मेट्रो स्टेशन बंद: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।
सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर लिया गया यह फैसला 22 जुलाई को भी लागू रहा, जिससे हजारों यात्रियों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों, मुकदमे से जुड़े लोगों और अदालत के कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस फैसले को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से सबसे ज्यादा असर सुप्रीम कोर्ट और आसपास के न्यायिक परिसरों में आने-जाने वाले लोगों पर पड़ा।
इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर की। याचिका में मांग की गई कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए कम से कम वकीलों,
वादियों और अदालत के कर्मचारियों को मेट्रो स्टेशनों के माध्यम से सीमित प्रवेश की अनुमति दी जाए ताकि न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो और जरूरी मामलों की सुनवाई समय पर हो सके।
CJI ने क्या कहा?
याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकीलों की अनुपस्थिति के कारण फिलहाल कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोपहर तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला, तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करने पर विचार करेगा।
CJI की यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके कारण न्यायिक व्यवस्था और आम लोगों की सुविधाओं पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए।
किन स्टेशनों को बंद किया गया?
DMRC ने सुबह करीब 7:30 बजे से राजीव चौक, सुप्रीम कोर्ट, मंडी हाउस, आईटीओ, लोक कल्याण मार्ग, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंबा रोड, सेवा तीर्थ, जनपथ, केंद्रीय सचिवालय, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम
सहित कुल 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद करने की घोषणा की थी। हालांकि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों पर केवल इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई,
ताकि लोग एक लाइन से दूसरी लाइन में सफर कर सकें, लेकिन स्टेशन के अंदर प्रवेश या बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।
प्रशासन का क्या कहना है?
दिल्ली मेट्रो और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में लगातार भीड़ बढ़ रही थी।
किसी भी अप्रिय घटना से बचने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर आसपास के मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला लिया गया।
प्रशासन का मानना है कि यह कदम पूरी तरह सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया है, हालांकि इससे आम यात्रियों को काफी असुविधा हुई।

