राजस्थान के खिलाड़ी मोनू की दर्दनाक मौत: राजस्थान के भिवाड़ी के सैदपुर गांव निवासी 21 वर्षीय स्टेट लेवल वॉलीबॉल खिलाड़ी मोनू की फरीदाबाद में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
परिवार का आरोप है कि मोनू को प्रेम-प्रसंग के चलते लड़की के परिजनों ने अगवा कर तीन दिनों तक बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा।
गंभीर हालत में उसे सड़क किनारे फेंक दिया गया, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और गुस्से का माहौल है।
स्टेट लेवल खिलाड़ी था मोनू
मोनू सिर्फ एक साधारण युवक नहीं था, बल्कि वॉलीबॉल और कबड्डी का उभरता हुआ खिलाड़ी था।
उसने स्टेट लेवल प्रतियोगिताओं में कई मेडल अपने नाम किए थे। हाल ही में उसने 12वीं की परीक्षा 70 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी।
परिवार और गांव के लोगों को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। उसके पिता भीम सिंह ड्राइवर हैं और परिवार की जिम्मेदारी में मोनू सबसे बड़ा बेटा था।
मामा के गांव से शुरू हुई थी दोनों की दोस्ती
बताया जा रहा है कि करीब आठ महीने पहले मोनू की दोस्ती फरीदाबाद की एक नाबालिग लड़की से हुई थी।
लड़की का मामा मोनू के गांव सैदपुर में रहता था, जिसके कारण उसका गांव में आना-जाना लगा रहता था।
इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और रिश्ता प्रेम-प्रसंग में बदल गया। हालांकि रिश्तेदारी में दोनों भाई-बहन लगते थे, इसलिए लड़की के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे।
अप्रैल में दर्ज हुआ था अपहरण का मामला
राजस्थान के खिलाड़ी मोनू की दर्दनाक मौत: इसी साल अप्रैल में लड़की अचानक घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद लड़की के परिवार ने मोनू के खिलाफ तिगांव थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया।
हालांकि दो दिन बाद लड़की दिल्ली के लाल किले के पास मिल गई थी। मोनू के परिजनों का दावा है कि उन्होंने खुद लड़की को ढूंढकर उसके परिवार के हवाले किया था। इसके बावजूद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा।
थाने बुलाने के बहाने रास्ते से किया गया अगवा
मोनू के चाचा नरेंद्र के मुताबिक, 17 मई की सुबह मोनू यह कहकर घर से निकला था कि उसे तिगांव थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। दोपहर तक वह फरीदाबाद पहुंच गया, लेकिन उसके बाद परिवार से उसका संपर्क टूट गया।
परिजनों का आरोप है कि रास्ते में ही लड़की के पिता और रिश्तेदारों ने उसे पकड़ लिया और जबरन खेतों में बने एक मकान में ले गए।
वहां उसे तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि उसे खाना-पानी तक नहीं दिया गया।
अधमरी हालत में सड़क किनारे फेंका गया
परिवार का कहना है कि जब मोनू की हालत बेहद गंभीर हो गई, तो आरोपी उसे सड़क किनारे फेंककर फरार हो गए।
बाद में पुलिस ने परिजनों को सूचना दी कि मोनू घायल अवस्था में मिला है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिवार तुरंत अस्पताल पहुंचा, लेकिन दो दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद शुक्रवार, 22 मई को मोनू ने दम तोड़ दिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोली क्रूरता की परतें
मोनू की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई गंभीर चोटों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके सिर और नाक की हड्डियां टूटी हुई थीं। पसलियां टूटकर फेफड़ों तक पहुंच गई थीं।
शरीर पर गहरे जख्म और अंदरूनी चोटों के निशान मिले हैं। डॉक्टरों ने अत्यधिक मारपीट और अंदरूनी चोटों को मौत की वजह बताया है।
15 लोगों पर केस दर्ज, दो आरोपी हिरासत में
फरीदाबाद पुलिस ने इस मामले में 3 महिलाओं समेत 15 लोगों के खिलाफ हत्या, अपहरण और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।
पुलिस प्रवक्ता यशपाल के अनुसार, अब तक दो आरोपियों को राउंडअप किया गया है और बाकी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
परिवार ने मांगा इंसाफ
राजस्थान के खिलाड़ी मोनू की दर्दनाक मौत: मोनू की मौत से सैदपुर गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों का कहना है कि मोनू पुलिस जांच में सहयोग करने गया था, लेकिन उसे साजिश के तहत मौत के घाट उतार दिया गया।
गांव के लोग भी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।
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