दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर भारी भीड़: दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट इस समय रिकॉर्ड भीड़ और दर्दनाक हादसों की वजह से चर्चा में है।
इस वर्ष नेपाल के रास्ते एवरेस्ट पर चढ़ने वालों की संख्या ने नया इतिहास बना दिया है। एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने शिखर तक पहुँचकर नया कीर्तिमान बनाया,
लेकिन इसी भारी भीड़ के बीच दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑक्सीजन की कमी से दूर
मृतकों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप आरे के रूप में हुई है। दोनों पर्वतारोहियों ने सफलतापूर्वक शिखर तक पहुँचने के बाद नीचे उतरना शुरू किया था, लेकिन रास्ते में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
बताया जा रहा है कि शिखर के पास भारी भीड़ और लंबे इंतजार के कारण उन्हें ऑक्सीजन की भारी कमी का सामना करना पड़ा। अत्यधिक ठंड और थकान ने स्थिति को और अधिक खतरनाक बना दिया।
20 मई को एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा
पर्वतारोहण अभियान चलाने वाली संस्था के अनुसार अरुण कुमार तिवारी की मौत ‘हिलेरी चरण’ के पास हुई। वे नीचे लौट रहे थे तभी उनकी हालत खराब हो गई।
चार शेरपा मार्गदर्शकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ऊँचाई के कारण उनके फेफड़ों में पानी भर गया था।
दूसरे भारतीय पर्वतारोही संदीप आरे ने 20 मई को एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था, लेकिन वापसी के दौरान वे बर्फीले अंधेपन का शिकार हो गए।
उन्हें दिखाई देना बंद हो गया था। पाँच शेरपा मार्गदर्शकों ने उन्हें किसी तरह दूसरे शिविर तक पहुँचाया, लेकिन वहाँ उन्होंने अंतिम साँस ली।
274 लोगों ने एवरेस्ट पर रखा कदम
इस वर्ष एवरेस्ट पर चढ़ने वालों की भारी भीड़ देखी गई है। समाजिक माध्यमों पर पर्वतारोहियों की लंबी कतार की तस्वीरें तेजी से फैल रही हैं।
बताया जा रहा है कि शिखर के रास्ते पर लगभग पाँच किलोमीटर लंबा जाम लग गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार चीन ने तिब्बत की ओर से चढ़ाई की अनुमति नहीं दी, जिसकी वजह से दुनिया भर के पर्वतारोही नेपाल के रास्ते पहुँच गए।
नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार बुधवार सुबह से शुरू हुई चढ़ाई लगभग 11 घंटे तक चलती रही।
इस दौरान 274 लोगों ने एवरेस्ट के शिखर पर कदम रखा। नेपाल के रास्ते एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुँचने का यह नया रिकॉर्ड है।
इससे पहले वर्ष 2019 में 223 लोगों के शिखर तक पहुँचने का कीर्तिमान बना था।
दुनिया का सबसे खतरनाक पहाड़
विशेषज्ञों का कहना है कि एवरेस्ट का ‘मृत्यु क्षेत्र’ दुनिया के सबसे खतरनाक इलाकों में गिना जाता है। यह हिस्सा समुद्र तल से 8 हजार मीटर से अधिक ऊँचा है, जहाँ हवा में ऑक्सीजन बहुत कम होती है।
यहाँ लंबे समय तक रुकना जानलेवा साबित हो सकता है। जब पर्वतारोहियों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है,
तब उनके ऑक्सीजन सिलेंडर तेजी से खाली होने लगते हैं। यही वजह है कि भीड़ बढ़ने पर हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।
इस बीच एवरेस्ट से नेपाल सरकार की कमाई भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। सरकार ने इस वर्ष चढ़ाई की फीस बढ़ाकर 15 हजार डॉलर कर दी थी।
इसके बावजूद पर्वतारोहियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। इस मौसम में नेपाल ने विभिन्न चोटियों के लिए 1181 अनुमति पत्र जारी किए, जिससे सरकार को अरबों रुपये का राजस्व मिला।
हालांकि कुछ अभियान आयोजकों का कहना है कि सही योजना और पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था से भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है,
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एवरेस्ट पर लगातार बढ़ती भीड़ आने वाले समय में और बड़े हादसों का कारण बन सकती है।
ऐसे में सुरक्षा नियमों को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

