UP AI City and Digital Transformation Plan: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य को तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढांचे (Digital Infrastructure) और कृषि के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बनाने की बड़ी तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने कई गेम-चेंजर परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई।
इस महा-प्लान के जरिए सरकार का लक्ष्य अगले 50 सालों के लिए राज्य की आर्थिक नींव को मजबूत करना और करीब 1.5 लाख युवाओं को रोजगार के नए अवसर देना है।
इस योजना के तहत जहाँ एक तरफ लखनऊ को देश की अग्रणी ‘एआई सिटी’ (AI City) के रूप में चमकाया जाएगा, वहीं बुंदेलखंड को एआई कंप्यूट का मुख्य केंद्र (Power House) बनाया जाएगा।
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 1.5 लाख नौकरियाँ
UP AI City and Digital Transformation Plan: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को साल 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर (5 ट्रिलियन डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनाने का एक बड़ा विजन सामने रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘यूपी डेटा सेंटर क्लस्टर’ (UPDCC) परियोजना की शुरुआत की जा रही है।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन का आधार बनेगी।
अधिकारियों के अनुसार, साल 2040 तक राज्य में 5 गीगावाट का एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
इस पहल से न केवल वैश्विक टेक कंपनियाँ उत्तर प्रदेश की तरफ आकर्षित होंगी, बल्कि राज्य के लगभग 1.5 लाख से अधिक युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार के मौके मिलेंगे।
बुंदेलखंड में AI सेंटर और लखनऊ बनेगी देश की पहली ‘AI City’
UP AI City and Digital Transformation Plan: इस महा-प्लान की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ दिल्ली-NCR (नोएडा या ग्रेटर नोएडा) तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसका विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में किया जाएगा।
बुंदेलखंड बनेगा मुख्य केंद्र: बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में जमीन उपलब्ध है।
इसलिए मुख्यमंत्री ने इस मेगा प्रोजेक्ट को बुंदेलखंड से ही शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके जरिए यूपी को भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाया जाएगा।
लखनऊ का ‘एआई सिटी’ के रूप में विकास: राजधानी लखनऊ को देश की सबसे आधुनिक ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
इसके लिए टाटा समूह (Tata Group) जैसी देश की दिग्गज टेक कंपनियों से बातचीत का रास्ता साफ हो चुका है, जिससे राज्य में भारी विदेशी निवेश आने की उम्मीद है।
इंटरनेट की सुपरफास्ट रफ्तार और कनेक्टिविटी का फायदा
उत्तर प्रदेश भौगोलिक और तकनीकी रूप से एशिया का सबसे सुरक्षित और कनेक्टेड इनलैंड एआई क्षेत्र बनने की क्षमता रखता है।
देश के लगभग सभी मुख्य फाइबर नेटवर्क उत्तर प्रदेश से होकर गुजरते हैं।
कम लेटेंसी (Latency) का फायदा: राज्य के भीतर इंटरनेट का रिस्पॉन्स टाइम (डेटा ट्रांसफर स्पीड) 5 मिलीसेकेंड से भी कम है।
यहाँ तक कि मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय डिजिटल केंद्रों तक भी यह कनेक्टिविटी महज 5 से 12 मिलीसेकेंड के बीच रहती है।
चक्रवातों और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित भौगोलिक स्थिति और कम लागत के कारण यह क्षेत्र क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी के लिए सबसे आदर्श हब बनकर उभरेगा।
‘प्रोजेक्ट गंगा’ से गाँवों में आएगी इंटरनेट क्रांति
ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए सरकार ‘प्रोजेक्ट गंगा’ (गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट) लेकर आई है।
इसके तहत ग्रामीण उत्तर प्रदेश में एक बड़ी डिजिटल क्रांति की शुरुआत होगी।
20 ग्रामीण घरों को फायदा: इस योजना के तहत राज्य के 20 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ा जाएगा।
डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (DSP): गाँवों के 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर बनाया जाएगा।
इन युवाओं को अपना काम शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-Free Loan) और विशेष प्रोत्साहन (Incentives) दिया जाएगा।
महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता: प्रोजेक्ट गंगा में महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी और इसमें 50 प्रतिशत महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन इलाज, ई-गवर्नेंस और डिजिटल शिक्षा की पहुँच घर-घर तक होगी।
गेहूँ प्रोसेसिंग से बढ़ेगा किसानों का मुनाफा और राज्य का राजस्व
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है।
अनुमानों के मुताबिक, साल 2025-26 में राज्य में 372 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे राज्य के लगभग 2.88 करोड़ किसान सीधे जुड़े हैं।
वर्तमान में बहुत सा गेहूँ बिना प्रोसेसिंग के ही कच्चे रूप में दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता है।
इसे रोकने के लिए सरकार ने इन-हाउस प्रोसेसिंग (Value Addition) को बढ़ावा देने का फैसला किया है।
किसानों और व्यापारियों को राहत देने के लिए राज्य में रजिस्टर्ड मिलों द्वारा प्रोसेसिंग के लिए खरीदे गए गेहूँ पर मंडी शुल्क और विकास सेस (मंडी उपकर) में बड़ी छूट देने की रणनीति बनाई गई है।
इस कदम से कच्चे अनाज के रूप में दूसरे राज्यों में जाने वाला राजस्व और रोजगार अब उत्तर प्रदेश के भीतर ही सुरक्षित रहेगा, जिससे स्थानीय खाद्य उद्योगों को नई संजीवनी मिलेगी।
इसके साथ ही, बदलते मौसम और अल नीनो के खतरे को देखते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को सचेत किया है।
सरकार अब अनाज के मजबूत भंडारण और पुख्ता खाद्य सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है ताकि आने वाले सालों में फसलों पर पड़ने वाले किसी भी संभावित असर से निपटा जा सके।
इसके लिए मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त बनाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
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