700 साल बाद भोजशाला में हिंदुओं का प्रवेश: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया।
हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब शुक्रवार को परिसर में नमाज नहीं हुई और हिंदू श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की अनुमति मिली।
करीब 721 साल बाद हुए इस घटनाक्रम ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया। सुबह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे,
जहां मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा और भव्य आरती की गई। पूरे परिसर में शंखनाद, वैदिक मंत्रों और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई दी।
हटाया गया पुराना प्रतिबंध वाला बोर्ड
भोजशाला परिसर में वर्षों से लगा वह बोर्ड भी हटा दिया गया, जिस पर लिखा था कि शुक्रवार को हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।
इस बदलाव को हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक क्षण बताया। सुबह श्रद्धालु चुनरी, फूल और पूजा सामग्री लेकर परिसर पहुंचे।
गर्भगृह को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया था। मां वाग्देवी की प्रतिमा के सामने विशेष अनुष्ठान किए गए और दोपहर में महाआरती का आयोजन रखा गया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली व्यवस्था
दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को दिए गए फैसले में भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर माना था।
अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की, जिसके तहत शुक्रवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी गई।
फैसले के बाद पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है।
मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां सदियों से जुमे की नमाज अदा की जाती रही है और परंपरा टूटने से मुस्लिम समाज में नाराजगी है।
मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट से फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं, हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर दी है ताकि उनका पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश न दिया जाए। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है।
धार शहर बना सुरक्षा छावनी
संवेदनशील स्थिति को देखते हुए धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है।
भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
करीब 2200 पुलिसकर्मी, CRPF की कंपनियां और विशेष सशस्त्र बल तैनात किए गए हैं। ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और बाइक पेट्रोलिंग टीमों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
धारा 144 लागू, सोशल मीडिया पर भी नजर
शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है और किसी भी तरह के जुलूस या प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी शुरू की है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी भड़काऊ संदेश से दूर रहने की अपील की है।
अस्पताल और मेडिकल टीमें अलर्ट पर
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिला अस्पताल में अतिरिक्त बेड रिजर्व किए गए हैं।
भोजशाला परिसर के बाहर एंबुलेंस और मेडिकल टीम तैनात की गई है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई जा रही हैं।

