इस देश में मंदिर बनाना है मना: हिंद महासागर में स्थित मालदीव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सफेद रेतीले समुद्र तटों और शानदार रिसॉर्ट्स के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।
हर साल लाखों पर्यटक यहां छुट्टियां मनाने पहुंचते हैं। भारत के भी बड़ी संख्या में लोग मालदीव घूमने जाते हैं।
हालांकि, पर्यटन के लिए लोकप्रिय होने के बावजूद मालदीव अपने सख्त धार्मिक कानूनों के कारण भी चर्चा में रहता है।
इस देश में धर्म से जुड़े ऐसे नियम लागू हैं, जिनका पालन स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों और वहां काम करने वाले लोगों को भी करना पड़ता है।
जानें कौन से धर्म को मानते है यहां के लोग
मालदीव के संविधान के अनुसार इस्लाम देश का आधिकारिक या राजकीय धर्म है। संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक जीवन में इस्लामी सिद्धांतों का पालन किया जाएगा।
इसी कारण दूसरे धर्मों के सार्वजनिक प्रचार-प्रसार, धार्मिक आयोजनों और खुले तौर पर पूजा-पाठ करने पर प्रतिबंध है।
यह नियम देश के नागरिकों के अलावा वहां रहने वाले विदेशी नागरिकों और पर्यटकों पर भी लागू होते हैं।
मंदिर और चर्च बनाने की अनुमति नहीं
मालदीव में हिंदू मंदिर, चर्च या अन्य गैर-इस्लामी पूजा स्थलों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती।
सार्वजनिक स्थानों पर किसी अन्य धर्म से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना या धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करना भी कानून के दायरे में आता है।
सरकार का उद्देश्य देश की धार्मिक व्यवस्था और संवैधानिक प्रावधानों को बनाए रखना है।
पर्यटकों को भी करना पड़ता है नियमों का पालन
मालदीव आने वाले पर्यटकों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्थानीय कानूनों और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करें।
आमतौर पर पर्यटक बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा का आनंद लेते हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों या दूसरे धर्म के प्रचार से बचना आवश्यक होता है।
स्थानीय नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मामले की गंभीरता के अनुसार जुर्माना, हिरासत या जेल जैसी सजा भी दी जा सकती है।
निजी तौर पर पूजा की मिलती है छूट
मालदीव में हजारों विदेशी नागरिक काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या भारत, श्रीलंका और अन्य देशों से आए लोगों की है, जो स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, निर्माण, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
इन लोगों को आमतौर पर अपने घर या निजी आवास में व्यक्तिगत रूप से अपने धर्म का पालन करने की अनुमति होती है।
हालांकि, यह धार्मिक गतिविधि पूरी तरह निजी होनी चाहिए और इसमें सार्वजनिक सभा, जुलूस या धार्मिक समारोह शामिल नहीं होने चाहिए।
नागरिकता के लिए इस्लाम अपनाना अनिवार्य
मालदीव के संविधान में नागरिकता को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान हैं। देश का नागरिक बनने के लिए व्यक्ति का मुसलमान होना आवश्यक है।
यानी केवल इस्लाम का पालन करने वाले लोग ही मालदीव की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
यही कारण है कि मालदीव की धार्मिक व्यवस्था दुनिया के सबसे सख्त संवैधानिक ढांचों में गिनी जाती है।
भारतीयों के लिए क्या है स्थिति?
भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर मालदीव में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
वे स्थानीय कानूनों का पालन करते हुए अपने निजी जीवन में धार्मिक आस्था का पालन कर सकते हैं,
लेकिन सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखना जरूरी होता है। यही नियम अन्य विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होते हैं।
यात्रा से पहले रखें इन बातों का ध्यान
यदि आप मालदीव घूमने या काम के सिलसिले में जाने की योजना बना रहे हैं, तो वहां के स्थानीय कानूनों और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी पहले से लेना बेहतर होता है।
धार्मिक मामलों से जुड़े नियमों का सम्मान करना हर आगंतुक की जिम्मेदारी है।
इससे न केवल आपकी यात्रा सुरक्षित और सुखद रहती है, बल्कि किसी भी प्रकार की कानूनी परेशानी से भी बचा जा सकता है।
मालदीव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अपनी विशिष्ट संवैधानिक और धार्मिक व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है।
इसलिए वहां जाने वाले हर व्यक्ति के लिए यह जरूरी है कि वह स्थानीय कानूनों का पालन करे और देश की परंपराओं का सम्मान करते हुए अपनी यात्रा या कार्यकाल को सफल बनाए।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कानूनी एवं संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, समुदाय या देश की धार्मिक मान्यताओं का समर्थन, विरोध या आलोचना करना नहीं है। विभिन्न देशों के कानून समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए किसी भी आधिकारिक या कानूनी जानकारी के लिए संबंधित सरकारी स्रोतों या आधिकारिक वेबसाइट का संदर्भ अवश्य लें।

