Sunday, April 26, 2026

PM मोदी ने खेले टॉप गेमर्स के साथ वीडियो गेम, गेमिंग कानून होगा लागू

मोदी और गेमिंग: नीति से खेल के मैदान तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है जिसमें वे देश के बड़े गेमिंग क्रिएटर्स के साथ बेहद सहज अंदाज में न केवल बात करते बल्कि खेलते भी नजर आ रहे हैं। यह मुलाकात स्क्रिप्टेड नहीं बल्कि सहज और वास्तविक रही।

किन गेमर्स से मिले प्रधानमंत्री

नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में नमन माथुर उर्फ मॉर्टल, मिथिलेश पटनकर, पायल ढारे, अनिमेश अग्रवाल, अंशु बिश्त, लोकेश गोल्डी जैन और पार्थ चड्ढा जैसे शीर्ष गेमिंग क्रिएटर्स शामिल रहे। पायल ढारे इस समूह में एकमात्र महिला गेमर थीं।

बैठक में गेमिंग उद्योग से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई और साथ ही हल्के माहौल में खेल भी खेले गए। प्रधानमंत्री ने मोबाइल गेमिंग से लेकर वर्चुअल रियलिटी तक कई फॉर्मेट को खुद आजमाया। इस दौरान भारतीय पौराणिक विषयों पर आधारित एक खेल में उन्होंने भाग लिया।

मोदी का संदेश: नियंत्रण नहीं, समर्थन चाहिए

प्रधानमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि ई-स्पोर्ट्स उद्योग, जो युवाओं के लिए रोजगार के असंख्य अवसर पैदा कर सकता है, उस पर कठोर नियमन थोपना उल्टा असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को एक संरचित और कानूनी ढांचे के भीतर बढ़ने देना जरूरी है।

मोदी ने ई-स्पोर्ट्स को जुए और रियल मनी गेमिंग से अलग एक मुख्यधारा के खेल के रूप में स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने गेमिंग की बारीकियों को समझने और उन्हें राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप ढालने की बात कही। गेमर्स ने प्रधानमंत्री की उद्योग की गहरी समझ देखकर आश्चर्य जताया।

500 करोड़ गेमर्स का देश, 3.1 अरब डॉलर का उद्योग

वित्त वर्ष 2023 में भारत के गेमिंग क्षेत्र का राजस्व 3.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया जो इस उद्योग की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। भारत में इस समय 50 करोड़ से अधिक गेमिंग उत्साही हैं जो इसे दुनिया के सबसे बड़े गेमिंग बाजारों में से एक बनाता है।

गेमिंग क्रिएटर्स ने प्रधानमंत्री को लाइवस्ट्रीम जगत में ‘NaMo OP’ उपनाम दिया जिसमें OP का अर्थ ‘ओवरपावर्ड’ यानी असाधारण रूप से शक्तिशाली होता है। क्रिएटर्स ने उन्हें देश का सबसे प्रभावशाली और ‘कूलेस्ट’ व्यक्तित्व बताया।

क्रिएटर्स ने क्या कहा

8बिट क्रिएटिव्स और S8UL के संस्थापक अनिमेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की उद्योग की बारीकियों की समझ देखकर वे दंग रह गए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सरकार का समर्थन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगा।

नमन माथुर ने इस अनुभव को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के साथ भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित खेल खेलना जीवन का एक अविस्मरणीय पल था। उन्हें उम्मीद है कि यह क्षण भारत में गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।

पायल ढारे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिला गेमर्स की संभावनाओं पर गंभीरता से बात की। मोदी ने ई-स्पोर्ट्स और गेमिंग कंटेंट क्रिएशन के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझा। भारतीय संस्कृति और पर्यावरण विषयों पर आधारित गेम विकसित करने की उनकी सोच पायल को बेहद प्रेरणादायक लगी।

लोकेश जैन और पार्थ चड्ढा ने भी प्रधानमंत्री की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम गेमिंग को एक व्यवहार्य करियर विकल्प के रूप में मान्यता देता है और डिजिटल अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को रेखांकित करता है।

PROG अधिनियम 2025: नया नियामक ढांचा

केंद्र सरकार ने 1 मई 2026 के बाद से प्रभावी होने वाले ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन और विनियमन अधिनियम 2025 के तहत नए नियम अधिसूचित किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा तैयार इन नियमों को व्यापक अंतर-मंत्रालयी परामर्श और कानूनी जांच के बाद अंतिम रूप दिया गया।

नए ढांचे का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं विशेषकर बच्चों और संवेदनशील वर्गों को वित्तीय और मानसिक नुकसान से बचाना है। साथ ही भारत को वैश्विक गेमिंग और डिजिटल रचनात्मकता का केंद्र बनाने का लक्ष्य भी इस नीति में शामिल है। नियामकीय स्पष्टता और निश्चितता लाना इस पहल का केंद्रीय उद्देश्य है।

गेम्स का वर्गीकरण कैसे होगा

नए नियमों के तहत यह तय किया जाएगा कि कोई गेम ऑनलाइन मनी गेम की श्रेणी में आता है, अनुमत सामाजिक गेम है या ई-स्पोर्ट है। यह वर्गीकरण प्राधिकरण स्वयं, सेवा प्रदाताओं के आवेदन अथवा सरकारी अधिसूचनाओं के जरिए शुरू किया जा सकता है।

वर्गीकरण के लिए दांव की उपस्थिति, मौद्रिक पुरस्कार की संभावना, राजस्व मॉडल और प्लेटफॉर्म के बाहर इन-गेम पुरस्कारों को नकद में बदलने की क्षमता जैसे वस्तुनिष्ठ मानदंड अपनाए जाएंगे। स्वीकृत गेम्स को 10 वर्ष तक वैध डिजिटल प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना

नए ढांचे के केंद्र में ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण ऑफ इंडिया की स्थापना है जो एक डिजिटल नियामक के रूप में वर्गीकरण, अनुपालन, शिकायत निवारण और प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालेगा। यह प्राधिकरण MeitY के अधीनस्थ कार्यालय के रूप में नई दिल्ली में स्थापित होगा।

इसमें गृह मंत्रालय, वित्त, सूचना एवं प्रसारण, युवा मामले एवं खेल तथा विधि एवं न्याय जैसे प्रमुख मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ऑनलाइन मनी गेम्स को राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 के तहत ई-स्पोर्ट के रूप में मान्यता देने पर पाबंदी रहेगी।

GenZ की नजर में: पहचान या रणनीति

GenZ के लिए यह मुलाकात महज एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान जैसी है। गेमिंग को लंबे समय तक ‘समय की बर्बादी’ कहा जाता रहा लेकिन अब उसे सर्वोच्च स्तर पर स्वीकृति मिल रही है। इंटरनेट पर मोदी को ‘सबसे कूल प्रधानमंत्री’ कहा जा रहा है।

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह युवा संस्कृति की ओर एक वास्तविक झुकाव है या सुनियोजित डिजिटल रणनीति का हिस्सा। लेकिन जो तय है वह यह है कि नीति और खेल दोनों मोर्चों पर सरकार ने भारत की गेमिंग दुनिया को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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