Saturday, April 25, 2026

लेंसकार्ट के बाद इंडिगों में बवाल, मंगलसूत्र, कलावा और सिंदूर पर रोक, मुस्लिमों को छूट

लेंसकार्ट के बाद इंडिगों में बवाल: लेंसकार्ट विवाद के बाद अब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो भी धार्मिक प्रतीकों को लेकर बड़े विवाद में घिरती नजर आ रही है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे कुछ दस्तावेजों ने कंपनी की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इंडिगो की कथित ग्रूमिंग गाइडलाइन के कुछ स्क्रीनशॉट वायरल हुए।

इन दस्तावेजों को ‘Male Poise’ और ‘Female Poise’ नाम से शेयर किया गया, जिनमें दावा किया गया है कि कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान तिलक,

बिंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति नहीं है।

हालांकि इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक कंपनी की ओर से नहीं की गई है, लेकिन इसके बावजूद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है।

धार्मिक भेदभाव के आरोप

सोशल मीडिया यूजर्स ने इन कथित नियमों को धार्मिक भेदभाव बताते हुए सवाल उठाए हैं।

कई लोगों का कहना है कि अगर किसी एक धर्म के प्रतीकों पर रोक लगाई जा रही है, तो अन्य धर्मों के प्रतीकों पर भी समान नियम लागू होने चाहिए।

कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि नियमों में असमानता दिखाई दे रही है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

सोशल मीडिया पर बॉयकॉट की मांग

जैसे ही यह मामला वायरल हुआ, इंडिगो के खिलाफ ‘बॉयकॉट’ की मांग तेज हो गई।

लोगों ने कंपनी को चेतावनी दी कि वह देश की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करे।

कई यूजर्स ने यह भी कहा कि कॉर्पोरेट सेक्टर में ऐसे नियम समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं और इससे कंपनियों की छवि पर भी असर पड़ता है।

लेंसकार्ट विवाद

इस पूरे मामले की तुलना हाल ही में हुए लेंसकार्ट विवाद से की जा रही है। उस समय भी कंपनी के स्टोर गाइड में बिंदी, तिलक और कलावा जैसे प्रतीकों पर रोक को लेकर विरोध हुआ था।

विवाद बढ़ने पर कंपनी को सफाई देनी पड़ी थी और उसके सह-संस्थापक Peyush Bansal ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।

अब इंडिगो के मामले में भी लोग वैसी ही प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

कुछ लोगों ने इस मुद्दे पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि निजी कंपनियों के लिए धार्मिक अभिव्यक्ति को

लेकर स्पष्ट और समान दिशा-निर्देश होने चाहिए, ताकि किसी भी धर्म के साथ भेदभाव न हो।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article