PM मोदी से मिले शरद पवार गुट के 8 सांसद: महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल बढ़ गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SP के सभी 8 सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
सांसदों के इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले भी शामिल थीं। बताया गया कि सांसद अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों से जुड़े कई जरूरी मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे थे।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब संसद में विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है।
संसद की कार्यवाही भी लगातार प्रभावित हो रही है। ऐसे में एनसीपी (एसपी) सांसदों की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है।
महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा
जानकारी के मुताबिक, बैठक में महाराष्ट्र से जुड़े कई अहम विषयों पर प्रधानमंत्री के साथ बातचीत हुई। सांसदों ने अपने क्षेत्रों में बारिश और बाढ़ से पैदा हुई स्थिति को प्रधानमंत्री के सामने रखा।
इसके अलावा किसानों की फसलों की कीमत, खेती से जुड़ी परेशानियों और अलग-अलग विकास कार्यों को लेकर भी चर्चा हुई।
सांसदों ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनके लोकसभा क्षेत्रों में लोगों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
खासकर बारिश और बाढ़ से प्रभावित इलाकों में लोगों की परेशानी, किसानों की स्थिति और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर ध्यान देने की मांग की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों की बात सुनी और उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया।
सांसदों को आश्वासन दिया गया कि संबंधित समस्याओं को देखा जाएगा और उनके समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।
संसद में गतिरोध के बीच हुई मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और एनसीपी (एसपी) सांसदों की मुलाकात का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
इस समय संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।
विपक्षी दल अमित शाह से लाठीचार्ज से जुड़े मामले पर स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा राम मंदिर से जुड़े चंदे के आरोपों का मुद्दा भी विपक्ष की ओर से उठाया जा रहा है।
इन मुद्दों को लेकर संसद में लगातार हंगामे की स्थिति बनी हुई है।
ऐसे माहौल में विपक्षी गठबंधन का हिस्सा रही एनसीपी (एसपी) के सांसदों का प्रधानमंत्री से मिलना चर्चा का विषय बन गया है।
क्या एनसीपी (एसपी) और NDA के बीच बढ़ रही नजदीकी?
एनसीपी (एसपी) सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। खास तौर पर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट के बीच इस मुलाकात को लेकर सवाल उठने लगे।
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने इस मुलाकात को लेकर ज्यादा चिंता जाहिर नहीं की। उन्होंने कहा कि शरद पवार गुट के सांसदों का प्रधानमंत्री से मिलना कोई नई बात नहीं है।
संजय राउत ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार शरद पवार NDA में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जहां तक वह शरद पवार को जानते हैं, ऐसा होने की संभावना नहीं है।
कांग्रेस ने दी अलग सलाह
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने भी एनसीपी (एसपी) सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सांसदों को प्रधानमंत्री के सामने महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने का मुद्दा उठाना चाहिए।
सचिन सावंत के मुताबिक, महिला आरक्षण से जुड़ा कानून साल 2023 में संसद से पारित हो चुका है।
ऐसे में इसे जल्द लागू किए जाने की मांग की जानी चाहिए। उन्होंने परिसीमन के मुद्दे का विरोध करने की बात भी कही।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को अपनी एकजुटता प्रधानमंत्री के सामने दिखानी चाहिए और इंडिया ब्लॉक की एकता को बनाए रखना जरूरी है।
सुप्रिया सुले ने मुलाकात से पहले क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले सुप्रिया सुले ने भी इस बैठक की वजह बताई थी। उन्होंने कहा था कि दुर्भाग्य से संसद की कार्यवाही ठीक तरह से नहीं चल पा रही है।
ऐसे में सांसद अपने लोकसभा क्षेत्रों से जुड़े कई जरूरी मुद्दे संसद में नहीं उठा पा रहे हैं।
सुले ने बताया था कि महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एनसीपी (एसपी) के सभी 8 सांसद प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि पार्टी ने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए आधिकारिक तौर पर समय मांगा था।
कुल मिलाकर, यह मुलाकात महाराष्ट्र से जुड़े स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी चर्चा में है।
एक तरफ एनसीपी (एसपी) सांसदों ने अपने क्षेत्रों की समस्याएं प्रधानमंत्री के सामने रखीं, वहीं दूसरी तरफ इस बैठक ने महाराष्ट्र के विपक्षी खेमे में नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हालांकि, नेताओं के बयानों से फिलहाल यह साफ है कि इस मुलाकात को तत्काल किसी राजनीतिक गठजोड़ से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है।

