NIA ने TMC नेता को किया गिरफ्तार: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने और हिंसक प्रदर्शन के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो नेताओं को गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तार नेताओं की पहचान सरीउल शेख और यूसुफ शेख के रूप में हुई है।
दोनों से लंबी पूछताछ के बाद 8 मई को हिरासत में लिया गया।
सरीउल शेख कालीचक-1 ब्लॉक में टीएमसी के अध्यक्ष हैं, जबकि यूसुफ शेख सुजापुर क्षेत्र के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रह चुके हैं।
एजेंसी ने पूछताछ के दौरान दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े होने के आरोप
NIA के अनुसार, दोनों नेताओं की भूमिका उन प्रदर्शनों से जुड़ी हुई है जिनके दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था।
जांच एजेंसी का दावा है कि सरीउल शेख के नर्सिंग होम के सामने ही प्रदर्शन हुआ था, जिससे उनकी भूमिका पर संदेह और गहरा गया है।
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस पूरे घटनाक्रम की पहले से योजना बनाई गई थी और क्या स्थानीय राजनीतिक नेटवर्क के जरिए भीड़ को संगठित किया गया था।
चुनावी हलचल के बीच भेजे गए थे नोटिस
विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले NIA ने इस मामले में नौ लोगों को नोटिस जारी किए थे। इनमें कई स्थानीय राजनीतिक पदाधिकारी और प्रभावशाली लोग शामिल थे।
सुजापुर सीट की उम्मीदवार सबीना यास्मीन के चुनाव एजेंट अब्दुर रहमान, पूर्व खाद्य अधीक्षक हाजी केताबुद्दीन शेख समेत कई अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
शुरुआत में कई लोगों ने चुनावी व्यस्तता का हवाला देकर एजेंसी के समक्ष पेश होने से बचने की कोशिश की, लेकिन बाद में उन्हें जांच में शामिल होना पड़ा।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
इस मामले में NIA पहले ही मंजिर उर्फ भोला शेख को गिरफ्तार कर चुकी है। वह सुजापुर ग्राम पंचायत के हालपाड़ा इलाके का निवासी है।
एजेंसी का मानना है कि वह घटनास्थल पर मौजूद था और भीड़ को उकसाने में उसकी भूमिका हो सकती है।
उसकी गिरफ्तारी के बाद ही जांच ने राजनीतिक कनेक्शन की दिशा में तेजी पकड़ी थी।
मालदा में हुआ बवाल
पूरा मामला 1 अप्रैल का है, जब मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में सात न्यायिक अधिकारियों को उग्र भीड़ ने करीब आठ घंटे तक बंधक बनाए रखा था।
इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और डराने-धमकाने की भी शिकायत सामने आई थी।
घटना के बाद पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
राष्ट्रीय राजमार्ग जाम के पीछे साजिश की जांच
उसी रात सुजापुर अस्पताल और चौरींगी मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को पांच अलग-अलग स्थानों पर जाम किया गया था।
NIA अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया था ताकि प्रशासनिक कार्रवाई को रोका जा सके।

