ममता बनर्जी का जय श्री राम विरोध
2021 में ममता बनर्जी ने जय श्री राम को बंगाल विरोधी घोषित करके जय बांग्ला का नारा दिया था। आज उसी बंगाल में सर्वत्र जय श्री राम की गूंज सुनाई दे रही है। यह बदलाव उसी धरती पर हुआ है जहां ममता ने इस नारे को गाली बताया था।
ममता ने जय श्री राम बोलने वालों को अपमानजनक माना था। उन्होंने ऐसे नारे लगाने वाले युवकों को गिरफ्तार करवाया था। इस नारे को वह अपनी बेइज्जती मानती थीं। उनकी राजनीति इसी विरोध पर केंद्रित रही।
सड़कों पर विवादास्पद घटना
2019 में ममता के काफिले के रास्ते पर कुछ युवकों ने जय श्री राम का नारा लगाया। यह सुनते ही ममता ने अपना काफिला तुरंत रुकवा दिया। नारे लगाने वाले युवकों को देखकर वह उनके पास गईं।

ममता ने गुस्से में उन युवकों से पूछा कि वह भाग क्यों रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें गाली देने की हिम्मत कैसे हुई। जय श्री राम के इस पवित्र नारे को वह गाली कह रही थीं। पुलिस ने तुरंत उन तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया।
यह घटना वायरल हुई और सरकार की असहिष्णु नीति की एक कड़ी बन गई। बंगाल में अभिव्यक्ति की आजादी प्रश्नचिह्न के दायरे में थी।
नेताजी जयंती पर विवाद
जनवरी 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती समारोह में भारतीय प्रधानमंत्री भी उपस्थित थे। कुछ प्रतिभागियों ने जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाए। यह सुनकर ममता बनर्जी नाराज हो गईं।
ममता ने घोषणा की कि वह इस कार्यक्रम में भाषण नहीं देंगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जय श्री राम और भारत माता की जय के नारों से उन्हें अपमानित किया गया है। राजनीतिक एजेंडे के तहत उन्होंने एक पवित्र नारे को विवादास्पद बना दिया।
धार्मिक विरोध की विरासत
ममता की विचारधारा ऐसी थी जिसमें हिंदू धार्मिक प्रतीकों के प्रति विद्वेष था। इस व्यवहार से बंगाल की राजनीति धार्मिक विभाजन की तरफ बढ़ रही थी। पर जनता की सांस्कृतिक चेतना को दबाया नहीं जा सकता था।
परिवर्तन की नई बयार
बंगाल में अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। वह राज्य जहां ममता ने धार्मिक अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध लगाए थे, आज वहां जय श्री राम के नारे गूंजते हैं। गांव-गांव, शहर-शहर सर्वत्र इस नारे की गूंज सुनाई दे रही है।
राजनीतिक परिवर्तन के बाद शपथग्रहण समारोहों में जय श्री राम का उद्घोष हो रहा है। बंगाल की जनता के चेहरों पर सांस्कृतिक मुक्ति का भाव दिखता है। दशकों की दमनकारी नीतियों के बाद जनता अपनी सांस्कृतिक विरासत को स्वीकार कर रही है।
नई चेतना का जागरण
बंगाल में आज जो दृश्य दिखते हैं वह ममता की राजनीति के पूर्ण विरोध में हैं। जनता इस बात को समझ गई है कि धार्मिक भावनाओं को दमित नहीं किया जा सकता। सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय चेतना को राजनीतिक नफरत से नहीं मिटाया जा सकता।
आज बंगाल की जनता स्वतंत्रता से लबरेज है। वह अपनी संस्कृति को खुलेआम व्यक्त कर रही है। यह परिवर्तन केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का संकेत है।

