शुभेन्दु अधिकारी का शपथग्रहण: बंगाल में नए युग की शुरुआत
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की बनी। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त रहा।

अटूट सरकार का ज्योतिषीय आधार
कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में विराजमान हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं। इससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है।
धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही विराजमान हैं। इसलिए सूर्य ने दूसरे, तीसरे और बारहवें भावों को अपने नियन्त्रण में ले लिया है।
बंगाल में सुख समृद्धि की बरसात
सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही स्थिति में हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है।
बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। राज्य में विकास और समृद्धि का नया दौर शुरू होने वाला है।
अपराधियों के खिलाफ जंग: धर्मक्षेत्र में घमासान
पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ स्थित हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है।
योगी मॉडल पर पुलिस एनकाउंटर की भरमार
इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी। अपराधियों पर नियंत्रण स्थापित करके कानून व्यवस्था बहाल की जाएगी।
शिक्षा में क्रांति, साहित्य का पुनरुत्थान
शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी।
धर्म की नजर से नहीं बचेंगे शत्रु
षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में स्थित हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं। इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं।
हिन्दू विरोधियों पर बड़ी कार्यवाही
सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधियों को, गुंडों को झेलनी पड़ेगी और अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे।
दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही स्थिति में विराजमान हैं। यह स्थिति रहस्यमयी घटनाओं और गुप्त शक्तियों का संकेत देती है।
दशमांश में आरपार का युद्ध
दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही स्थिति में हैं, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा और अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश बुध भी मृत्यु भाव में पड़ गया है। तो लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने।
शेर की मांद में सियार का फंसना
यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? यह मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी?
मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। तो सरकार की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है और शत्रुओं का विनाश तय है।
सूर्य के नियंत्रण में पांच भाव
पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त स्थिति में हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं। तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण में होकर पहले, तीसरे, पांचवें, छठे और आठवें इन पांच भावों के नियंत्रक हो गए हैं।
स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश हैं। तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं। साथ में धर्म की ध्वज केतु विराजमान हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना।
पाप की पराजय, शत्रुओं का सर्वनाश
पर अशुभ है मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो सर्वनाश निश्चित है। अपराधी तत्वों और विरोधियों का पूर्ण खात्मा होने वाला है।
श्रवण नक्षत्र: राज्याभिषेक का सबसे शुभ संयोग
ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है। उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है।
भगवान विष्णु का नक्षत्र: जनता का पालन
यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है। जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी। दवा देगी, सुरक्षा करेगी और यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया है।
तीन पग में तीन लोक: बंगाल की सीमा विस्तार
इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने तीन पग में ही तीन लोक नाप लिए थे। इसलिए मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा।
इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। राज्य की सीमाओं पर पूर्ण नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था स्थापित होगी।
दशा काल का प्रभाव: अपराधियों पर आक्रामक कार्यवाही
अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। ये घटनाएं बंगाल की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डालेंगी।

