NEET-UG परीक्षा: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के स्वरूप में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में संकेत दिया है कि परीक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
इनमें सबसे अहम प्रस्ताव मौजूदा पेन-पेपर परीक्षा की जगह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) लागू करना और परीक्षा को JEE की तरह दो चरणों में आयोजित करना शामिल है।
हर साल करीब 22 लाख छात्र NEET-UG परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
पिछले वर्ष पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग लगातार उठ रही थी। इसी के जवाब में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को अपने प्रस्तावित सुधारों की जानकारी दी है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर हो रहा विचार
सरकार ने बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जिन आठ प्रमुख परीक्षाओं का आयोजन करती है, उनमें से सात पहले ही ऑनलाइन माध्यम से कराई जा रही हैं।
ऐसे में अब NEET-UG को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि ऑनलाइन परीक्षा होने से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बढ़ेगी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
JEE की तरह दो चरणों में हो सकती है परीक्षा
हलफनामे के अनुसार, सरकार NEET-UG को भी JEE की तरह दो स्तरों में आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रही है।
पहले चरण में सभी उम्मीदवार शामिल होंगे, जबकि दूसरे चरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को मौका मिल सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अधिक योग्य छात्रों का चयन करना ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित बनाना भी है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मॉडल को लागू करने का अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही कोई घोषणा की जाएगी।
अंतिम फैसला अभी बाकी
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परीक्षा पैटर्न में किसी भी बड़े बदलाव को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाएगा।
यदि नया प्रारूप लागू किया जाता है तो छात्रों को पहले से पर्याप्त समय दिया जाएगा, ताकि वे नई व्यवस्था के अनुसार अपनी तैयारी कर सकें।
सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स
परीक्षा सुधारों पर सुझाव देने के लिए सरकार ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया है।
यह समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
सरकार ने कहा है कि NEET-UG में किसी भी बदलाव से पहले इस टास्क फोर्स की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
रिपोर्ट मिलने के बाद ही नए परीक्षा ढांचे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत
सरकार ने अपने हलफनामे में परीक्षा सुरक्षा को लेकर किए जा रहे कई सुधारों की भी जानकारी दी है। भविष्य में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीक का अधिक उपयोग किया जाएगा।
इसके तहत प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, GPS से ट्रैक होने वाले वन-टाइम लॉक ट्रंक और एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्न बैंक जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं अपनाने की योजना है।
इसके अलावा परीक्षा संचालन से जुड़े प्रशासनिक और तकनीकी नियमों को भी पहले से अधिक सख्त बनाया जा रहा है,
ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना कम हो सके।
सभी संबंधित संस्थाओं से होगी चर्चा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि NEET-UG के नए स्वरूप पर अंतिम निर्णय लेने से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा की जाएगी।
सभी पक्षों की राय और विशेषज्ञों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए ही परीक्षा प्रणाली में बदलाव लागू किए जाएंगे।
छात्रों के लिए क्या है संदेश?
फिलहाल NEET-UG की तैयारी कर रहे छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने साफ कहा है कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और यदि भविष्य में परीक्षा का पैटर्न बदला जाता है, तो इसकी जानकारी काफी पहले दे दी जाएगी।
इससे छात्रों को नई व्यवस्था के अनुसार अपनी रणनीति बनाने और तैयारी करने का पूरा अवसर मिलेगा।

