अयातुल्लाह अली खामेनेई: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए शनिवार 4 जुलाई से शुरू होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
राजधानी तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और दुनिया के कई देशों से प्रतिनिधिमंडल पहुंचना शुरू हो गए हैं।
ईरानी प्रशासन का दावा है कि अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग राजधानी पहुंचेंगे।
भारत की ओर से भी एक प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा है। इस प्रतिनिधिमंडल में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती,
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विदेश मामलों के जानकार सलमान खुर्शीद सहित कई प्रमुख शिया नेता शामिल बताए गए हैं।
सभी नेताओं ने तेहरान पहुंचकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की और सलात-अल-जनाज़ा में हिस्सा लिया।
छह दिन तक चलेंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रम कुल छह दिनों तक आयोजित किए जाएंगे।
यह कार्यक्रम 9 जुलाई तक जारी रहेंगे। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में शोक सभाएं, धार्मिक आयोजन और विशेष प्रार्थनाएं होंगी।
7 जुलाई को कौम शहर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़ी संख्या में धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
इसके बाद अंतिम चरण में अयातुल्लाह अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
तेहरान में उमड़ सकती है भारी भीड़
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने के लिए करोड़ों लोगों के तेहरान पहुंचने की संभावना जताई गई है।
प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए राजधानी में विशेष इंतजाम किए हैं। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
पूरे ईरान में खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों को भी शोक
संदेशों और झंडों से सजाया गया है। देशभर में शोक का माहौल देखा जा रहा है।
भारत की ओर से कौन-कौन हुआ शामिल
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था।
हालांकि पहले से तय विदेशी कार्यक्रमों के कारण प्रधानमंत्री इस दौरे में शामिल नहीं हो सके।
सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
इनके अलावा विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े अन्य प्रतिनिधि भी ईरान पहुंचे हैं।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और दोनों देशों के संबंधों पर भी चर्चा की।
खामेनेई की मौत के बाद बदला था माहौल
करीब 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की कथित संयुक्त एयर स्ट्राइक में मौत होने का दावा किया गया था।
इस घटना के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया और कई क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं।
क्षेत्रीय संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन भी प्रभावित हुआ, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर असर पड़ा।
इसका प्रभाव भारत सहित कई देशों में देखने को मिला, जहां कच्चे तेल और एलपीजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों में भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
दुनिया की नजर ईरान पर
खामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि ईरान की राजनीतिक स्थिति और भविष्य की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
आने वाले दिनों में तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।
ईरानी प्रशासन ने दावा किया है कि सभी समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

