कमाल अख्तर ने छोड़ा सपा का साथ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है।
मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमाल अख्तर ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से इस्तीफा दे दिया है।
उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, कमाल अख्तर ने साफ कहा है कि उन्होंने यह फैसला पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया है और इसका किसी व्यक्तिगत विवाद से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने बताया कि पार्टी समय-समय पर संगठन और विधानसभा में जिम्मेदारियों में बदलाव करती रहती है।
वह करीब डेढ़ साल तक मुख्य सचेतक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं और अब पार्टी किसी दूसरे नेता को यह दायित्व सौंपना चाहती है।
कमाल अख्तर ने कहा कि वह पार्टी के हर फैसले का सम्मान करते हैं और अब उनका पूरा ध्यान अपने विधानसभा क्षेत्र तथा आगामी चुनावों की तैयारियों पर रहेगा।
पार्टी में बदलाव की सामान्य प्रक्रिया बताया
कमाल अख्तर ने इस्तीफे को लेकर किसी भी तरह के विवाद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह संगठनात्मक फैसला है।
उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों में समय-समय पर नई जिम्मेदारियां तय की जाती हैं ताकि संगठन को और मजबूत बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले की तरह पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम करते रहेंगे और संगठन जहां भी उन्हें जिम्मेदारी देगा, उसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।
सपा नेतृत्व की ओर से अभी तक इस बदलाव पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही नए मुख्य सचेतक के नाम की घोषणा की जाएगी।
रुचि वीरा से मतभेदों की चर्चा तेज
कमाल अख्तर का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब हाल के महीनों में उनकी और मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा के बीच मतभेदों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से तालमेल की कमी दिखाई दे रही थी।
बताया जाता है कि मुरादाबाद में आयोजित कई पार्टी कार्यक्रमों में लगाए गए पोस्टरों में कभी कमाल अख्तर की तस्वीर नहीं होती थी तो कभी रुचि वीरा को जगह नहीं दी जाती थी।
इसी तरह दोनों नेताओं के समर्थकों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी एक-दूसरे की उपस्थिति या तस्वीरों का अभाव चर्चा का विषय बना रहा। इससे यह संदेश गया कि जिले में पार्टी के भीतर दो अलग-अलग धड़े सक्रिय हैं।
अखिलेश यादव ने की थी बैठक
दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी की खबरें पार्टी नेतृत्व तक भी पहुंचीं। इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में कमाल अख्तर और रुचि वीरा दोनों को बुलाकर बैठक की।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने और आपसी मतभेदों को सार्वजनिक न करने की सलाह दी गई थी।
हालांकि, बैठक के बाद दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से किसी विवाद से इनकार किया था, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुरादाबाद में गुटबाजी की चर्चाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
गुटबाजी को लेकर क्या हैं राजनीतिक चर्चाएं?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुरादाबाद में सपा के भीतर लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक धड़ों का प्रभाव रहा है।
रुचि वीरा को आजम खान खेमे के करीब माना जाता है, जबकि कमाल अख्तर को पूर्व सांसद एस.टी. हसन के करीबी नेताओं में गिना जाता है।
हालांकि, दोनों नेताओं ने कभी खुलकर इस तरह की गुटबाजी को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं।
इसी वजह से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ने की बात भी कही जाती है।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि संगठन में सभी नेता एकजुट होकर काम करें।
अब किसे मिलेगी जिम्मेदारी?
कमाल अख्तर को जुलाई 2024 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का मुख्य सचेतक बनाया गया था।
उनसे पहले यह जिम्मेदारी मनोज पांडे निभा रहे थे। अब उनके इस्तीफे के बाद सपा जल्द ही नए मुख्य सचेतक के नाम का ऐलान कर सकती है।
फिलहाल कमाल अख्तर ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका इस्तीफा पार्टी के निर्देश पर दिया गया है और वह संगठन के फैसले का सम्मान करते हैं।

